फ्लैशबैक / शिंदे को पवार ने सिखाया था हाथ जोड़ना; पुलिस वाले से देश के गृहमंत्री तक पहुंचे

एक कार्यक्रम में सुशील कुमार शिंदे, शरद पवार और पृथ्वीराज चौहाण एक कार्यक्रम में सुशील कुमार शिंदे, शरद पवार और पृथ्वीराज चौहाण
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एक कार्यक्रम में सुशील कुमार शिंदे, शरद पवार और पृथ्वीराज चौहाणएक कार्यक्रम में सुशील कुमार शिंदे, शरद पवार और पृथ्वीराज चौहाण

  • सोलापुर में अपने पहले विधानसभा चुनाव की यादें ताजा कीं
  • संघर्ष भरा रहा रहा शिंदे का सफर, नौकरी छोड़ी, टिकट भी गया, फिर जीते, मंत्री बने

दैनिक भास्कर

Sep 20, 2019, 05:45 PM IST

सोलापुर. नाजिर से केंद्रीय गृहमंत्री और लोकसभा में कांग्रेस के नेता तक सुशील कुमार शिंदे का सफर संघर्ष भरा रहा। इस बार गणेशोत्सव उन्होंने सोलापुर में ही मनाया। यहां उन्होंने अपने पहले चुनाव की यादें ताजा की। कहा "नाजिर था, बाद में पुलिसवाला बन गया। उस समय शरद पवार से दोस्ती हुई। कांग्रेस के लिए भी काम किया। पुलिसवाला था, तब शरद पवार ने पूछा विधायक का चुनाव लड़ोगे? मैंने हां, कहकर पुलिस की नौकरी छोड़ दी। टिकट भी मांगा, लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने मेरे बजाय हरि सोनवणे को टिकट दे दिया।

 

नौकरी छोड़ने के बाद मुंबई में वकालत शुरू की। कुछ महीने बाद हरि सोनवणे का निधन हो गया और करमाला में उपचुनाव की घोषण हुई। उपचुनाव के प्रचार के लिए कभी मुख्यमंत्री नहीं जाते। लेकिन वसंतराव नाईक मुख्यमंत्री रहते हुए करमाला में प्रचार करने आए। उस समय एक भाषण में उन्होंने कहा आप लोग सुशील कुमार को विधायक बनाओ मैं आगे का देख लूंगा। फिर मैं चुनकर आया। कुछ दिनों बाद मंत्री भी बन गया"

रैली में शरद पवार बोले: शिंदे लोगों के सामने हाथ जोड़ो
करमाला में चुनावी रैली थी, साथ में शरद पवार थे। शिंदे पुलिसवाले थे इसलिए पुलिसिया ठाठ भी था। पवार ने शिंदे से कहा हाथ जोड़िए। तब कहीं जाकर शिंदे ने लोगों के सामने हाथ जोड़कर वोट मांगने की शुरुआत की।

16-17 हजार में लड़ा पहला चुनाव
पहले चुनाव में प्रचार करने के लिए शरद पवार ने 20 हजार रुपये दिए थे। करमाला के नेता नामदेवराव जगताप उस समय प्रचार-प्रसार का जिम्मा संभाल रहे थे। चुनाव खत्म होने पर पूरा खर्च मिलाने के बाद साढ़े तीन हजार रुपये बचे। ये पैसे जगताप ने शरद पवार को लौटा दिए। 16-17 हजार में चुनाव प्रचार हो गया।

सर पर लालटेन रखकर आए थे जगताप
शिंदे राज्यमंत्री बने। मुंबई से मद्रास मेल से वे सोलापुर के लिए निकले। सुबह तीन बजे ट्रेन जेऊर स्टेशन पर रुकी। अंधेरे में उन्हें कैसे पहचानते? इसलिए जगताप सर पर गैस लालटेन रखकर शिंदे के स्वागत के लिए आए थे।

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