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जज लोया की मौत की जांच के लिए बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने SC में दाखिल की रिव्यू पिटीशन

सुप्रीम कोर्ट बीते महीने इस केस की दोबार जांच वाली एक याचिका खारिज कर चुकी है।

Dainik Bhaskar

May 21, 2018, 12:08 PM IST
जज लोया की मौत पर पिछले साल नवंबर में उनकी बहन ने सवाल उठाए थे। इसके बाद यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया। फाइल फोटो जज लोया की मौत पर पिछले साल नवंबर में उनकी बहन ने सवाल उठाए थे। इसके बाद यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया। फाइल फोटो

मुंबई. गुजरात के सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहे सीबीआई कोर्ट के जज बीएच लोया की संदिग्ध मौत के मामले में बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इस केस की जांच के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट बीते महीने इस केस की दोबारा जांच वाली एक याचिका खारिज कर चुकी है। ऐसे में देखना होगा कि एसोसिएशन द्वारा दाखिल की गई जज लोया केस की दोबाराा जांच की इस पुनर्विचार याचिका को सुप्रीम कोर्ट स्वीकार कर सुनवाई करता है या नहीं।

इस आधार पर खारिज हुई थी याचिका
- पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस लोया की मौत की जांच की याचिका पर फैसला देते हुए इस केस से जुड़ी हुई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
- कोर्ट ने कहा था कि, इस मामले में अब कोई भी स्वतंत्र जांच नहीं की जाएगी। याचिका में बीएच लोया की मौत सामान्य होने की बात को चुनौती दी गई थी।
- हालांकि, कोर्ट ने पाया कि जस्टिस लोया की सामान्य मौत की बात में कोई भी विषमता नहीं थी।

कोर्ट ने कहा था- ये न्यायपालिका को बदनाम करने की साजिश
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जज लोया के साथ नागपुर में शादी समारोह में बॉम्बे हाईकोर्ट के चार जज और मौजूद थे। उनके बयानों से साबित होता है कि जज लोया की मौत हार्ट अटैक से हुई थी। यह पूरी तरह प्राकृतिक मौत थी।
- कोर्ट ने कहा कि जजों के बयान पर शक करना और सवाल उठाना न्यायपालिका की अवमानना के समान है। ये याचिकाएं कोर्ट को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा हैं। इन्हें राजनीतिक हित साधने के इरादे से दायर किया गया है।
- चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच इस केस में सुनवाई कर रही थी। इस बेंच में जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी थे।

सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहता कि अवमानना की कार्रवाई हो
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मोटिवेटेड पिटीशन दायर करने वालों पर अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन कोर्ट यह नहीं चाहता कि अवमानना के डर से न्याय प्रक्रिया पर कोई हस्तक्षेप हो।


पहले किसने दायर की थीं याचिकाएं?
- बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन
- पूर्व नौसेना प्रमुख एल रामदास
- कांग्रेस लीडर तहसीन पूनावाला
- महाराष्ट्र के पत्रकार बंधुराज साम्भाजी लोन
- ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन
- सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन

महाराष्ट्र सरकार ने किया था स्वतंत्र जांच का विरोध
- केस की स्वतंत्र जांच का महाराष्ट्र सरकार ने विरोध किया था। उसका कहना था कि ये याचिकाएं राजनीति से प्रेरित हैं और किसी एक शख्स को निशाने पर रखकर दायर की गई हैं।
- वहीं, याचिकाकर्ताओं का कहना था कि लोया मामले में अब तक जिस तरह का घटनाक्रम हुआ, उससे निष्पक्ष जांच की जरूरत बढ़ गई है।

क्या है जज लोया की मौत का मामला?
- सीबीआई के स्पेशल जज बीएच लोया की मौत 1 दिसंबर 2014 को नागपुर में हुई थी। वे अपने कलीग की बेटी की शादी में शामिल होने जा रहे थे।
- उस वक्त जज लोया के साथ बॉम्बे हाईकोर्ट के चार और जज थे। उन्होंने बयान में कहा था कि रास्ते में जज लोया को हार्ट अटैक आया। उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती किया गया था, जहां उनकी मौत हो गई थी।

मौत पर सवाल क्यों उठे?
- पिछले साल नवंबर में जज लोया की मौत के हालात पर उनकी बहन ने शक जाहिर किया। इसके तार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर से जोड़े गए। दावा है कि परिवार को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत देने की कोशिश की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने सुनवाई पर उठाए थे सवाल
- सुप्रीम कोर्ट के चार जजों जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, कुरियन जोसेफ और एमबी लोकुर ने 12 जनवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर काम का बंटवारा ढंग से नहीं करने का आरोप लगाया था।
- इसी दौरान उन्होंने कहा था कि जस्टिस लोया का केस किसी सीनियर जज के पास जाना चाहिए था, लेकिन इसे जूनियर जज की बेंच के पास भेजा गया। इसके बाद जस्टिस अरुण मिश्रा ने इस केस की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था।

क्या है सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस?
- सीबीआई के मुताबिक गुजरात के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को उस वक्त अगवा कर लिया था जब वे हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे।
- नवंबर 2005 में गांधीनगर के करीब उसकी कथित फर्जी एनकाउंटर में हत्या कर दी गई। यह दावा किया गया कि शेख के पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ संबंध थे।
- पुलिस ने दिसंबर 2006 में मुठभेड़ के चश्मदीद गवाह और शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति की भी कथित तौर पर गुजरात के बनासकांठा जिले के चपरी गांव में हत्या कर दी। अमित शाह तब गुजरात के गृह राज्यमंत्री थे। उन पर दोनों घटनाओं में शामिल होने का आरोप था।

अमित शाह समेत कई आरोपी हो चुके बरी
- सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस को 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र की ट्रायल कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया था। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और सोहराबुद्दीन शेख के केस को एक साथ जोड़ दिया।
- पहले इस केस की सुनवाई जज जेटी उत्पत कर रहे थे, लेकिन 2014 में अचानक उनका तबादला कर दिया गया था। फिर केस की सुनवाई जज बीएच लोया ने की।
- सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, राजस्थान के बिजनेसमैन विमल पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व चीफ पीसी पांडे, एडीजीपी गीता जौहरी, गुजरात पुलिस के ऑफिसर अभय चुडासम्मा और एनके अमीन को बरी किया जा चुका है। पुलिस अफसरों समेत कुल 23 आरोपियों के खिलाफ अभी भी जांच चल रही है।

अमित शाह ने बिना वजह विवाद का लगाया था आरोप
- इस फैसले के बाद बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा था कि इस केस में पूरी तरह से बेबुनियाद आरोप लगाकर मुझे टारगेट किया गया। अब देश की सर्वोच्च अदालत ने फैसला दिया है, कांग्रेस उसे भी तो माने। क्या राहुल गांधी न्यायालय को कांग्रेस कार्यालय में ही बैठाना चाहते हैं? राजनीति की लड़ाई को जनता के बीच लड़ा जाए।

12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज लोया की मौत का केस जूनियर बेंच को दिए जाने पर सवाल उठाए थे। 12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज लोया की मौत का केस जूनियर बेंच को दिए जाने पर सवाल उठाए थे।
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जज लोया की मौत पर पिछले साल नवंबर में उनकी बहन ने सवाल उठाए थे। इसके बाद यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया। फाइल फोटोजज लोया की मौत पर पिछले साल नवंबर में उनकी बहन ने सवाल उठाए थे। इसके बाद यह मामला मीडिया की सुर्खियों में आया। फाइल फोटो
12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज लोया की मौत का केस जूनियर बेंच को दिए जाने पर सवाल उठाए थे।12 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जज लोया की मौत का केस जूनियर बेंच को दिए जाने पर सवाल उठाए थे।
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