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चांदी के सिंहासन पर बैठने के शौकीन थे बाल ठाकरे, ऐसी थी पर्सनल लाइफ

बाला साहब सिगार, मटन और व्हाइट वाइन के दीवाने थे।

Dainik Bhaskar

Jan 23, 2018, 08:54 AM IST
बाला साहब के लिए हर सभा में चांदी का सिंहासन लगता था। बाला साहब के लिए हर सभा में चांदी का सिंहासन लगता था।

मुंबई। शिवसेना संस्थापक बाला बाला साहब ठाकरे का आज जन्मदिन है। इस मौके पर हम आपको उनकी लाइफ स्टाइल के बारे में बताने जा रहे हैं। बाला साहब सिगार, मटन और व्हाइट वाइन के दीवाने थे। चांदी के सिंहासन पर बैठने के शौकीन बाला साहेब ठाकरे के घर शरद पवार अक्सर बियर पीने जाया करते थे। इस बात का खुलासा खुद बाला साहेब ने किया था। अचानक छोड़ा नॉनवेज...

जेल से बाला साहब ने वाइफ को लिखी थी ये चिट्ठी, ऐसी थी पहली और अंतिम स्पीच

- बाला साहब के एक करीबी ने बताया था कि, राजनीति में सक्रिय होने से पहले बालासाहब जब भी पुणे आते,वो मां साहब(पत्नी मीना ठाकरे)के साथ उनके मुकुंद नगर वाले समर्थ अपार्टमेंट के पांचवे फ्लोर पर बने फ्लैट में रहते थे।

- बाला साहब को नॉनवेज बहुत पसंद था, लेकिन मुंबई में आयोजित जैन धर्म एक एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद अचानक उन्होंने पूरी तरह से शाकाहारी बनने का निर्णय लिया और अंतिम समय तक इसे निभाया भी।
- अपने नॉनवेज छोड़ने की बात खुद बालासाहब ने सीनियर एडिटर मार्क मैनुअल को दिए एक इंटरव्यू में भी कबूल की थी।

खाने में यह था पसंद

- 1950 के दशक में जब बालासाहब फ्री प्रैस जर्नल में कार्टूनिस्ट हुआ करते थे,तब उन्हें घर में बना हुआ मराठी खाना और चर्चगेट के ओल्ड गॉर्डन रेस्टोरेंट का इटालियन पास्ता बहुत पसंद था।
- उन्हें थाई फूड भी बहुत पसंद थे। वह अक्सर मुंबई के अच्छे रेस्टोरेंट से खाना मंगवाते थे। उनकी पत्नी(मीना ठाकरे)भी बहुत अच्छी कुक थीं। उन्हें भी चाइनीज बहुत पसंद था।
- बाला साहब को हमेशा इस बात का मलाल रहा कि राजनीति सक्रियता के चलते स्वादिष्ट खाने का लुत्फ नहीं उठा सका।

अपने कट्टर विचारों के लिए फेमस थे बाला साहब...

- एक बार वाशिंगटन पोस्‍ट ने बाला साहेब ठाकरे के बारे में लिखा कि वे शिकागो पर राज करने वाले अल कैपन की तरह हैं जो बॉम्‍बे पर भय और धमकी से राज करते हैं।
- दक्षिण भारतीयों के खिलाफ 1960 और 70 के दशक में उन्होंने 'लुंगी हटाओ पुंगी बजाओ' अभियान चलाया।
- उन्‍होंने बिहारी लोगों को महाराष्‍ट्र में अवांछनीय बताते हुए शिव सेना के मुखपत्र सामना में लिखा, 'एक बिहारी, सौ बीमारी।'
- तत्कालीन शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे ने एक अलग ही तरह की राजनीति की। उनका खुलेआम किसी को भी धमकी देने का अंदाज और उसके बाद उपजे हालात को वह देश के गौरव से जोड़ देते थे।
- बाबरी मस्जिद के टूटने के बाद जब बीजेपी बचाव में आ गई तो उन्होंने खुलेआम कहा कि अगर उस मस्जिद को शिवसैनिकों ने तोड़ा है तो उन्हें इस बात का गर्व है।
- बाल ठाकरे की यह खासियत थी कि उनके कट्टर विरोधी भी समय-समय पर उनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते थे।

हिटलर के थे प्रशंसक

- ठाकरे खुद को एडोल्फ हिटलर का प्रशंसक बताते थे।
- उन्होंने महाराष्ट्र में मराठियों की एक ऐसी सेना बनाई, जिनका इस्तेमाल वह विभिन्न कपड़ा मिलों और अन्य औद्योगिक इकाइयों में मराठियों को नौकरियां आदि दिलाने में किया।
- इसी वजह से लोग उन्हें हिंदू हृदय सम्राट कहने लगे। अपने समर्थकों से ज्यादा घुलना-मिलना और करीबी उन्हें पसंद नहीं था और वे अपने आवास ‘मातोश्री’ की बालकनी से अपने समर्थकों को ‘दर्शन’ दिया करते थे।
- प्रसिद्ध दशहरा रैलियों में उनके जोशीले भाषण सुनने लाखों की भीड़ उमड़ती थी।

कभी किसी से नहीं गए मिलने

- बाला साहेब ठाकरे की खासियत यह थी की वह कभी किसी से मिलने नहीं गए।
- भारत की हर बड़ी हस्ती ने उनके मुंबई के घर मातोश्री में ही जाकर उनसे मुलाकात की।
- बाला साहेब की खासियत थी कि जब वह किसी का विरोध करते तो दुश्मनों जैसा और जब तारीफ करते तो ऐसे कि जैसे उससे बड़ा कोई मित्र नहीं।
- बाला साहेब किस मामले पर कब क्या कहेंगे यह समझना उनके साथ वालों के लिए भी हमेशा पहेली ही बना रहा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री की भी एक बार जमकर आलोचना की थी।
- 1996 में पॉप स्‍टार माइकल जैक्‍सन एक कन्‍सर्ट के लिए मुंबई आए। तब शिव सेना ने उनका स्‍वागत किया था। माइकल जैक्‍सन ठाकरे से मिलने उनके घर गए थे।


शरद पवार अक्सर जाते थे घर

- एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार उनके राजनीतिक दुश्मन थे।
- रैलियों में जिस तरह की भाषा वह शरद पवार के लिए इस्तेमाल करते थे उसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता।
- वहीं, शरद पवार उनके अच्छे मित्र भी थे अक्सर शरद पवार उनके घर लंच पर बियर पीने जाते थे।

आगे की स्लाइड्स में देखिए बाला साहब की कुछ चुनिंदा फोटोज...

बाला साहब को सिगार का बहुत शौक था। बाला साहब को सिगार का बहुत शौक था।
उद्धव ठाकरे, बाल ठाकरे (बीच में) और राज ठाकरे। उद्धव ठाकरे, बाल ठाकरे (बीच में) और राज ठाकरे।
नारायण राणे के साथ बाला साहब। नारायण राणे के साथ बाला साहब।
अपने विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए बाला साहब ने 'सामना' अखबार शुरू किया। अपने विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए बाला साहब ने 'सामना' अखबार शुरू किया।
बाला साहब का पूरा परिवार। बाला साहब का पूरा परिवार।
बाला साहब को पाइप पीने का शौक था। बाला साहब को पाइप पीने का शौक था।
बाल ठाकरे क्रिकेट भी खेल लेते थे। बाल ठाकरे क्रिकेट भी खेल लेते थे।
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बाला साहब के लिए हर सभा में चांदी का सिंहासन लगता था।बाला साहब के लिए हर सभा में चांदी का सिंहासन लगता था।
बाला साहब को सिगार का बहुत शौक था।बाला साहब को सिगार का बहुत शौक था।
उद्धव ठाकरे, बाल ठाकरे (बीच में) और राज ठाकरे।उद्धव ठाकरे, बाल ठाकरे (बीच में) और राज ठाकरे।
नारायण राणे के साथ बाला साहब।नारायण राणे के साथ बाला साहब।
अपने विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए बाला साहब ने 'सामना' अखबार शुरू किया।अपने विचारों को जनता तक पहुंचाने के लिए बाला साहब ने 'सामना' अखबार शुरू किया।
बाला साहब का पूरा परिवार।बाला साहब का पूरा परिवार।
बाला साहब को पाइप पीने का शौक था।बाला साहब को पाइप पीने का शौक था।
बाल ठाकरे क्रिकेट भी खेल लेते थे।बाल ठाकरे क्रिकेट भी खेल लेते थे।
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