--Advertisement--

इनकी वजह से सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में किया था बदलाव, फिर दायर करेंगे रिव्यु पिटीशन

वे कोर्ट के फैसले के खिलाफ 29 अप्रैल को रिव्यु पिटीशन दायर करेंगे।

Dainik Bhaskar

Apr 03, 2018, 04:43 PM IST
गायकवाड़ सुप्रीम कोर्ट के फैस गायकवाड़ सुप्रीम कोर्ट के फैस

पुणे. एससी-एसटी एक्ट में जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है, उसकी एफआईआर पुणे के कराड पुलिस स्टेशन में भास्कर गायकवाड़ ने 2009 में दर्ज करवाई थी। फैसले पर रोक से अदालत के इनकार के बाद गायकवाड़ ने कहा कि वे इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेंगे। भास्कर से खास बातचीत में गायकवाड़ ने कहा, "एफआईआर मराठी में दर्ज करवाई गई थी। लेकिन, जब ये अदालत के पास पहुंची तो इसके अहम हिस्सों का अनुवाद पेश नहीं किया गया।" बता दें कि एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोमवार को देश के 10 से ज्यादा राज्यों में हिंसक प्रदर्शन हुए। इस दौरान 15 लोगों की जान गई।

'अफसरों ने घोटाला किया, सबूत मिटाने का दबाव डाला'

- भास्कर गायकवाड़ पुणे के कॉलेज ऑफ इंजिनियरिग में स्टोर इंचार्ज हैं। लेकिन, जब उन्होंने एफआईआर दर्ज कराई थी, तब वे कराड के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ फार्मेसी में तैनात थे।

- गायकवाड़ ने बताया, "कॉलेज के तत्कालीन प्रिंसिपल और दो अन्य ऑफिसर ने मिलकर बड़ा घोटाला किया था और उसके रिकॉर्ड नष्ट करने और नकली रिकॉर्ड बनाने का दबाव मुझ पर बनाया गया। जब मैंने इससे इनकार किया तो मुझे परेशान किया जाने लगा। एसीआर (सालाना गोपनीय रिपोर्ट) में भी मेरे खिलाफ लिखा गया। कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया।"

- 2009 में गायकवाड़ ने पुणे के कराड पुलिस स्टेशन में कॉलेज के प्रिंसिपल सतीश भिशे और प्रोफेसर किशोर बुराड़े के खिलाफ एससी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाई। गायकवाड़ ने साल 2016 में डीटीई डॉ. सुभाष महाजन पर भी एससी-एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज करवाई।

'शिकायत के अहम हिस्से अनुवाद से हटा दिए गए'

- गायकवाड़ ने कहा, "जो एफआईआर साल 2009 में कराड पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई थी। उसके मराठी से अंग्रेजी ट्रांसलेशन के दौरान कुछ चीजों को गायब कर दिया गया।"

- उन्होंने बताया कि मराठी भाषा की एफआईआर में लिखा था, "मामले की जांच कर रहे डिप्टी एसपी ने प्रिंसिपल सतीश भिशे और प्रो. किशोर बुराड़े के खिलाफ कार्रवाई के लिए तकनीकी शिक्षा निदेशक (डीटीई) डॉ. सुभाष महाजन से इजाजत मांगी। एक पत्र पुणे के डीटीई ऑफिस भेजा, लेकिन वहां से इसे अधिकार क्षेत्र से बाहर का बताते हुए वापस लौटा दिया गया। जिस कारण पुलिस साल 2009 में इस मामले की चार्ज शीट दायर नहीं कर सकी।"

- आगे एफआईआर में लिखा गया,"दोनों आरोपियों को सजा से बचाने के लिए डीटीई डॉ. सुभाष महाजन ने उन्हें क्लीन चिट दी और नियम के विरुद्ध पुलिस को उनके खिलाफ कार्रवाई से रोका। इससे मेरा शारीरिक, मानसिक और आर्थिक नुकसान हुआ। आरोपियों को खिलाफ जांच अधिकारी भारत तागडे को गलत रिपोर्ट दी है, जिस कारण उन्हें मजबूरी में 20 जनवरी 2011 को इस मामले में फाइनल रिपोर्ट लगानी पड़ी।"

'तीन पैराग्राफ गायब कर दिए गए'

- उन्होंने कहा, "एफआईआर में से कई ऐसी बातें, जो शिकायत का मूल थीं, कोर्ट के सामने नहीं रखी गईं। ओरिजिनल एफआईआर मराठी में थी। जब कोर्ट में उसका अनुवाद पेश किया गया तो उसमें शुरू के तीन पैराग्राफ गायब कर दिए, जिनमें यह स्पष्ट था कि शिकायत क्यों की जा रही है। इसी कारण कोर्ट को सही जानकारी नहीं मिली।"

'प्रभावशाली हैं आरोपी'

- गायकवाड़ ने कहा, "दो आरोपी क्लास वन ऑफिसर थे और बेहद प्रभावशाली भी। मामले की जांच कर रहे डिप्टी एसपी ने इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए तकनीकी शिक्षा निदेशक (डीटीई) डॉ. सुभाष महाजन से इजाजत मांगी लेकिन उन्हें इजाजत नहीं दी गई। इसके बाद पुलिस ने साल 2011 में क्लोजर रिपोर्ट फाइल कर दी। पुलिस ने क्लोजर रिपोर्ट से पहले उन्हें कोई नोटिस भी नहीं दिया था।"

हाईकोर्ट ने गायकवाड़ के फेवर में दिया था फैसला

- गायकवाड़ ने बताया कि न्यायिक मैजिस्ट्रेट के पास ये मामला पहुंचने पर डॉ. महाजन और दो अन्य आरोपी बॉम्बे हाईकोर्ट गए। यहां कोर्ट ने आरोपियों की एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी। इसके बाद इन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की थी।"

शोषण के आरोप भी लगे

- गायकवाड़ ने कहा, "मुझे धमकियां दी गई, जॉब छोड़नी पड़ी। मामला वापस लेने का दबाव बनाया गया। सेक्शुअल हैरेसमेंट का केस भी लगा। जांच में मैं बरी कर दिया गया।"

- उन्होंने सोमवार को भारत बंद के दौरान हुई हिंसा को गलत बताया, लेकिन ये भी कहा कि जब लोगों के पास कोई रास्ता नहीं बचता तो वे ऐसे ही कदम उठाते हैं।

- वे बोले, " मैं छोटी सी सरकारी नौकरी करता हूं। तनख्वाह इतनी नहीं है कि एक बड़ा वकील हायर कर सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करवा सकूं।"

X
गायकवाड़ सुप्रीम कोर्ट के फैसगायकवाड़ सुप्रीम कोर्ट के फैस
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..