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पुणे हिंसा: महाराष्ट्र की सियासत में मराठा और दलित अहम, 40 सीटों पर है इनका असर

महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण में मराठा और दलित वोट बैंक हमेशा से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 10:36 PM IST

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    महाराष्ट्र के कुछ इलाकों में सोमवार और मंगलवार को जातीय हिंसा की घटनाएं हुईं। -फाइल

    पुणे/मुंबई.पुणे के भीमा कोरेगांव इलाके में सोमवार को मराठा और दलित समुदाय के बीच हुई हिंसा की आग मंगलवार को पूरे महाराष्ट्र में फैलती नजर आई। मुंबई, औरंगाबाद समेत राज्य के कई शहरों में मराठा और दलित समुदाय के लोगों ने हिंसक प्रदर्शन किया। महाराष्ट्र के राजनीतिक समीकरण में मराठा और दलित वोट बैंक का रोल हमेशा से ही अहम रहा है। इसी वजह से सरकार भी कई बार वोट बैंक के आगे झुकती हुई नजर आई।

    महाराष्ट्र में 10% दलित, 33% मराठा

    - देश में कुल 16% दलित आबादी है। बात महाराष्ट्र की करें तो यहां 10.5% दलित आबादी है। इसमें से विदर्भ में सबसे ज्यादा 23% दलितों की संख्या है।

    - विधानसभा की बात करें तो हर विधानसभा में औसतन 15,000 दलित वोटर्स हैं, जबकि महाराष्ट्र में लोकसभा की 15 सीटों पर दलित वोटर्स, कैंडीडेट का भविष्य तय करते हैं।

    दलितों के असर वाली 84 लोकसभा सीटें, 40 बीजेपी के पास

    - लोकसभा की 84 रिजर्व सीटों में से 40 पर बीजेपी का कब्जा है। 2014 के लोकसभा चुनावों में रिजर्व सीटों पर 19% दलित वोटर्स ने बीजेपी को वोट दिया था। वहीं नॉन रिजर्व सीटों पर दलितों का 24% वोट बीजेपी को मिला था।

    - सीएसडीएस के सर्वे के मुताबिक, बीजेपी को दलितों के इतने वोट 2014 लोकसभा चुनाव से पहले नहीं मिले थे। इससे पहले के लोकसभा चुनावों में दलित वोट का 10 से 12% ही बीजेपी के खाते में जाता था। जबकि कांग्रेस को 30% और मायावती की बहुजन समाज पार्टी को 20% वोट मिलते थे।
    - 2014 के चुनावों में बीजेपी को 24% दलित वोट मिले, जबकि कांग्रेस की झोली में 19% और बीएसपी को 14% दलितों का वोट मिला।

    महाराष्ट्र में 10 मराठा मुख्यमंत्री

    - महाराष्ट्र की कुल जनसंख्या का 33% मराठा कम्युनिटी है। 1960 से अब तक कुल 18 मुख्यमंत्री महाराष्ट्र में हुए, जिनमें से 10 मराठा समुदाय से थे।

    महाराष्ट्र में सम्पन्न हैं मराठा

    - राज्य के 50% एजुकेशनल इंस्टिट्यूट, 70% डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक और 90% शुगर फैक्ट्रीज मराठा लोगों के हाथ में है।

    - राज्य के 3 हजार परिवारों के पास कुल भूमि का 72% एग्रीकल्चरल लैंड है।
    - विधानसभा की 366 सीटों में से 288 सीटों पर मराठा एमएलए काबिज हैं। वहीं विधान परिषद की कुल सीटों के 46% पर मराठा मेंबर हैं।

    महाराष्ट्र में दलितों का चेहरा है RPI

    - डॉ. अंबेडकर की बनाई रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के 50 से ज्यादा टुकड़े हो चुके हैं। इसके एक हिस्से को उनके पोते प्रकाश आंबेडकर, जोगेंद्र कावड़े और आरएस गवई संभालते हैं। प्रकाश ने कई बार बड़ी पार्टियों पर दलित लोगों और नेताओं को दबाने का आरोप लगाया है।
    - वहीं इस पार्टी से निकले रामदास अठावले अपनी पार्टी आरपीआई-A का सपोर्ट कभी शिवसेना-बीजेपी, तो कभी कांग्रेस-एनसीपी को देकर सत्ता में बने रहे हैं।


    महार और बाकी दलितों में क्या है फर्क?

    - रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया से जुड़े दलित निओ बुद्धिष्ट दलित (महार) कहलाते हैं, जबकि अन्य पार्टियों को सपोर्ट करने वाले दलितों को हिंदू दलित कहा जाता है।

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    पुणे के भीमा कोरेगांव इलाके में मराठा और दलित समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। -फाइल
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Web Title: Importance Of Dalit And Maratha Voters In Maharashtra Politics.
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