Hindi News »Maharashtra »Pune »News» Ashutosh Govarikar To Recreate Haunted Shaniwarwada For Next Film

16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें

इसी किले को रिक्रिएट कर रहे हैं डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Apr 19, 2018, 01:24 PM IST

  • 16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें
    +5और स्लाइड देखें

    पुणे. लगभग 88 सालों तक मराठा साम्राज्य का केंद्र रहा शनिवार वाड़ा एक बार फिर चर्चा में है। डायरेक्टर आशुतोश गोवारिकर आर्ट डायरेक्टर नितिन देसाई के साथ मिलकर अपनी अगली फिल्म के लिए मैजिस्टिक शनिवार वाड़ा को एनडी स्टूडियोज में रिक्रिएट करने वाले हैं। यह संजय दत्त, अर्जुन कपूर और कृति सेनन स्टारर यह फिल्म दिसंबर 2019 में रिलीज होगी।

    मराठाओं की शान रहा शनिवार वाड़ा देश के हॉन्टेड प्लेसेस में शुमार है। यहां मराठा पेशवा नानासाहेब के बेटे का मर्डर हुआ था। उसने अपने चाचा से मदद के लिए गुहार लगाई थी, लेकिन उन्होंने उसे नहीं बचाया। ऐसा कहा जाता है कि वही चीखें आज भी इस महल में सुनाई देती हैं और इसी वजह से इसे भूतहा माना जाता है।

    DainikBhaskar.com उसी मर्डर का इतिहास अपने रीडर्स को बता रहा है।

    16 हजार रुपए में तैयार हुआ था शनिवार वाड़ा

    - 18वीं सदी में मराठा साम्राज्य के पेशवा रहे बाजीराव-1 ने सन् 1730 में अपनी राजधानी सतारा से पुणे शिफ्ट की थी। तब यहां शनिवार वाड़ा का निर्माण हुआ था। बॉलीवुड फिल्म 'बाजीराव मस्तानी' इन्हीं बाजीराव-1 की पर्सनल लाइफ पर बेस्ड थी।

    - शनिवार वाड़ा की नींव खुद बाजीराव ने जनवरी 1730 में रखी थी। चूंकि उस दिन शनिवार था, इसलिए महल का नाम शनिवार वाड़ा रखा गया। मराठी में वाड़ा का मतलब घर होता है।
    - इस महल को बनवाने के लिए पेशवा ने जून्नार के जंगलों से सागौन की लकड़ी मंगवाई थी। पत्थर चिंचवाड़ और जेजूरी से लाए गए थे।
    - इस महल को उस जमाने में कुल 16,110 रुपए में बनाया गया था।
    - इसके बनने के महज एक साल बाद ही पेशवा बाजीराव का निधन हो गया था।

    - इस महल का मुख्य द्वार दिल्ली दरवाजा कहा जाता है। इसके पीछे भी एक कहानी है। बाजीराव दिल्ली की हुकूमत हासिल करना चाहता था। दिल्ली की तरफ मुंह करते दरवाजे को महल का मुख्य द्वार चुना गया और उसका नाम भी दिल्ली दरवाजा रख दिया गया।

    बेटे ने किया सबसे लंबा राज

    - शनिवार वाड़ा पर सबसे लंबे समय तक राज किया बाजीराव-1 के बेटे बालाजी उर्फ नानासाहेब ने। उन्होंने यहां 41 साल तक अपनी पेशवाई चलाई।
    - हालांकि, उनके राज में पेशवा पानीपत की तीसरी लड़ाई हार गए थे, जिस वजह से शनिवार वाड़ा की शान को करारा झटका लगा था।
    - उस युद्ध में उनका सबसे बड़ा बेटा मारा गया था। बड़े बेटे की मौत के बाद पेशवाई दूसरे बेटे माधवराव को सौंपी गई।
    - नानासाहेब की दुश्मनी उनके भाई रघुनाथ राव से थी, जिसकी उन्हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ी।

    गणेशोत्सव में हुआ था खूनी खेल

    - माधवराव-1 के निधन के बाद उनके छोटे भाई नारायण राव को 17 साल की उम्र में पेशवा बनाया गया।
    - चाचा रघुनाथ राव उनके दरबार में राज-प्रतिनिधि थे। दोनों के बीच काफी मतभेद रहते थे। इसी वजह से नारायण राव ने अपने चाचा को नजरबंद करवा दिया था।
    - इतिहासकारों के मुताबिक सन् 1773 में गणेशोत्सव के अंतिम दिन रघुनाथ राव का करीबी सुमेर सिंह गर्दी उन्हें आजाद करवाने के मकसद से अपने सैनिकों को लेकर शनिवार वाड़ा में घुसा था।
    - सुमेर सिंह सीधे नारायणराव के शयनकक्ष (बेडरूम) में घुसा और उन्हें वहां से खींचते हुए रघुनाथ राव के कमरे में ले गया।
    - चाचा के सामने ही 18 साल के नारायणराव को सुमेर सिंह गर्दी ने तलवार से काटा था। वो मदद के लिए चिल्ला रहा था- चाचा मुझे बचाओ, लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।
    - किंवदंती के मुताबिक नारायणराव की डेडबॉडी को कई टुकड़ों में काटकर मटकों में बंद किया गया और फिर आधी रात में ही नदी में प्रवाहित कर दिया गया।

    चाची ने रची थी हत्या की साजिश

    - किंवदंती के मुताबिक रघुनाथ राव की पत्नी आनंदीबाई ने भतीजे रघुनाथराव की हत्या की साजिश रची थी।
    - सुमेर सिंह गर्दी से मदद जरूर मांगी गई थी, लेकिन उसको लिखे पत्र में रघुनाथ राव को बंदी बनाने के लिए कहा गया था। आनंदीबाई ने पत्र बदलकर बंदी बनाने की जगह मार देने वाली बात लिखी थी।

  • 16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें
    +5और स्लाइड देखें
  • 16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें
    +5और स्लाइड देखें
  • 16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें
    +5और स्लाइड देखें
  • 16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें
    +5और स्लाइड देखें
  • 16 हजार रु. में बना था यह महल, अब सुनाई देती हैं 18 साल के राजा की चीखें
    +5और स्लाइड देखें
Topics:
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×