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भीमा कोरेगांव हिंसा: जिग्नेश से हो सकती है पूछताछ, कई राजनेता भी राडार पर

कांग्रेस पार्टी और प्रकाश आंबेडकर का एलगार परिषद को लेकर क्या कनेक्शन है, इस पर जांच की जाएगी।

Dainik Bhaskar

Jun 07, 2018, 04:35 PM IST
महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा म महाराष्ट्र के कोरेगांव भीमा म

पुणे. 1 जनवरी 2018 को भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा मामले में पुणे पुलिस ने बुधवार को पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गुरुवार को पुणे पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त रवींद्र कदम ने बड़ा खुलासा करते हुए इन्हें प्रतिबंधित माओवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई-माओ) से जुड़ा हुआ बताया। पुलिस ने इन्हें ‘अरबन नक्सल’ और 'टॉप अरबन माओवादी' की संज्ञा दी है। इसी मामले को लेकर बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में पीसी कर आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता प्रतिबंधित संगठन से जुड़े हैं और देश में अफरातफरी का माहौल बनाना चाहते हैं।

कांग्रेस पर अराजकता फैलाने का लगाया आरोप
- संबित ने कहा कि इसमें जिग्नेश मेवाणी का नाम भी शामिल है जिन्हें कांग्रेस की ओर से माओवादियों की मदद के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है और ऐसा करने के पीछे उनकी कोशिश मोदी को रोकना है।
- उन्होंने आगे कहा कि हम मांग करते हैं कि इस संबंध में राहुल गांधी एक प्रेस कॉन्फ्रेन्स करें और सारी बातें साफ करें।
- पात्रा ने कहा कि एक ओर जहां बीजेपी 'संपर्क से समर्थन' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस देश में अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करना चाहती है।
- उन्होंने सबूत के तौर पर उस पत्र का जिक्र किया जो एक दिन पहले हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किए गए जैकब विल्सन के घर से मिला था।
- संबित ने कहा कि पत्र में लिखी गई बातें आपत्तिजनक है और यह दिखाता है कि महाराष्ट्र में दलित के नाम पर किस तरह से हिंसा भड़काने की साजिश रची जा रही है।


यलगार परिषद के एक दिन बाद हुई थी हिंसा
- भीमा-कोरेगांव युद्ध के 200 साल पूरे होने के मौके पर 31 दिसंबर, 2017 को महाराष्ट्र के शनिवारवाड़ा में एल्गार परिषद का आयोजन किया गया था। अगले दिन 1 जनवरी को यहां हिंसा हुई थी। इसी कार्यक्रम में गुजरात के दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवाणी, जेएनयू के छात्र नेता उमर खालिद, रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला और भारिप बहुजन महासंघ के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने भी हिस्सा लिया था।

कुछ राजनीतिक पार्टियों से जुड़े तार
- जॉइंट पुलिस कमिश्नर रवींद्र कदम ने बताया कि एल्गार परिषद के आयोजकों का माओवादियों के साथ घनिष्ठ संबंध होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। जिसमें राजनीतिक पार्टी और कुछ राजनेताओं के तार भी जुड़े हुए हैं। पुलिस जांच में जल्द ही सारी सच्चाई सामने आ जाएगी।

ऐसे इन पांच लोगों तक पहुंची पुलिस
- रवींद्र कदम ने बताया कि सरकार द्वारा प्रतिबंधित किए गए कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं के घरों पर ओपन रेड के दौरान छापमारी में जो भी दस्तावेज जब्त किए गए हैं, उसकी जांच करते बुधवार को इन पांच लोगों की गिरफ्तारी की गई।
- जिसमें नागपुर से सुरेंद्र गडलिंग, शोमा सेन और महेश राऊत शामिल हैं। वहीं दिल्ली से रोमा विल्सन और मुंबई से सुधीर ढवले को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने बताया था कि सुधीर धावले दलित कार्यकर्ता और मराठी पत्रिका विद्रोही के संपादक हैं जबकि नागपुर के वकील सुरेंद्र गाडलिंग भी दलितों और आदिवासियों के लिए काम करते हैं। शोमा सेन नागपुर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर हैं और उनके पति तुषार क्रांति भट्टाचार्य को नक्सलियों से कथित जुड़ाव के लिए 2010 में नागपुर स्टेशन से गिरफ्तार किया गया था।
- महेश राउत का भी माओवादियों से जुड़ाव होने की बात कही जा रही है। केरल के निवासी रोना विल्सन (47) दिल्ली में रहते हैं और कमेटी फोर रिलीज ऑफ पोलिटिकल प्रिजनर्स से जुड़े हुए हैं।


विश्रामबाग पुलिस स्टेशन में दर्ज है केस
- इस यलगार परिषद के खिलाफ पुणे के रहने वाले तुषार दमगुडे ने विश्रामबाग थाने शिकायत दर्ज करायी थी। इसके मुताबिक कबीर कला मंच के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिए थे, जिसके कारण जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा हुई।


जिग्नेश के खिलाफ जारी हो सकता है समन
- जॉइंट पुलिस कमिश्नर रवींद्र कदम ने बताया कि जांच की प्रक्रिया के दौरान अगर जरूरत पड़ी तो जिग्नेश मेवाणी को भी समन किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "फंडिंग से जुड़े पत्र में एल्गार परिषद का जिक्र है। एल्गार परिषद आयोजित करने में कई संगठन शामिल थे लेकिन सभी माओवादियों से नहीं जुड़े हुए हैं।'

यलगार परिषद से कांग्रेस के संबंध पर होगी जांच
- कांग्रेस पार्टी और प्रकाश आंबेडकर का एलगार परिषद को लेकर क्या कनेक्शन है, इस पर जांच की जाएगी। सबूतों के आधार पर राजनीतिक पार्टी और राजनेताओं के शामिल होने की जांच की जाएगी।

फ्लैशबैक

- 1 जनवरी 1818 में कोरेगांव भीमा की लड़ाई में पेशवा बाजीराव द्वितीय पर अंग्रेजों ने जीत दर्ज की थी। इसमें दलित भी शामिल थे। बाद में अंग्रेजों ने कोरेगांव भीमा में अपनी जीत की याद में जयस्तंभ का निर्माण कराया था। आगे चल कर यह दलितों का प्रतीक बन गया।

- इस वर्ष जब दलितों का एक समूह भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200वीं सालगिरह के कार्यक्रम में जा रहा था। इस बीच वढू बुद्रुक इलाके में छत्रपति शंभाजी महाराज के दर्शन करने जा रहा दूसरा गुट रास्ते में आ गया। यहां कहासुनी से बढ़कर बात हिंसा में बदल गई। इस हिंसा में एक युवक की मौत हो गई। 50 गाड़ियों में आग लगा दी गई।

इसलिए बन गया था सियासी मुद्दा

- देश में कुल 16% दलित आबादी है। बात महाराष्ट्र की करें तो यहां 10.5% दलित आबादी है। इसमें से विदर्भ में सबसे ज्यादा 23% दलितों की संख्या है। वहीं, मराठा की राज्य में 33 फीसदी आबादी है।

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