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पिताजी करते हैं किराने की दुकान में काम, बेटा BARC में बना साइंटिस्ट

सेपरेशन ऑफ अक्टिनाइड फ्रॉम स्पेंट फ्यूल एंड आउटस्टैंडींग केमिकल साइंस अनुसंधान के लिए BARC की टीम कार्यरत थी।

Danik Bhaskar | Dec 10, 2017, 11:53 AM IST
भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर कमलेश नीलकंठ व्यास और जैव प्रौद्योगिकी डिपार्टमेंट के केंद्रीय सचिव कृष्णस्वामी विजय राघवन के हाथों हाल ही में मयूर को स्वर्णपदक प्रदान किया गया। भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर कमलेश नीलकंठ व्यास और जैव प्रौद्योगिकी डिपार्टमेंट के केंद्रीय सचिव कृष्णस्वामी विजय राघवन के हाथों हाल ही में मयूर को स्वर्णपदक प्रदान किया गया।

जलगांव. भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर (BARC) में साइंटिस्ट मयूर पाटिल को महत्वपूर्ण अनुसंधान के लिए हाल ही में दूसरी बार गोल्ड मेडल मिला है। "सेपरेशन ऑफ अक्टिनाइड फ्रॉम स्पेंट फ्यूल एंड आउटस्टैंडिंग केमिकल साइंस" इस सबजेक्ट के अनुसंधान के लिए BARC की टीम कार्यरत थी जिसमें मयूर भी शामिल थे। केंद्र सरकार ने इस टीम के सभी मेंबर्स के साथ मयूर को भी स्वर्णपदक से सम्मानित किया है। मयूर के पिता जलगांव के अमलनेर में किराने की दुकान में जॉॅब करते हैं। बेटे को साइंटिस्ट बनाने पिता का स्ट्रगल....


-भाभा एटोमिक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर कमलेश नीलकंठ व्यास और जैव प्रौद्योगिकी डिपार्टमेंट के केंद्रीय सचिव कृष्णस्वामी विजय राघवन के हाथों हाल ही में मयूर को स्वर्णपदक मिला।
-मयूर के पिता भगवान पाटिल मूल रुप से धुले जिले के शिरपुरा के रहने वाले हैं। कुछ साल पहले वे अमलनेर की मिल में मजदूरी करते थे। एक दिन अचानक मिल बंद हो गई और भगवान पाटिल की नौकरी चली गई, ऐसे में पाटिल दंपति की माली हालत खराब हो गई। इसके बाद उन्हें अमलनेर की एक किराने की दुकान मे क्लर्क की नौकरी मिली।
-तीन बच्चों की परवरिश और उनकी शिक्षा के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बेटे मयूर का साइंटिस्ट बनने का सपना था। इसे पूरा करने के लिए पाटिल दंपति ने जी तोड़ मेहनत की। पिता ने बार दो- दो नौकरियां की। जब मयूर साइंटिस्ट बना और उसे भाभा एटोमिक सेंटर में नौकरी मिली तो उनका बोझ हल्का हुआ लेकिन वे आज भी नौकरी करते हैं।

मयूर ने ऐसे की पूरी की पढ़ाई

-मयूर ने अमलनेर के सानेगुरूजी हाईस्कूल में दसवीं तक की पढ़ाई की इसके बाद उसने प्रताप कॅालेज से बीएससी तक की पढ़ाई पूरी की। इसी दौरान प्रिसिंपल और नैनो साइंटिस्ट डाॅ. एल. ए पाटिल ने मार्गदर्शन किया और उत्तर महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से एमएससी की पढ़ाई करने की सलाह दी। एमएससी पूरी करने के बाद मयूर ने BARC का एग्जाम टाॅप किया। वह अब वहां साइंटिस्ट बन गए हैं। मयूर के साइंटिस्ट बनने से उसका परिवार आज अपने खुद के घर में रहने लगा है। वहीं बेटे को स्वर्णपदक मिलने से पिता उस पर काफी खुश है।

पिता ने क्या कहा ?

- भगवान पाटिल ने बताया कि उनकी आर्थिक हालत नाजुक थी ऐसे में बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था लेकिन मेरे बेटे ने पढ़ाई की जिद नहीं छोड़ी। माली हालत ठीक ने होने से बेटा इतना बड़ा चमत्कार करेगा इस पर मुझे विश्वास ही नहीं था लेकिन उसे यह सच कर दिया। बेटे की वजह से मेरे बोझ कम हुआ लेकिन मैं आज भी समय मिलने पर नौकरी करता हूं। उसकी सफलता से मुझे काफी खुशी हो रही है।

मयूर ने उत्तर महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से अपनी एमएससी की पढ़ाई पूरी की। मयूर ने उत्तर महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से अपनी एमएससी की पढ़ाई पूरी की।
मयूर के पिता आज भी किराने के दुकान में काम करते हैं। मयूर के पिता आज भी किराने के दुकान में काम करते हैं।
अपने माता पिता के साथ मयूर अपने माता पिता के साथ मयूर