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महाराष्ट्र की आठ तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, 33 प्रतिशत बिजली बिल होगा माफ

प्रदेश के राजस्व विभाग की तरफ से इससे संबंधित शासनादेश जारी किया गया।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 26, 2018, 11:23 AM IST

  • महाराष्ट्र की आठ तहसीलें सूखाग्रस्त घोषित, 33 प्रतिशत बिजली बिल होगा माफ
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    इसमें जलगांव,यवतमाल और वाशिम की तहसीलें शामिल हैं।

    मुंबई. प्रदेश के तीन जिलों की आठ तहसीलों में मीडियम लेवल का सूखा घोषित किया गया है। बुधवार को प्रदेश के राजस्व विभाग की तरफ से इससे संबंधित शासनादेश जारी किया गया।

    ये तहसील घोषित की गई सूखाग्रस्त

    - महाराष्ट्र सरकार के मुताबिक जिन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है उनमें जलगांव जिले की मुक्ताईनगर और बोदवड तहसील, यवतमाल जिले की रालेगांव, दिग्रस, घाटंजी, केलापुर, यवतमाल तहसील और वाशिम जिले की वाशिम तहसील शामिल है।

    इस आधार पर घोषित किया गया सूखाग्रस्त
    - इन तहसीलों में हुई कम बारिश, फसलों की स्थिति और भूजल स्तर समेत अन्य मुद्दों को ध्यान में रखते हुए सूखे की घोषणा की गई है।
    - भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री एकनाथ खडसे ने पिछले साल जलगांव की तीन तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग की थी और इस मामले में सदन में भी सरकार पर हमला बोला था। जिसके बाद अब सरकार ने जलगांव की दो तहसीलों को सूखाग्रस्त इलाकों की सूची में शामिल किया है।

    यह होगा फायदा
    - सरकार के शासनादेश के अनुसार मध्यम स्वरूप का सूखा घोषित की जाने वाली तहसीलों में कृषि पंप के बिजली बिल में 33.50% छूट दी जाएगी।
    - किसानों के कृषि पंप का बिजली कनेक्शन नहीं काटा जाएगा।
    - खेती से जुड़े कर्ज की वसूली रोकी जाएगी और सहकारी कर्ज का पुनर्गठन किया जाएगा।
    - साथ ही स्कूल और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों का परीक्षा शुल्क भी माफ किया जाएगा।
    - जमीन राजस्व में रियायत दी जाएगी। इसके अलावा मनरेगा अंतर्गत किए जाने वाले कामों के लिए मापदंडों मे छूट दी जाएगी।


    साल 2017 में 14 हजार गांव सूखाग्रस्त
    - इससे पहले साल 2017 खरीफ सीजन में महाराष्ट्र सरकार ने तकरीबन 14 हजार गांवों को सूखाग्रस्त घोषित किया था। इनमें से ज्यादातर मराठवाडा और विदर्भ में आने वाले गांव शामिल थे।
    - नेशनल एग्रीकल्चर एंड ड्रॉउट एसेसमेंट सिस्टम (एनएडीएएमएस)नेशनल एग्रीकल्चर एंड ड्रॉउट एसेसमेंट सिस्टम (एनएडीएएमएस) के मुताबिक पिछले साल 17 राज्यों के 225 जिलों में सूखे के हालत थे। ये सभी जिले कृषि उत्पादन में अग्रणी हैं।
    - सबसे ज्यादा जिन राज्यों में सूखे का असर पड़ा है उसमें महाराष्ट्र, यूपी और पंजाब शामिल हैं।
    - साल 2013 में भी महाराष्ट्र के 34 जिलों में भीषण सूखा पड़ा था। इसे 40 साल का सबसे बड़ा अकाल बताया गया था।


    लातूर में उत्पन्न हुए थे बाढ़ जैसे हालत
    - महाराष्ट्र के जिन इलाके(लातूर और बीड) में 40 साल का सबसे भयंकर सूखा पड़ा था, वहां के लोग पिछले दो साल से भयंकर बाढ़ की मार झेल रहे हैं। यहां औसत से तकरीबन ढाई गुना ज्यादा बारिश हुई थी। बाढ़ का कहर इस कदर था कि पानी में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों का इस्तेमाल करना पड़ा था।
    - लातूर महाराष्ट्र का सबसे ज्यादा सूखाग्रस्त इलाका रहा है। दो साल पहले पानी को लेकर हुए विवादों के चलते जिले के कई इलाकों में धारा 144 लगानी पड़ी थी।

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    बीजेपी नेता एकनाथ खडसे ने कई तहसीलों को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग उठाई थी।
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