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महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र शुरू, 47 साल बाद नागपुर में हो रहा आयोजन

सरकार में शामिल शिवसेना भी नाणार रिफाइनरी के मुद्दे पर सरकार से दो-दो हाथ करने को तैयार है।

Danik Bhaskar | Jul 04, 2018, 06:28 PM IST

नागपुर/मुंबई. महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र बुधवार से नागपुर में शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन सरकार ने पत्रकारों को बड़ा तौफा देते हुए उनकी पेंशन के लिए 15 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को मंजूरी दी। वहीं विपक्ष ने सत्र के शुरू होते ही हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने सरकार को किसान आत्महत्या, किसान कर्जमाफी, जमीन घोटाले के आरोप और कोंकण की पेट्रो केमिकल रिफाइनरी जैसे मुद्दों पर घेरा। 4 जुलाई से शुरू हो रहा यह मानसून सत्र 20 जुलाई तक चलेगा।

सत्र के पहले दिया क्या-क्या हुआ?

पत्रकारों की पेंशन के लिए सरकार ने 15 करोड़ दिए
- महाराष्ट्र सरकार की ओर से वित्त राज्य मंत्री दीपक केसरकर ने राज्य विधानमंडल में आज 11,445 करोड़ रुपये की पूरक मांगों को प्रस्तुत किया, जिसमें राज्य के वरिष्ठ पत्रकारों के लिए पेंशन योजना के कार्यान्वयन के लिए 15 करोड़ रुपये शामिल हैं। सरकार ने 'आचार्य बलशास्त्री जमशेखर संमान योजना' नाम से पत्रकारों के लिए पेंशन स्कीम की शुरुआत की है।

बुलेट परियोजना के लिए 250 करोड़
- सरकार की ओर से सदन में बताया गया कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए राष्ट्रीय हाई स्पीड रेल निगम लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

पृथक विदर्भ की मांग को लेकर हंगामा
- पृथक विदर्भ की मांग को लेकर 'विदर्भ राज्य आंदोलन समिति' की ओर से अधिवेशन के पहले ही दिन वैरायटी चौक पर प्रदर्शन किया गया। वैरायटी चौक पर 50 -60 कार्यकर्ता जुटे थे। कुछ देर के हंगामे के बाद पुलिस ने सभी को हिरासत में ले लिया।

13 दिन के सत्र में 27 विधेयक
- 13 दिन तक चलने वाले मानसून सत्र में सरकार कुल 27 विधेयक सदन में पेश करेगी, जिसमें महानगरपालिका, राजस्व, कृषि, आदिवासी विकास, वक्फ बोर्ड की जमीन जैसे कई सारे महत्वपूर्ण विधेयक हैं। विधान परिषद के 3 लंबित विधेयक, 12 अध्यादेश, 17 नए विधेयक सदन में रखे जाएंगे।

विपक्ष ने किया चाय पार्टी का बहिष्कार
- सत्र से एक दिन पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विपक्ष को चाय पर बुलाया था। लेकिन विपक्ष ने इसका बहिष्कार कर अपने मंसूबे साफ कर दिए हैं। नेता विपक्ष राधा कृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि फडणवीस सरकार ने अब तक के कार्यकाल में केवल घोषणाएं करने के आलावा कुछ नहीं किया है।
- उन्होंने कहा, "सूबे में किसानों की आत्महत्याएं रुकने का नाम नहीं ले रहीं हैं, किसानों को खरीफ की फसल के लिए बैंकों से लोन मिलना मुश्किल हो गया है। इतना ही नहीं, बैंक अधिकारियों की हिमाकत इतनी बढ़ गई है कि वह किसानों की पत्नी से लोन देने के बदले शारीरिक सुख की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री फडणवीस चुप रहते हैं, एक ट्वीट पर चेतावनी भी देना ठीक नहीं समझते।"

47 साल बाद नागपुर में हो रहा आयोजन
नागपुर में 47 साल बाद विधानमंडल का मानसून सत्र आयोजित हो रहा है। इससे पहले हर साल मुंबई में ही मानसून सत्र का आयोजन होता रहा है। आजादी के बाद से यह चौथी बार है जब नागपुर में इसका आयोजन हो रहा है। इससे पहले नागपुर में साल 1961, 1966 और 1971 इसका आयोजन किया गया था।