--Advertisement--

कोरेगांव हिंसा: मुंबई में दलितों का यलगार मोर्चा आज, भिडे गुरूजी की गिरफ्तारी पर अड़े

इस प्रोटेस्ट को पुलिस की परिमशन नहीं मिली है।

Danik Bhaskar | Mar 26, 2018, 08:27 AM IST
इस मोर्चे को पुलिस की मंजूरी न इस मोर्चे को पुलिस की मंजूरी न

मुंबई. भीमा कोरेगांव हिंसा के आरोपी संभाजी भिडे उर्फ गुरुजी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर भारिप (भारतीय रिपब्लिकन पार्टी) नेता प्रकाश आंबेडकर के आवाहन पर हजारों भारिप कार्यकर्ता मुंबई में प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि इस प्रोटेस्ट को पुलिस की परिमशन नहीं मिली है जिसके बाद प्रकाश आंबेडकर नाराज हो गए हैं। इसपर प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि कुछ भी हो जाए मोर्चा जरूर निकलेगा। उन्होंने कहा कि सरकार बुरे लोगों को बचा रही है और अच्छे लोगों को सजा दे रही है हम यह स्वीकार नहीं करेंगे। आरपीआई का सपोर्ट नहीं..

- रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के नेता रामदास अठावले की ओर से कहा गया है कि उनकी पार्टी 'यलगार मोर्चे' का समर्थन नहीं कर रही है।

- इससे पहले मिलिंद एकबोटे की गिरफ्तारी के बाद कई संगठनों द्वारा मांग की जा रही है कि संभाजी भिड़े को भी गिरफ्तार किया जाए। प्रकाश आंबेडकर ने मांग की थी कि 26 मार्च तक संभाजी को गिरफ्तार किया जाए वरना वे और उनके समर्थक प्रदर्शन करेंगे।

रैली का रूट...

- प्रकाश के रुख को देखते हुए इस रूट पर भारी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया है। फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां भी रूट पार तैनात हैं।

प्रकाश का सरकार पर आरोप
- रविवार को आंबेडकर ने एक संवाददाता सम्मेलन बुलाकर मीडिया को बताया कि पुलिस ने विद्यार्थियों की चल रही परीक्षाओं का हवाला देकर मोर्चा न निकालने को कहा है। पुलिस चाहती है कि मोर्चा के बजाय सिर्फ आजाद मैदान में आंदोलन हो।
- प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि सरकार संभाजी भिडे को गिरफ्तार न कर लोकतंत्र का गला दबा रही है। जिन्होंने हमला किया सरकार उन्हें गिरफ्तार नहीं कर रही है और जिन लोगों ने मार खाई उन पर पाबंदी लगाई जा रही है। हम यह बर्दास्त नहीं करेंगे।
- उन्होंने कहा कि अब सरकार के खिलाफ एक बार फिर विरोध रास्ते पर दिखाई देगा। अगर मोर्चे में कोई अप्रिय घटना हुई तो इसके लिए सरकार जिम्मेदार होगी। महाराष्ट्रभर से लोग मोर्चे के लिए निकल गए हैं अब उन्हें रोकना मुश्किल होगा। सीएसटी में एक जुट होकर हम आगे की रणनीति बनाएंगे।


संभाजी भिड़े की गिरफ्तारी पर अड़े
- आंबेडकर ने आरोप लगाया कि संभाजी भिडे के चलते भीमा कोरेगांव हिंसा हुई उन्होंने संभाजी भिडे और मिलिंद एकबोटे को इसके लिए जिम्मेदार बताया था।
- एकबोटे को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया था फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है लेकिन संभाजी भिडे की गिरफ्तारी नहीं हुई।
- आंबेडकर ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर भिडे की गिरफ्तारी की मांग की थी।


मिला था मंत्री पद का प्रस्ताव
- प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि मुझसे किसी को राजनीतिक रूप से डरने की जरूरत नहीं है। मुझे कभी मंत्री पद का लालच नहीं था। मौजूदा सरकार और इससे पहले की सरकार ने मुझे मंत्रिपद का प्रस्ताव दिया था।

कौन हैं संभाजी भिडे गुरुजी

- संभाजी भिडे गुरुजी, महाराष्ट्र के सांगली जिले से आते हैं। गुरूजी के नाम से मशहूर संभाजी पुणे यूनिवर्सिटी से एमएससी (एटॉमिक साइंस) में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। इसके अलावा वे मशहूर फर्ग्युसन कॉलेज में फिजिक्स के प्रोफेसर रह चुके हैं।
- साइकिल पर चलने वाले भिडे गुरुजी की उम्र 85 के पार है इसके बावजूद वो आज भी तंदरूस्त हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि वो पैरों में चप्पल तक नहीं पहनते हैं।
- कहा जाता है कि गुरुजी ने आजतक जिस भी नेता का चुनाव में समर्थन किया उसकी जीत हुई है। हालांकि, गुरुजी कभी किसी राजनीतिक दल से नहीं जुड़े।
- सबसे बड़ी बात तो यह कि नेताओं के बीच दबदबा होने के बावजूद उनका ना तो खुद का घर है और ना ही किसी तरह की संपत्ति.

पीएम मोदी भी मानते हैं इनका लोहा

- दुबले-पतले शरीर वाले संभाजी भिडे गुरुजी देखने में एक आम इंसान जैसे लगते हैं, लेकिन इनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर महाराष्ट्र के सीएम तक इनकी बात सुनते हैं।
- शिवाजी महाराज को अपना आदर्श मानने वाले गुरुजी को महाराष्ट्र में मराठा लोगों का जबरदस्त समर्थन है। लोकसभा चुनाव के दौरान जब मोदी सांगली आए थे तो सुरक्षा घेरा तोड़कर भिडे गुरुजी से मिले थे।
- यही नहीं, रैली में मोदी ने तो यह तक कहा था कि, "मैं भिडे गुरुजी के बुलावे पर नहीं आया हूं। बल्कि उनका ऑर्डर मानकर सांगली आया हूं।"
- शिव प्रतिष्ठान संस्था चलाने वाले भिडे गुरूजी का रुतबा मोदी तक ही सीमित नहीं है। एक बार तो महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फड़णवीस ने उनसे मिलने के लिए अपना प्लेन तक रुकवा दिया था।

कैसे हुआ था दंगा ?

-भीमा कोरेगांव में 1 जनवरी 1818 में अंग्रेज और मराठों के बीच युद्ध हुआ था। अंग्रेजों की महार बटालियन के 500 सैनिकों ने मराठों के 28000 सैनिकों को धूल चटाई थी।

-इस जंग की 200वीं बरसी पर 1 जनवरी 2018 को दलित समुदाय के लोग विजयस्तंभ को वंदन करने भीमा कोरेगांव पहुंचे थे।
-इसी दौरान कुछ असमाजिक तत्वों ने गाड़ियों और दुकानों में तोड़फोड़ की। पथराव से गांव में रहने वाले एक युवक की मौत हुई थी।