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बैंक ने लोन देने से किया था इनकार, खड़ी की ऐसी डेरी- बच्चन-अंबानी हैं कस्टमर

इस डेरी से दूध खरीदते हैं मुकेश अंबानी और अमिताभ बच्चन जैसे सेलेब्स, ऐसी है सक्सेस स्टोरी।

Danik Bhaskar | Jun 01, 2018, 02:18 PM IST

पुणे. 1 जून का दिन दुनियाभर में वर्ल्ड मिल्क डे के रूप में ऑब्जर्व किया जाता है। हर शख्स के जीवन में एक डेरी की क्या अहमियत है, इसी बात को समझाने के लिए युनाइटेड नेशन्स की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइजेशन ने साल 2001 में इस स्पेशल इवेंट की शुरुआत की थी। लोगों के मन में उत्सुकता रहती है कि क्या अमिताभ बच्चन और मुकेश अंबानी जैसे सेलेब्स भी आम आदमी जैसी जिंदगी जीते होंगे? क्या उनके घर भी वही पैकेट वाला दूध आता होगा, जैसा हमारे घरों में आता है? इस मौके पर DainikBhaskar.com उस डेरी के बारे में बता रहा है, जहां से ये सेलेब्स अपने लिए दूध खरीदते हैं।

बैंक ने लोन देने से कर दिया था इनकार

- पराग मिल्क फूड्स के मालिक देवेंद्र शाह के पिता टेक्सटाइल बिजनेस में थे। देवेंद्र का सपना एक वर्ल्ड क्लास डेरी शुरू करना था, जिससे वे अपने गांव मंचार के लोगों की मदद भी कर सकें, उन्हें रोजगार देकर।
- उन्होंने एक बिजनेस प्लान तैयार किया और पिता को साथ लेकर एक बैंक के पास लोन का प्रपोजल लेकर पहुंच गए। एक इंटरव्यू में शाह ने बताया, "ब्रांच मैनेजर ने मेरे प्लान की काफी तारीफ की। मैंने एक दिन में 20 हजार लीटर दूध प्रॉसेस करने का प्लान बनाया था। मैनेजर लोन देने के लिए तैयार हो गया था, लेकिन एक गारंटर की दरकार थी। मैंने उम्मीद की थी कि मेरे पिताजी गारंटर के तौर पर साइन कर देंगे, लेकिन उन्होंने वहीं इनकार कर दिया। मैनेजर ने गारंटर न होने की वजह से लोन देने से मना कर दिया।"
- लोन पास न हो पाने और पिता के इनकार करने की वजह से देवेंद्र शाह काफी दुखी हुए थे। उस दिन वे बहुत रोए भी थे। लेकिन उस वाकये ने उन्हें अपने सपने की ओर पहले से ज्यादा मजबूत कर दिया।
- शाह ने बताया, "मैंने दोबारा प्लान बनाया। इस बार मैंने प्रॉफिट मार्जिन 18 परसेंट तक बढ़ा दिया था। उस दूसरे प्लान के आधार पर मुझे बैंक ने बिना किसी गारंटर के लोन दे दिया था। कई सालों बाद मुझे समझ आया कि यदि पिताजी तब ही साइन कर देते तो मैं हमेशा के लिए उन पर निर्भर हो जाता।"
- इस तरह 1992 में पराग मिल्क फूड्स लिमिटेड की शुरुआत हुई। देवेंद्र शाह की कंपनी गांव के ग्वालों से दूध खरीदकर उसे प्रॉसेस करती थी और चीज, बटर, पनीर, घी जैसे उत्पाद बनाती थी। इसके अधिकतर प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट किए जाते हैं।

ऐसे खुली भाग्यलक्ष्मी डेरी

- पराग मिल्क फूड्स बेहतरीन बिजनेस कर रहा था, लेकिन देवेंद्र शाह के मन में लगातार डेरी को बढ़ा बनाने के विचार आते रहे।
- साल 2005 में उन्होंने भाग्यलक्ष्मी डेरी फार्म की शुरुआत की। यहां पर उन्होंने देसी गाय की जगह स्विट्जरलैंड की होलस्टीन गायों का दूध प्रॉसेस करने का प्लांट लगाया।

कैसे अलग है भाग्यलक्ष्मी डेरी?

- देवेंद्र शाह बताते हैं, "हमारे फार्म की कहानी 35 एकड़ खेतों से शुरू होती है। फार्म भीमा नदी और भीमेश्वर पर्वत के बीच मंचर में बना है। यह गांव अपनी हरी उपज के लिए पॉपुलर है। यहां इंटरनेशनल टेक्नलॉजी का यूज कर दूध प्रॉसेस किया जाता है, जिसे कन्ज्यूमर से पहले कोई नहीं छूता।"
- डेरी पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेक्शन भी बनाया गया है, जिससे यहां यूज हो रही टेक्नलॉजी को लगातार बेहतर बनाया जा सके।

स्विट्जरलैंड से मंगवाई हैं गायें, रहती हैं एसी में

- भाग्यलक्ष्मी डेरी पर 2000 से ज्यादा होलस्टिन फ्रेशियान प्रजाति की गाये हैं। यह ब्रीड स्विट्जरलैंड से मंगवाई गई है।
- देसी गाय जहां पर डे 10-12 लीटर दूध देती है, वहीं ये गायें काउ कंफर्ट टेक्नलॉजी की वजह से 25-28 लीटर दूध प्रॉड्यूस करती हैं।
- शाह बताते हैं, "हम आपने गायों को सेलेब्रिटी से कम नहीं मानते। हमने उनके नाम बॉलीवुड एक्ट्रेसेस के नाम पर रखे हैं। ऐश्वर्या और करीना नाम की गाय सबसे ज्यादा 50-54 लीटर तक दूध प्रॉड्यूस करती हैं।"
- हर गाय एक रबर मैट पर आराम करती है, जिसके कारण वो हमेशा बैक्टीरिया फ्री रहती है। उन्हें 24x7 आरओ वॉटर दिया जाता है।
- गाय की डाइट भी काफी अलग है। उनकी एज और वेट के आधार पर प्रोटीन, अल्फा-अल्फा और मौसमी सब्जियां दी जाती हैं, जिसे टोटल मील रेशो कहा जाता है।
- यहां गायों को रिलैक्स करवाने के लिए म्यूजिक भी बजाया जाता है।
- फार्म का टेम्प्रेचर 26 डिग्री से ज्यादा नहीं जाता। अगर किसी वजह से ऐसा होता है तो तुरंत स्प्रिंकलर्स गायों को ठंडक पहुंचाते हैं।


रिकमंडेशन पर ही बन सकते हैं कस्टमर

- भाग्यलक्ष्मी डेरी फार्म से दूध खरीदना आसान नहीं है। यहां सिर्फ स्पेशल कस्टमर्स को ही दूध सप्लाई किया जाता है। इसका कस्टमर बनने के लिए किसी एग्जिस्टिंग कस्टमर से रिकमंडेशन लेना पड़ता है।
- अंबानी, बच्चन से अक्षय कुमार और ऋतिक रोशन तक, ये सेलेब्स इस डेरी के कस्टमर्स में शामिल हैं।
- पराग मिल्क फूड्स का फार्म सिर्फ महाराष्ट्र के मंचर में भाग्यलक्ष्मी नाम से है। डेरी प्रॉडक्ट्स प्रॉडक्शन के दो सेंटर हैं- एक मंचर और दूसरा पालमनेर, आंध्रप्रदेश में।

दूध ऐसे पहुंचता है फार्म से घर तक

- भाग्यलक्ष्मी डेरी फार्म का दूध Pride of cows के ब्रांड नेम से बिकता है।
- मिल्किंग प्रोसेस के बाद दूध को इनस्टेंट पॉश्चराइज और होमोजिनाइज करके 4 डिग्री पर पैक किया जाता है।
- दूध निकालाने का प्रॉसेस पूरी तरह मशीनों से किया जाता है, इसी वजह से दूध मानव हाथ से अछूता रहता है।
- देवेंद्र शाह के मुताबिक इनकी कंपनी के दूध में मिनिमम बैक्टिरिया होते हैं, क्योंकि दूध बिल्कुल भी हवा के संपर्क में नहीं आता।