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महाराष्ट्र में सरकारी योजना के तहत एक अधिकारी, एक घर देने की बनेगी नीति

महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।

Danik Bhaskar | May 05, 2018, 11:22 AM IST
हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को एक से ज्यादा घर दिए जाने पर एतराज जताया था। हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को एक से ज्यादा घर दिए जाने पर एतराज जताया था।

मुंबई. एक व्यक्ति को किसी भी सरकारी योजना के तहत एक समय पर पूरे राज्य में केवल एक फ्लैट ही आवंटित होगा। इसके लिए राज्य सरकार नीति बनाएगी। महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।

हाईकोर्ट ने जताई थी नाराजगी
- कुंभकोणी ने कहा कि राज्य प्रायोजित किसी भी योजना के तहत महाराष्ट्र में नौकरशाहों और न्यायाधीशों समेत एक व्यक्ति को केवल एक फ्लैट आवंटित किया जाएगा।
- बता दें कि गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ता केतन तिरोडकर की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को एक से ज्यादा घर दिए जाने पर एतराज जताया था। साथ ही इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का ध्यानाकर्षण करने की बात कही थी।

कोर्ट ने सरकार के प्रयास की सराहन की
- सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने सरकार के बयान की सराहना की। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि हाईकोर्ट कार्यालय समेत किसी भी सरकारी कार्यालय को निजी मुनाफे के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। किसी भी तरह का गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

हर कोई गांधी नहीं हो सकता
- न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि हम समझते हैं कि हर किसी को एक फ्लैट की जरूरत होती है। हर कोई अपने परिवार के प्रति जवाबदेह होता है। हर कोई महात्मा गांधी नहीं हो सकता। अदालत ने कहा कि चाहे कोई व्यक्ति न्यायाधीश हो या नौकरशाह लेकिन अगर उसे किसी सरकारी योजना के तहत पहले ही फ्लैट मिल गया है तो उसे राज्य में उसी शहर या किसी अन्य शहर में दूसरा फ्लैट नहीं दिया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने आधिकारिक पद का इस्तेमाल कर अपने आप को फायदा नहीं पहुंचा सकता। कुंभकोणी ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति अपना फ्लैट लौटा देता है तो फिर वह किसी सरकारी योजना के तहत दूसरे फ्लैट के लिए आवेदन दे सकता है।

आईपीएल मैचों पर खतरा? अदालत ने पवना नदी के पानी के इस्तेमाल पर लगाई रोक
- महाराष्ट्र क्रिकेट असोसिएशन को बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने क्रिकेट मैचों के दौरान पवना नदी के पानी के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि क्रिकेट पिचों को मेनटेन करने के लिए पवना के पानी का इस्तेमाल करना अवैध है। हाईकोर्ट ने एमसीए और सरकार के बीच पवना से पानी इस्तेमाल किए जाने वाले अग्रीमेंट को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया था कि आईपीएलमैचों के दौरान पानी की खपत काफी ज्यादा होगी, जबकि पुणे को सिर्फ पवना नदी से ही पानी की आपूर्ति होती है।

महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह जानकारी दी। महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने बॉम्बे हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।