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मुंबई हाईकोर्ट ने दी 24 सप्ताह के भ्रूण के गर्भपात की इजाजत

लड़की के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की इजाजत मांगी थी।

Danik Bhaskar

Apr 10, 2018, 10:29 AM IST
बॉम्बे हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट की डबल बेंच ने

मुंबई. बॉम्बे हाईकोर्ट ने दुष्कर्म की शिकार एक 13 साल दस महीने की नाबालिग लड़की को 24 सप्ताह के भ्रूण का गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है। लड़की के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की इजाजत मांगी थी। सोमवार को न्यायमूर्ति नरेश पाटील व न्यायमूर्ति अनुजा प्रभुदेसाई की खंडपीठ के सामने याचिका पर सुनवाई हुई।

1)अपहरण कर बच्ची संग किया था रेप

- याचिका के मुताबिक लड़की के पड़ोसी ने जुलाई 2017 में उसका अपहरण किया था। घटना के बाद लड़की के पिता ने उल्हासनगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। मामले की छानबीन के बाद पुलिस ने 17 मार्च 2018 को लड़की को बरामद किया और आरोपी को पकड़ा था। लड़की तभी पिता को सौंप दी गई थी।

2) परिवार ने किया था गर्भपात का प्रयास
- घर आने के बाद घरवालों को लड़की के गर्भवती होने की जानकारी मिली तो वे उसे अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों ने बताया कि लड़की के पेट में जो भ्रूण पल रहा है वह 24 सप्ताह का है। इसलिए हम अदालत की अनुमति के बिना गर्भपात नहीं कर सकते।

- कानून के तहत डॉक्टरों को सिर्फ 20 सप्ताह तक के भ्रूण का गर्भपात करने की इजाजत है। इसलिए लड़की के पिता व एक गैर सरकारी संस्था 'बेटी बचाओ' ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

3) इस आधार पर कोर्ट ने सुनाया फैसला
- सुनवाई के दौरान लड़की के पिता की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने कहा कि पुलिस ने जब लड़की को पकड़ा था उस समय पुलिस को लड़की के गर्भवती होने की जानकारी थी। फिर भी पुलिस ने लड़की के घरवालों को यह जानकारी नहीं दी। यदि उस समय लड़की के घरवालों को पता चल जाता तो उन्हें परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
- इन दलीलों को सुनने व डाॅक्टरों की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद खंडपीठ ने लड़की को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी और मंगलवार को जेजे अस्पताल जाने को कहा।

4) क्या है गर्भपात का नियम?
- गौरतलब है कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी ऐक्ट के तहत 20 सप्ताह से ज्यादा अवधि वाले भ्रूण को गिराने के लिए उच्च न्यायालय की मंजूरी लेनी पड़ती है। उच्च न्यायालय ने पिछले सप्ताह ही पीड़िता से बातचीत की थी और उसे जेजे अस्पताल के चिकित्सा बोर्ड के पास अपना परीक्षण कराने और उसकी रिपोर्ट सोमवार को सौंपने को कहा था।

5) ऐसे मामलों को लेकर जागरूकता फैलाने की जरुरत:कोर्ट
- मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस तरह के मामले को लेकर जागरूकता फैलाई जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार व गैर सरकारी संगठनों को इस बात का अध्यन करने के लिए कहा कि क्या पास्को व बाल न्याय कानून में ऐसे मामलों को लेकर दिशा-निर्देश मौजूद हैं। खंडपीठ ने कहा कि यदि दिशा-निर्देश मौजूद नहीं होंगे तो हम दिशा-निर्देश बनाएंगे। हाईकोर्ट ने फिलहाल इस मामले की सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।

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