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भिखारियों को बिजनेसमैन बना रहा है ये डॉक्टर, कभी खुद था खस्ता हाल

जब सभी दोस्त MBBS कंप्लीट होने के बाद कमा रहे थे लाखों, ये भटक रहे थे गांव की गलियों में।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jun 08, 2018, 01:15 PM IST

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    पुणे. डॉक्टर्स को भगवान का रूप कहा जाता है। पुणे का एक डॉक्टर अपने सोशल वर्क के जज्बे से इस पंक्ति को चरितार्थ कर रहा है। अपनी सीरीज 'रियल लाइफ सुपरहीरो' के तहत DainikBhaskar.com इसी स्पेशल डॉक्टर के बारे में बता रहा है।

    खुद की हो गई थी भिखारियों जैसी हालत

    - मूलतः पुणे के रहने वाले अभिजीत सोनवाने ने साल 1999 में MBBS की डिग्री कंप्लीट की थी। उन्होंने एक क्लीनिक ओपन करने या किसी हॉस्पिटल में प्रैक्टिस करने की जगह लोगों को घर-घर जाकर ट्रीटमेंट देने की ठानी।
    - डॉ. अभिजीत बताते हैं, "डिग्री पूरी होने के बाद मैं मम्मी-पापा पर निर्भर नहीं रहना चाहता था। मैं समाज में बदलाव लाना चाहता था। इन दोनों विचारों को मिलाकर मैंने मरीजों को घर-घर जाकर चेकअप करने का सोचा। मैं गांवों के घरों में जाकर मरीजों का इलाज करता था। इसके लिए मैंने खुद के लिए पॉलिसी बनाई थी कि एक घर से फीस सिर्फ 5 रुपए ही ली जाएगी। फिर चाहे वो एक का इलाज करवाएं या 6 सदस्यों का।"
    - अभिजीत दिनभर घर-घर घूमते थे। शाम तक 60-70 पेशेंट्स देखने के बाद उनकी कमाई कुल 30-35 रुपए तक हो पाती थी।
    - उन्होंने बताया, "मैं खुद तंगहाल हो गया था। भूख से तड़पता था, लेकिन खाने के लिए कुछ नहीं था। मन में बुरे-बुरे ख्याल आने लगे थे। ऐसा लगता था कि सबकुछ छोड़कर सिर्फ पैसा कमाऊं।"

    मंदिर में बैठ करने लगे थे चेकअप, अनजान कपल ने की हेल्प

    - घर-घर जाकर इलाज करने के साथ ही अभिजीत गांव के मंदिर में बैठकर जरूरतमंदों का इलाज करने लगे।
    - उन्होंने बताया, "मैं अपनी गरीबी की हालत से तंग आ चुका था। मंदिर में घंटों अपने ख्यालों में खोया बैठा रहता था। वहां रेग्युलर आने वाले एक बुजुर्ग कपल ने उस दिन मुझे खाना खिलाया। मैंने उन्हें अपनी स्टोरी बताई तो उन्होंने मेरी काफी तारीफ भी की और खर्च के लिए कुछ पैसे भी दिए। उनकी उस दरियादिली ने मेरे इरादों में नई जान भर दी।"

    दो साल के संघर्ष के बाद बदले दिन

    - दो साल के संघर्ष के बाद डॉ. अभिजीत की एक इंटरनेशनल मेडिकल ऑर्गेनाइजेशन में जॉब लगी।
    - उन्होंने अपने हुनर से उस जॉब में काफी नाम कमाया। उसके बाद 15 अगस्त 2015 को जॉब से रिजाइन कर उन्होंने सोहम ट्रस्ट नाम से एक NGO की शुरुआत की।
    - अब अभिजीत के पास सोशल वर्क के लिए जज्बे के साथ पैसा भी था।
    - इस ट्रस्ट के बैनर तले अभिजीत मंदिर-मस्जिदों के सामने बैठे भिखारियों का इलाज करते हैं। वे हर रोज सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक इन भिखारियों का इलाज करते हैं।

    बना रहे हैं भिखारियों को 'बिजनेसमैन'

    - मेडिकल विजिट्स के दौरान अभिजीत भिखारियों से बात कर उन्हें यह काम छोड़ने के लिए भी प्रेरित करते हैं। वे उन्हें भीख मांगने की जगह फूल बेचने, दिये बनाने जैसे छोटे-छोटे व्यवसाय करने की सलाह देते हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।
    - उन्होंने अपने इस इनिशिएटिव का नाम 'Beggars to Entrepreneurs' रखा है।
    - उनके इस मिशन के जरिए अब तक 37-40 बुजुर्ग भीख मांगना छोड़ नाई, फूलवाला जैसे छोटे धंधे शुरू कर चुके हैं।

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