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कीर्ति व्यास मर्डर केस: गिरफ्तार दोनों आरोपियों को 31 मई तक न्यायिक हिरासत

16 मार्च को ही दोनों ने कीर्ति की अपनी कार में हत्या कर दी गई थी।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 18, 2018, 05:16 PM IST

  • कीर्ति व्यास मर्डर केस: गिरफ्तार दोनों आरोपियों को 31 मई तक न्यायिक हिरासत
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    कीर्ति व्यास अचानक 16 मार्च को लापता हो गईं थीं।

    मुंबई.एक्टर फरहान अख्तर की एक्स वाइफ अधुना के सलून 'बी ब्लंट' की फाइनेंस मैनेजर कीर्ति व्यास की गुमशुदगी की गुत्थी सुलझ गई है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने खुलासा किया है कि कीर्ति का मर्डर हो चुका है। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में कीर्ति के दो सहयोगी सिद्धेश ताम्हणकर और खुशी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, 16 मार्च को ही दोनों ने कीर्ति की अपनी कार में हत्या कर दी गई थी। पुलिस कस्टडी खत्म हो जाने के बाद दोनों को शुक्रवार को कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें 31 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

    परिवार का आरोप-जबरदस्ती कबूल करवाया गुनाह
    - पुलिस ने इस मामले में दोनों आरोपियों के हत्या के दिन पहने हुए कपड़ों को जांच के लिए भेज दिया है। हालांकी दोनों आरोपियों के परीवार वालों का कहना है की पुलिस ने जोर जबरदस्ती से दोनों से गुनाह कबूल करवाया है। - सिद्धेश और खुशी के वकिल का कहना है इस मामले में दोनों आरोपियों के खिलाफ पुलिस के पास पुख्ता तौर पर कोई भी सबूत नहीं है।

    यह थी कीर्ति की हत्या की वजह


    -- क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के अनुसार, जिस सिद्धेश ताम्हाणकर ने अपनी सहयोगी खुशी सजवानी के साथ मिलकर कीर्ति व्यासका मर्डर किया, वह बी ब्लंट कंपनी में चार साल से काम करता था। उसका काम का परफॉर्मेंस शुरू के तीन साल बहुत अच्छा रहा, सिर्फ 2017 में ही परफॉर्मेंस खराब रहा। इसी खराब परफॉर्मेंस की वजह से कीर्ति ने सिद्धेश को एक महीने का नोटिस दिया था।

    - सिद्धेश को डर था कि उसकी नौकरी चली जाएगी, इसलिए उसने कीर्ति का कत्ल कर दिया।

    - सिद्धेश बी ब्लंट कंपनी में अकाउंटेंट था और उसे जीएसटी का फंडा समझ में ही नहीं आ रहा था, इस वजह से 2017-18 में उसके काम पर विपरीत असर पड़ा था। केंद्र सरकार ने सन 2017 से ही जीएसटी लागू किया है।

    - बतौर फाइनैंस मैनेजर काम करने वाली कीर्ति का मानना था कि सिद्धेश के खराब काम की वजह से कंपनी में उसकी बदनामी हो रही थी, इसलिए उसने सिद्धेश को नोटिस भेजा था।


    सदमे में गई दादी की जान
    - कीर्ति की दादी पोती के अचानक चले जाने को सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकीं और उनका निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आखिरी वक्त में कीर्ति की फोटो उनके बगल में पाई गई।
    - रविवार को कीर्ति की दादी का निधन हुआ। लेकिन कीर्ति के कजिन ने अब यह जानकारी मीडिया को दी है। 16 मार्च को कीर्ति अचानक लापता हो गई थीं। इससे पहले तक उनकी दादी की सेहत ठीक थी। कीर्ति के कजिन विनय ने कहा, "जब कीर्ति घर में दिखाई नहीं दीं तो दादी ने कई बार पूछा कि उनकी पोती कहां है? हमने कई बार उनका ध्यान इस सवाल से हटाने की कोशिश की। लेकिन कब तक उनसे बात छुपाते। दादी कीर्ति को बहुत चाहती थीं। उनके बगल में हमेशा कीर्ति की एक फोटो रहती थी। उनका इस तरह से जाना बेहद दुखद है। 16 मार्च के बाद से उनकी हालत में गिरावट आने लगी थी और वे चुपचुप रहने लगी थीं।"

    कार से मिले अहम सबूत
    - मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच को इस मामले में अहम सबूत कार से ही मिले थे जिसके बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया है।
    - शनिवार को अदालत ने दोनों आरोपियों को 11 मई तक के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
    - क्राइम ब्रांच सूत्रों की मानें तो दोनों ने अपना जुर्म कबूल भी कर लिया है।

    फरहान के ऑफिस में काम करते हैं दोनों आरोपी
    - गिरफ्तार आरोपी सिद्धेश ताम्हणकर और खुशी दोनों फरहान अख्तर की पत्नी अधुना अख्तर के यहां काम करते हैं। पूछताछ में दोनों ने खुलासा किया है कि सिद्धेश के खराब काम की वजह से कीर्ति ने उसे नोटिस दिया था। 16 मार्च को उसका आखिरी दिन था।

    बहाने से कीर्ति को बुलाया
    - पुलिस के मुताबिक, हत्या वाले दिन दिन दोनों आरोपी अपनी इको स्पोर्ट्स कार से कीर्ति से मिलने गए। दोनों ने उसे इस बात के लिए मनाया कि वो उससे मिले ताकि उनके बीच किसी तरह कि कोई गलतफहमी न रहे।
    - पुलिस का मानना है कि कीर्ति की हत्या कार में ही की गई थी और फिर उसकी लाश को ले जाकर ठिकाने लगा दिया गया।
    - पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया है की शव के तीन टुकड़े किये गए और अलग अलग तीन जगहों पर फेका गया है।

    कार को छिपा दिया गया
    - इसके बाद दोनों कार लेकर एक गैराज में पहुंचे और उसकी पूरी तरह से सफाई कर दी।
    - कुछ दिन बाद क्राइम ब्रांच ने उनकी कार को बरामद किया और उसे फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया। जांच में गाड़ी की डिक्की से खून के निशान मिले। जब खून के नमूने को कीर्ति माता-पिता के नमूने से मिलाया गया तो सैम्पल मैच कर गया।

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    कीर्ति व्यास और उनकी दादी।
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