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जेडे मर्डर केस: चिंदी बताने से नाराज था राजन, जानें 2011 से 2018 तक कब क्या हुआ

पत्रकार जेडे की हत्या 11 जून 2011 को मुंबई में हुई थी।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 02, 2018, 05:49 PM IST

  • जेडे मर्डर केस: चिंदी बताने से नाराज था राजन, जानें 2011 से 2018 तक कब क्या हुआ
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    छोटा राजन को इंडोनेशिया से पकड़ा गया था और फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद है।

    मुंबई. वरिष्ठ पत्रकार ज्योतिर्मय डे (जेडे) की हत्या मामले में अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन समेत 9 को मंगलवार को दोषी करार दिया गया। सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। वहीं इस मामले में पत्रकार जिगना वोरा और पॉलसन को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। पत्रकार जेडे की हत्या 11 जून 2011 को मुंबई में हुई थी। आपको बता दें कि पिछले सात साल से ये मामला चल रहा था। हत्याकांड का सबसे बड़ा दोषी माफिया डॉन छोटा राजन फिलहाल दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद है।

    राजन ने इसलिए करवाई जेडे की हत्या
    - कोर्ट में सीबीआई की ओर से दायर 300 पेज की चार्जशीट के मुताबिक, छोटा राजन ने अंडरवर्ल्ड और उनकी लाइफ पर किताब लिखने के कारण पत्रकार ज्योर्तिमय डे की हत्या का आदेश दिया था। राजन को सीबीआई ने 12वां आरोपी बनाया था।
    - जेडे की एक किताब छोटा राजन समेत 20 गैंगस्टर्स पर आधारित थी, जिसका टाइटल चिंदी- रंक से राजा (Chindi-Rags to Riches) था और दूसरी किताब दाऊद इब्राहिम पर थी, जिसमें बताया गया था कि कैसे एक छोटा-सा स्मगलर बिना एक भी गोली चलाए इंटरनेशनल डॉन बन जाता है।


    'चिंदी' लिखने से नाराज था राजन
    - राजन को पता चला था कि किताब में उसके लिए 'चिंदी'(छोटा आदमी) शब्द का प्रयोग किया गया था, जो सामान्य तौर पर गाली और अपमान की नजर से देखा जाता है।

    राजन को इस बात का था डर
    - सीबीआई का मानना था कि छोटा राजन को संदेह था कि उसके प्रतिद्वंदी को अच्छी तरह से चित्रित किया जा रहा है, जिसको लेकर राजन नाराज था। सीबीआई के मुताबिक राजन के खिलाफ लिखे गए डे के कुछ आर्टिकल्स पर भी उसे आपत्ति थी।
    - चार्जशीट में आगे बताया गया कि 20 गैंगस्टर्स पर लिखी जा रही किताब में जेडे ने अपने सोर्सेस के हवाले से कुछ ऐसी बातें बताई थी, जिससे छोटा राजन का देशभक्त होने का झूठा मुखौटा उतर जाता। इसी से वह खुद को सुरक्षित रखता था और अपने परिवार के लिए पैसे जमा करता था। बुक में कहा गया था कि राजन को उन लोगों की कोई चिंता नहीं थी जिन्होंने राजन को एक बड़ा नाम बनने में अपनी जान दे दी।

    ऑडियो में राजन ने स्वीकार किया था अपना गुनाह
    - 11 जून 2011 को मुंबई के पवई इलाके में उनके घर के बाहर दिन दहाड़े जे डे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
    - इस मामले में सुनवाई के दौरान सरकारी वकील प्रदीप घरट ने छोटा राजन और उसके करीबी मनोज शिवदासनी के बीच हुई बातचीत का ऑडियो पेश किया था। मनोज शिवदासनी जेडे हत्या के एक अन्य दोषी विनोद चेंबुर का मित्र है। विनोद चेंबुर की मौत हो चुकी है।
    - प्रदीप घरट के अनुसार शिवदासनी ने माना कि अदालत में पेश किए गए ऑडियो टेप में सुनाई दे रही आवाजें उसकी और छोटा राजन की हैं। इसमें जेडे को मरवाने की बात राजन ने स्वीकार की थी।
    - जो ऑडियो पेश किया गया उसमें राजन ने कहा, “वो दाऊद से मिला हुआ है। डे हद पार कर चुका है।” बातचीत में जे डे मामले में गिरफ्तार किए गए पत्रकार जिगना वोरा का भी नाम लिया गया है।
    - मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जे डे की हत्या के एक दिन पहले जिगना ने छोटा राजन को 36 बार फोन किया था।

    जेडे केस में कब-क्या हुआ ?

    • 11 जून 2011 : पत्रकार ज्योर्तिमय डे (56) की उपनगर पोवई में हीरानंदानी गार्डन्स के निकट गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पोवई पुलिस थाने में हत्या का मामला दर्ज हुआ और इसकी जांच अपराध शाखा को सौंपी गई ।
    • 27 जून 2011 : मुंबई की अपराध शाखा ने सात लोगों को गिरफ्तार किया था जिसमें शूटर सतीश कालिया के अलावा अभिजीत शिंदे, अरूण दाके, सचिन गायकवाड़, अनिल वाघमोरे, नीलेश शेंडगे और मग्नेश अगवाने शामिल हैं। उनसे पूछताछ के आधार पर पुलिस ने तीन और आरोपियों विनोद असरानी, दीपक सिसोदिया और पॉलसन जोसेफ को गिरफ्तार किया।7
    • सात जुलाई 2011 : आरोपियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (मकोका) के सख्त प्रावधान लागू किए गए।
    • 25 नवंबर 2011 : पत्रकार जिग्ना वोरा को गिरफ्तार किया गया। आरोप लगा कि जिग्ना ने गैंगस्टर छोटा राजन को जेडे की हत्या की योजना बनाने के लिए उकसाया।
    • तीन दिसंबर 2011 : अपराध शाखा ने मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। इसमें छोटा राजन और नयन सिंह बिष्ट को वांछित आरोपी बताया गया।
    • 21 फरवरी 2012 : वोरा के खिलाफ पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया।
    • 27 जुलाई 2012 : वोरा को जमानत मिली।
    • 10 अप्रैल 2015 : लंबी बीमारी के बाद असरानी की जेल में मौत।
    • आठ जून 2015 : अदालत ने 11 आरोपियों के खिलाफ आईपीसी, मकोका और सशस्त्र अधिनियम की संबद्ध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।
    • 25 अक्तूबर 2015 : राजन को इंडोनेशिया के बाली से गिरफ्तार किया गया और भारत भेजा गया। बाद में उसे दिल्ली की तिहाड़ जेल में रखा गया।
    • पांच जनवरी 2016 : मामला सीबीआई को सौंपा गया।
    • सात नवंबर 2016 : डे की पत्नी शुभा शर्मा ने अदालत में बताया कि हत्या के एक हफ्ते पहले से डे बहुत तनाव में थे।
    • 31 अगस्त 2017 : विशेष मकोका अदालत ने राजन के खिलाफ आरोप तय किए।
    • 22 फरवरी 2018 : अभियोजन पक्ष ने अंतिम दलीलें पूरी की।
    • 2 अप्रैल 2018:अदालत ने राजन का अंतिम बयान दर्ज किया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए राजन तिहाड़ जेल से अदालत में पेश हुआ।
    • 3 अप्रैल 2018 : बचाव पक्ष की दलीलें पूरी हुई। विशेष मकोका अदालत ने दो मई तक के लिए फैसले को सुरक्षित रखा।
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    11 जून 2011 को मुंबई में पत्रकार की हत्या हुई थी।
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