--Advertisement--

महाराष्ट्र विधानपरिषद की 6 सीटों के लिए वोटिंग शुरू, पंकजा और धनंजय मुंडे की साख दांव पर

5 सदस्यों का कार्यकाल 21 जून और एक सदस्य का कार्यकाल 31 मई को खत्म होगा।

Danik Bhaskar | May 21, 2018, 01:13 PM IST
इन सीटों पर सभी बड़ी पार्टियों ने अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं। इन सीटों पर सभी बड़ी पार्टियों ने अपने उम्मीदवार घोषित किए हैं।

पुणे. स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों से महाराष्ट्र विधानपरिषद की 6 सीटों के द्विवार्षिक चुनाव के लिए वोटिंग शुरू हो गई है। विधान परिषद के 21 सदस्यों का कार्यकाल इस साल खत्म हो रहा है। इसमें से 5 सदस्यों का कार्यकाल 21 जून और एक सदस्य का कार्यकाल 31 मई को खत्म होगा। चुनाव की मतगणना 24 मई को होगी। राज्य के बड़े दल सीटों की साझेदारी कर चुनाव में उतरे हैं।

जिन सीटों पर चुनाव हो रहा है वो इस प्रकार हैंः-

- उस्मानाबाद - बीड - लातूर सीट
- रायगढ - रत्नागिरि - सिंधुदुर्ग
- नासिक
- प्रभानी - हिंगोली
- अमरावती
- वर्धा - चंद्रपुर - गढचिरौली

इनका कार्यकाल हो रहा समाप्त
- बता दें कि महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य जयंत जाधव (नासिक), बाबा जानी दुर्रानी (परभणी-हिंगोली), दिलीप राव देशमुख (उस्मानाबाद-लातूर-बीड), मंत्री प्रवीण पोटे पाटील (अमरावती) और मितेश भांगाडिया 21 जून को रिटायर हो रहे हैं जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अनिल तटकरे (रायगड-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग) का कार्यकाल 31 मई को समाप्त हो रहा है।


किस पार्टी के पास कितनी सीटें?
- महाराष्ट्र विधान परिषद में कुल 78 सीटें हैं। इसमें एनसीपी के 23 सदस्य हैं। इसके अलावा कांग्रेस के 19, बीजेपी के 18, शिवसेना के 9, पीआरपी और लोकभारती के 1-1 सदस्य हैं। विधान परिषद में विपक्ष का बहुमत होने से सभापति पद एनसीपी और उपसभापति पद कांग्रेस के पास है।


राज्य विधान परिषद में ऐसे होता है सदस्यों का चुनाव
- संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार, किसी राज्य की विधान परिषद के एक-तिहाई से अधिक और किसी भी स्थिति में 40 से कम नहीं हो सकती। भारतीय संसद कानून द्वारा विधान परिषद की रचना के संबंध में संशोधन कर सकती है।
- 1/3 सदस्य, स्थानीय संस्थाओं के सदस्यों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं। इन स्थानीय संस्थाओं में नगरपालिका, जिला बोर्ड और राज्य की अन्य संस्थाएं सम्मिलित हैं जो संसद कानून द्वारा निश्चित करती है।
- 1/12 सदस्य, राज्य के ऐसे स्नातक मतदाताओं द्वारा निर्वाचित किये जाते हैं जिनको भारत के किसी विश्वविद्यालय से कम-से-कम तीन वर्ष पहले डिग्री मिल चुकी हो।
- 1/12 सदस्य, राज्य के हायर सैकेण्डरी या इससे उच्च शिक्षा संस्थाओं में काम कर रहे ऐसे अध्यापकों द्वारा निर्वाचित किए जाते हैं, जो गत तीन वर्षों से वहां पढ़ा रहे हों।
- 1/3 सदस्य, संबंधित राज्य विधान सभा के सदस्यों द्वारा उन व्यक्तियों में से निर्वाचित किए जाते हैं जो राज्य विधान सभा के सदस्य नहीं हैं।
- शेष 1/6 सदस्य, राज्यपाल द्वारा मनोनीत किये जाते हैं। राज्यपाल केवल उ व्यक्तियों को मनोनीत करता है, जिनको विज्ञान, कला, साहित्य, सहकारिता आंदोलन या समाज सेवा के क्षेत्र में विशेष ज्ञान या अनुभव हो।

पंकजा और धनंजय मुंडे की साख दांव पर
- इन 6 सीटों में सबसे कड़ा मुकाबला उस्मानाबाद लातूर-बीड निर्वाचन क्षेत्र में माना जा रहा है। यहां ग्रामविकास मंत्री पंकजा मुंडे और विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे की साख दांव पर लगी हुई है।
- लातूर बीड़ उस्मानाबाद निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा के उम्मीदवार सुरेश धस और एनसीपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार अशोक जगदाले के बीच कड़ा मुकाबला है।

- पहले इस स्थान से एनसीपी ने भाजपा से तोड़े गए रमेश कराड को उम्मीदवार बनाया था लेकिन करार ने अंतिम दिन नामांकन वापस लेकर एनसीपी के लिए खासी मुसीबत पैदा कर दी।
- मजबूरन एनसीपी को निर्दलीय अशोक जगदाले को समर्थन घोषित करना पड़ा। इस निर्वाचन क्षेत्र में 1005 मतदाता हैं।

शिवसेना ने बीजेपी को दिया झटका
- विधानपरिषद का यह चुनाव इसलिए भी काफी दिलचस्प है कि बीजेपी को झटका देते हुए शिवसेना ने दिवंगत सांसद चिंतामन वांग के बेटे श्रीनिवास वांग को चुनाव मैदान में उतारा है। बीजेपी ने कांग्रेस से आए पूर्व मंत्री राजेंद्र गावित को टिकट दिया है।

ग्रामविकास मंत्री पंकजा मुंडे और विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे की साख दांव पर लगी हुई है। ग्रामविकास मंत्री पंकजा मुंडे और विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे की साख दांव पर लगी हुई है।