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मुंबई के कॉलेजों में गीता बांटने पर विवाद; विपक्ष बोला- धुव्रीकरण की कोशिश, शिक्षामंत्री का जवाब- क्या श्रीकृष्ण ने गलत उपदेश दिए हैं

सरकार ने यह कहते हुए इससे पल्ला झाड़ लिया है कि एक निजी संस्थान भगवद् गीता बांटना चाहता है।

Danik Bhaskar | Jul 13, 2018, 10:35 AM IST

मुंबई. पुणे स्थित उच्चा शिक्षा निदेशालय के महाविद्यालयों में भगवद् गीता बांटने के निर्देश पर विवाद शुरू हो गया। विपक्ष ने राज्य सरकार पर शिक्षा विभाग के जरिए हिंदुत्ववादी एजेंडा लागू करने का आरोप लगाया। वहीं, राज्य सरकार ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं है। एक निजी संस्थान मुंबई के महाविद्यालयों में भगवद् गीता बांटना चाहता है। यही नहीं, शिक्षामंत्री विनोद तावड़े ने कहा कि कांग्रेस, राकांपा और समाजवादियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या भगवद् गीता में श्रीकृष्ण ने गलत उपदेश दिए हैं। इसलिए इसे छात्रों में न बांटा जाए।

मुंबई के कॉलेजों में बांटी जाने का निर्देश: उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी सर्कुलर के मुताबिक, मुंबई में नैक (एनएएसी) की ए और ए-प्लस श्रेणी के कई गैर-सरकारी अनुदानित कॉलेजों में छात्रों को श्रीमदभगवद् गीता बांटी जानी है। सर्कुलर में कहा गया है कि महाविद्यालय के प्राचार्य इसकी रसीद विभाग को भेजें। बताया जा रहा है कि भक्तिवेदांत बुक ट्रस्ट ने राज्य सरकार के जरिए भगवद् गीता वितरित करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन, शिक्षा विभाग ने ट्रस्ट के माध्यम से ही वितरित करने को कहा।

धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश: पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा, "हम किसी धार्मिक ग्रंथ का विरोध नही करते हैं लेकिन सरकार इसके जरिए ध्रुवीकरण करना चाहती है।" राज्य के पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री और कांग्रेस विधायक नसीम खान ने कहा कि कल कोई बाइबिल और कुरान बांटने की बात कहेगा तो क्या महाविद्यालयों में धार्मिक पुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। एनसीपी प्रदेश अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा कि शिक्षामंत्री ने यह आदेश मीडिया में सुर्खियां पाने के लिए दिया है। इस फैसले को लेकर शिक्षा निदेशालय के बाहर कई संगठनों ने प्रदर्शन किया। इसमें जनतादल यूनाइटेड, भीम आर्मी और संभाजी ब्रिगेड के कार्यकर्ता शामिल थे।

पूरी गीता याद होने का दावा, दो श्लोक नहीं सुना पाए विधायक: अपने बड़बोलेपन के लिए पहचाने जाने वाले राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड ने विधान भवन परिसर में मीडिया से कहा कि सरकार गीता के बहाने राजनीति कर रही है जबकि उन्हें तो पूरी भगवद् गीता याद है। इस पर जब एक पत्रकार ने उनसे गीता के दो श्लोक सुनाने के लिए कहा तो आव्हाड की बोलती बंद हो गई। वह दो श्लोक नहीं सुना पाए।