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सरकारी स्कूल का टीचर 1 बच्चे को पढ़ाने जान जोखिम में डाल आता है स्कूल

वे रोजाना जान जोखिम में डाल 50 किलोमीटर का सफर पूरा कर सिर्फ एक बच्चे को पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Mar 27, 2018, 02:46 PM IST

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    पिछले 8 साल से 29 साल के रजनीकांत मेंढे इस स्कूल में पढ़ा रहे हैं।

    पुणे. ग्रामीण इलाके भोर के चंदर गांव में नागपुर के रहने वाले 29 साल के रजनीकांत मेंढे एक सरकारी स्कूल में टीचर हैं। वे रोजाना जान जोखिम में डाल 50 किलोमीटर का सफर पूरा कर सिर्फ एक बच्चे को पढ़ाने के लिए स्कूल आते हैं।

    400 फीट की खाई पार कर आते हैं स्कूल

    - रजनीकांत जिस बच्चे को पढ़ाने के लिए आते हैं उसका नाम युवराज सांगले है। पिछले दो साल से वह चंदर गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ाई कर रहा है। रजनीकांत इसी स्कूल के एकमात्र टीचर हैं। युवराज का गांव पहाड़ियों के बीच पड़ता है और यहां आने का एक मात्र साधन दोपहिया वाहन है। रजनीकांत रोज हाइवे से 12 किमी तक बाइक चलाते हुए 400 फीट गहरी खाई पार कर पहाड़ी रास्ते से जाते हैं।

    इस गांव में रहते हैं सिर्फ 60 लोग
    - पुणे से करीब 100 किलो मीटर दूर गांव भाेर में 15 झोपड़ियां बनी हैं जहां करीब 60 लोग रहते हैं। गांव में लोग गाय पालकर और मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। यहां स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं हैं। यहां के ज्यादातर लोग रोजी-रोटी की तलाश में मुंबई जैसे शहरों में चले गए हैं। गांव में बिजली भी नहीं है। लोगों को कुछ साल तक सोलर लाइट का सहारा मिला जो अब खराब हो चुकी हैं।


    स्टूडेंट को खोज कर स्कूल लाना पड़ता है
    - स्कूल पहुंचकर मेंढे का पहला काम अपने छात्र को ढूंढना होता है। वह बताते हैं, "स्कूल का इकलौता छात्र युवराज अक्सर पेड़ में छिप जाता है। कई बार मुझे उसे पेड़ से उतारकर लाना पड़ता है। स्कूल आने से पहले एक घंटे तक उसे ढूंढ़ना पड़ता है। मैं उसकी स्कूल के लिए अरुचि को समझ सकता हूं। दरअसल उसे अपने दोस्तों के बिना अकेले ही स्कूल पढ़ने आता है।"

    - रजनीकांत कहते हैं, "बाकी बच्चे अपने हमउम्रों के साथ पढ़ते-सीखते हैं लेकिन युवराज मेरे से ही सीखता है। उसके लिए स्कूल चारदीवारी और एक खाली डेस्क से ज्यादा और कुछ नहीं है।


    स्कूल में शुरू की ई-लर्निंग
    - यह स्कूल 1985 में जब बना तब ठीक-ठाक था। लेकिन कुदरत की मार ने इसे बिगाड़ दिया। हालांकि बाद में रजनीकांत की कोशिशों ने इसे कुछ सही कर दिया। इतना ही नहीं, तार और छोटे से टीवी सेट की मदद से रजनीकांत ने अपने क्लास में ई-लर्निंग की सुविधा तैयार कर ली है। रजनीकांत कहते हैं, युवराज को बाहरी दुनिया की जानकारी में दिलचस्पी है, इसलिए पंचायत के लोगों ने हमें 12 वोल्ट का एक सोलर पैनल लगवा दिया। इसी के सहारे मैं टीवी सेट पर कुछ पढ़ाई-लिखाई के कंटेंट डाउनलोड कर लेता हूं।

    टीचर ने नहीं लिया ट्रांसफर
    - रजनीकांत चाहते तो कहीं और ट्रांसफर ले सकते थे लेकिन वे ऐसा नहीं करते क्योंकि जिला परिषद के किसी स्कूल में फिलहाल वैकेंसी नहीं है और हो भी तो 5 साल पर ट्रांसफर होता है। लिहाजा उन्होंने अपनी यात्रा फिलहाल जारी रखी है।

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    यहां पहुंचने के लिए हर दिन जान जोखिम में डालने पड़ती है।
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    रजनीकांत 12 किलोमीटर कीचड़ भरा रास्ता तय कर अपने स्कूल पहुंचते हैं।
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    इस गांव में बिजली सिर्फ सोलर पैनल से आती है।
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    रजनीकांत अपने स्टूडेंट के साथ अकेले खेलते हैं।
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