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भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में एनसीपी प्रमुख शरद पवार से पूछताछ करेगा जांच आयोग

7 महीने पहले
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एनसीपी प्रमुख शरद पवार
  • आयोग के सामने लगाई गई अर्जी को न्यायिक पैनल ने स्वीकार किया, बतौर गवाह पेश होंगे एनसीपी प्रमुख
  • शरद पवार ने पुणे पुलिस की भूमिका के साथ ही दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं पर हिंसा भड़काने का लगाया था आरोप

पुणे. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में न्यायिक आयोग के सामने एनसीपी प्रमुख शरद पवार की भी गवाही होगी। पवार की गवाही को लेकर एक अर्जी लगाई गई थी, जिसे आयोग ने स्वीकार कर लिया है। इसको लेकर शरद पवार की ओर से भी अक्टूबर 2018 में हलफनामा दायर किया गया है। अब आयोग इसे लेकर जल्द ही एनसीपी प्रमुख को समन जारी करेगा। न्यायिक पैनल के वकील आशीष सातपुते ने मंगलवार को बताया कि पवार को सुनवाई के अंतिम चरण में बुलाने की संभावना है। 

दरअसल, पिछले हफ्ते सामाजिक समूह विवेक विचार मंच के सदस्य सागर शिंदे ने आयोग के समक्ष एक आवेदन दायर किया था। इसमें 2018 में जातिगत हिंसा के बारे में शरद पवार के मीडिया को 18 फरवरी को दिए गए बयान के आधार पर उन्हें तलब करने की मांग की थी। आवेदन के अनुसार, पवार ने प्रेस मीट में आरोप लगाया था कि दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं मिलिंद एकबोटे और संभाजी भिड़े ने पुणे शहर के बाहरी इलाके में स्थित कोरेगांव-भीमा और इसके आसपास के क्षेत्र में हिंसा के लिए माहौल बनाया था। 


याचिका में कहा गया है कि उसी प्रेस कॉफ्रेंस में पवार ने यह भी आरोप लगाया कि पुणे शहर के पुलिस आयुक्त की भूमिका संदिग्ध है और इसकी जांच होनी चाहिए। ये बयान आयोग के संदर्भ की शर्तों के दायरे में हैं और इसलिए वे प्रासंगिक हैं। आवेदक ने कहा कि उसके पास यह विश्वास करने के कारण हैं कि पवार के पास प्रासंगिक और अतिरिक्त जानकारी है। इसके अलावा उन्होंने हिंसा और अन्य संबंधित मामलों के बारे में पैनल के समक्ष दायर अपने हलफनामे में पहले ही साझा किया है। 

बांबे हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस की अध्यक्षता में बना है आयोग
आयोग की अध्यक्षता बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जे.एन. पटेल कर रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्य सचिव सुमित मुलिक न्यायिक पैनल के सदस्य हैं। जब महाराष्ट्र में भाजपा सत्ता में थी, तब आयोग का गठन किया गया था। इसके बाद इस माह की शुरुआत में शिवसेना की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने आयोग का कार्यकताल 8 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। पवार की पार्टी एनसीपी अब महाराष्ट्र में शिवसेना की अगुवाई वाली सरकार में महात्वपूर्ण घटक दल के रूप में शामिल है। 

शरद पवार बोले- दक्षणिपंथी ताकतों की भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने शरद पवार ने अपने हलफनामे में कहा है कि मैं उस घटना को तथ्यात्मक रूप से इंगित करने की स्थिति में नहीं रहूंगा क्योंकि यह मौजूदा कानून और व्यवस्था को प्रभावित करेगा। उन्होंने कहा यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि राज्य सरकार और कानून कोरेगांव-भीमा और इसके आसपास के क्षेत्र में रहने वाले आम आदमी के हितों की रक्षा करने में विफल रहे। पवार ने कहा कि कोरेगांव भीमा में हिंसा के पीछे दक्षिणपंथी ताकतों की सक्रिय भूमिका से इंकार नहीं किया जा सकता है। 


1 जनवरी, 2018 को, भीमा-कोरेगांव लड़ाई की 200 वीं वर्षगांठ समारोह के दौरान हिंसा भड़क गई थी। घटना में एक व्यक्ति की जान चली गई थी जबकि कई अन्य घायल हो गए थे। पुणे पुलिस ने आरोप लगाया है कि 31 दिसंबर, 2017 को आयोजित 'एल्गर परिषद के सम्मेलन' में "भड़काऊ" भाषणों ने हिंसा भड़काई। पुलिस के अनुसार, एल्गर परिषद के सम्मेलन आयोजकों के माओवादियों के साथ संबंध थे। फिलहाल शरद पवार के बयान इस मामले में काफी अहम साबित हो सकते हैं। 

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