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शासन प्रणाली के मामले पुणे पहले नंबर पर, बड़े शहर सिर्फ जस्ट पास

सर्वेक्षण में 20 राज्यों के 23 शहरों को शामिल किया और 89 बिंदुओं को लेकर एक प्रश्नावली तैयार की गयी थी।

Danik Bhaskar | Mar 15, 2018, 08:49 AM IST
सिंबॉलिक फोटो। सिंबॉलिक फोटो।

पुणे/दिल्ली: नगर निगमों समेत अन्य संस्थाओं के कामकाज के प्रदर्शन में पुणे, कोलकाता आैर तिरुवनंतपुरम शीर्ष स्थान पर हैं। बंगलुरु की एक गैर सरकारी संस्था 'जनगृह' के सर्वेक्षण के अनुसार भारतीय शहरों के स्थानीय प्रशासन के कामकाज में सुधार हो रहा है लेकिन इसकी गति बहुत धीमी है। सर्वे में 20 राज्य के 23 शहर शामिल...

- सर्वेक्षण में शहरों की प्रशासनिक और संस्थागत प्रक्रियाओं में जोर पर बल दिया गया है।
- सर्वेक्षण में 20 राज्यों के 23 शहरों को शामिल किया और 89 बिंदुओं को लेकर एक प्रश्नावली तैयार की गयी थी।
- प्रत्येक शहर को कुल 10 अंकों में से अंक दिये। शहरों ने तीन से लेकर 5.1 अंक प्राप्त किये सर्वेक्षण में पांच शीर्ष शहरों में पुणे, कोलकाता, तिरुवनंतपुरम, भुवनेश्वर और सूरत शामिल हैं। इन शहरों ने 4.6 से लेकर 4.5 अंक हासिल किये हैं।
- अंतिम पांच शहरों में शामिल बंगलुरु, चंडीगढ़, देहरादून, पटना और चेन्नई को 3.0 से लेकर 3.3 अंक मिले हैं।
- जनगृह के उपाध्यक्ष अनिल नायर के अनुसार सर्वेक्षण में दीर्घकालिक नियोजन, वित्त, कर्मचारी, राजनीतिक नेतृत्व, प्रशासन में नागरिकों की भागीदारी और पारदर्शिता को आधार बनाया गया।

प्रथम चरण में चयनित शहरों में करीब 51 % परियोजनाअों पर चल रहा काम
- स्मार्ट सिटी मिशन के प्रथम चरण (जनवरी 2016) में चयनित शहरों में लगभग 51 प्रतिशत परियोजनाओं पर काम चल रहा है। दूसरे और तीसरे चरण में लगभग सभी शहरों ने विशेष उपक्रम (एसपीवी) बना लिए हैं। इसके अलावा 4583 करोड़ रुपए की 243 परियोजनाएं पूरी कर ली गयी है। उन्नीस हजार 928 करोड़ रुपए की 510 परियोजनाओं के कार्य आदेश जारी कर दिये गये हैं।

सुधार में ये बाधाएं
- सर्वेक्षण के अनुसार शहरों की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुधारने में आधुनिक कार्य प्रारूप का अभाव, अप्रशिक्षित मानव संसाधन, निर्णय प्रक्रिया में नागरिकों की भागीदारी का अभाव तथा राजनीतिक नेतृत्व के पास वास्तविक अधिकारों का नहीं होना प्रमुख बाधाए हैं। इसके विपरीत जोहानिसबर्ग जैसे शहरों के महापौर के पास ज्यादा अधिकार होते हैं।

सर्वे में ये भी पता चला

1. पांच साल में बदल गए छह कमिश्नर

- रिपोर्ट के मुताबिक बीते पांच साल में पुणे, भुवनेश्वर, सूरत में तीन कमिश्नर बदले गए।
- तिरुअनंतपुरम में पांच साल में छह बार कमिश्नर बदले गए। वहीं निचले पायदान पर मौजूद शहरों में पटना में पांच सालों में 5 से ज्यादा कमिश्नर रहे, देहरादून में भी पांच साल में छह से ज्यादा कमिशनर बदले गए, वहीं, चेन्नई, बेंगलुरू और चंडीगढ में चार बार कमिशनर बदल गए।

2. मेयर का कार्यकाल भी सिर्फ 1 साल का
- नगर निगमों का मेयर का कार्यकाल भी एक बड़ी समस्या है।
- दिल्ली, बेंगलुरु, चंडीगढ़ जैसे शहरों में मेयर का कार्यकाल महज एक साल का है। यही वजह है कि दिल्ली का विकास सबसे ज्यादा प्रभावित रहता है।
- दिल्ली में तीन निगम है और तीनों नगर निगमों में मेयर हर साल चुने जाते हैं। चुनाव प्रक्रिया में ही दो महीने गुजर जाते हैं। वहीं मेयर को तीन से चार महीने कामकाज समझने में लग जाते हैं।
- छह महीने में जितनी फाइलें आगे बढ़ती हैं, उनमें से कई नए मेयर के आने के बाद कैंसिल भी हो जाते हैं।

पांच बड़ी चुनौतियां जिनसे निपटना जरूरी
- सार्वजनिक जगह की आधुनिक प्लानिंग
- वित्तीय संसाधनों की कमी
- स्किल्ड मैनपावर होना
- शक्तिहीन मेयर, सिटी काउंसिल और सरकारी एजेंसियों में तालमेल की कमी
- लोगों की कम भागीदारी, पारदर्शिता की कमी

क्वालिटी लाइफ के लिए लगेगा लंबा वक्त
सेंटर फॉर सिटीजनशिप एंड डेमोक्रेसी के डिप्टी हेड अनिल नायर कहते हैं कि 23 शहरों में से 12 शहर के अंक 3 से 5 के बीच हैं। जबकि स्मार्ट सिटी के लिए किसी शहर के पास आठ से ज्यादा से अंक होने चाहिए। मतलब साफ है कि शहरों में क्वालिटी लाइफ के लिए अभी लोगों को लंबा इंतजार करना होगा।
- "अभी शहरों में प्रदूषण, आग की घटनाएं, बिल्डिंग गिरना, डेंगू जैसी बीमारियों का प्रकोप, कूड़े की समस्या और जलभराव की दिक्कतें आम हैं। सरकार के पास इन समस्याओं का समाधान निकालने के लिए एक्सपर्ट ही नहीं है।"

कमियां हैं, जल्दी ही दुरुस्त होगा सिस्टम

- केंद्रीय शहरी विकास राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हरदीप पुरी कहते हैं कि मौजूदा सिस्टम में खामियां हैं, जिन्हें सुधारने की कवायद चल रही है। कई शहरों में तो सांस लेना भी दूभर होता जा रहा है।
- "स्मार्ट शहरों में राज्य सरकारों की भागीदारी भी अहम है। उन्हें भी अपने शहरों के बारे में सोचना होगा। केंद्र तो वित्तीय रूप से मदद करेगी ही लेकिन शहरों को भी अपने फंड खुद अर्जित करने होंगे।"

पुणे को 10 में से पांच नंबर मिले हैं। पुणे को 10 में से पांच नंबर मिले हैं।