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इमरजेंसी में इंदिरा के खिलाफ आवाज बुलंद करने वालों से मिलेंगे पीएम मोदी

मोदी इस सभा में आपातकाल के खिलाफ लड़ाई लड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षित करने वालों के प्रति आभार व्यक्त करेंगे।

Dainik Bhaskar

Jun 26, 2018, 08:57 AM IST
आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21

- मोदी ने कहा- कांग्रेस 400 से 44 पर आ गई तो ईवीएम पर सवाल उठने लगे

- प्रधानमंत्री ने कहा- आपातकाल के वक्त कांग्रेस ने रेडियो पर किशोर कुमार के गाने भी रुकवा दिए थे

मुंबई. 43 साल पहले 25 जून 1975 को देश में लगी इमरजेंसी पर भाजपा ने मंगलवार को मुंबई में ‘आपातकाल : लोकतंत्र पर आघात’ विषय पर कार्यक्रम रखा। इसमें बतौर मुख्य वक्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "जब भी कांग्रेस को कुर्सी जाने का डर होता है, वह देश में डर का माहौल बनाना शुरू कर देती है। इनके नेता ये कहना शुरू कर देते हैं कि देश तबाह हो रहा है और देश को हम ही बचा सकते हैं। इनके लिए मूल्य, परंपराएं, देश, संविधान कुछ मायने नहीं रखता।'' मोदी ने कहा- "कांग्रेस की आलोचना मात्र करने के लिए हम काला दिन नहीं मनाते। हम देश और भावी पीढ़ी को जागरूक करना चाहते हैं। हम स्वयं को भी संविधान के प्रति समर्पित रखने के लिए इसे याद करते हैं।"

आपातकाल 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक 21 महीने के लिए लगाया गया था। उस वक्त इंदिरा गांधी की सरकार थी। इस दौरान नागरिक अधिकारों को खत्म कर दिया गया था। इसका विरोध करने वालों को कैद कर लिया जाता था। मोदी के भाषण पर कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ''दिल्ली के सुल्तान औरंगजेब से भी ज्यादा क्रूर तानाशाह मोदी जी ने देश को 43 साल पहले के इमरजेंसी का पाठ पढ़ाया। क्या कांग्रेस पर भड़ास निकालने से मोदी जी के जुल्मों पर परदा डल सकता है?''

आपातकाल का ऐसा उदाहरण कहीं नहीं मिल सकता: मोदी ने कहा- "लोकतंत्र के प्रति समर्पण को बार-बार याद करना चाहिए। ये अपने आप में संस्कार है। आज की पीढ़ी को पूछा जाए कि आपातकाल कैसा था? तो वह इस बारे में ज्यादा नहीं बता पाएगी। दरअसल प्यासे को पता होता है कि पानी न मिलने की तड़पन कैसी होती है। देश ने कभी सोचा तक नहीं था कि सत्ता सुख और परिवार की भक्ति के प्रति समर्पित लोग देश को सलाखों में बंद कर देंगे। लोगों को बताया जाता था कि तुम्हारा नाम मीसा में है और जल्द ही दरवाजे पर पुलिस आने वाली है। संविधान का दुरुपयोग कैसे किया जा सकता है, ऐसा उदाहरण शायद ही कहीं मिले।" मोदी ने कहा- "मैं सीनियर जर्नलिस्ट कुलदीप नैय्यर का सम्मान करता हूं, उन्होंने आपातकाल के दौरान आजादी के लिए लड़ाई लड़ी थी। वो हमारे आलोचक हैं, लेकिन मैं उनके उस विरोध के लिए उन्हें सलाम करता हूं।"

वे दुनिया को मोदी के नाम से डरा रहे हैं: मोदी ने कहा, "वो कहते हैं कि दलित संकट में है। ये भय पैदा किया जा रहा है। दो दोस्तों के बीच में झगड़ा होता है तो उसे भी गलत तरीके से पेश किया जाता है। उनके गाने-बजाने वाले इसमें अहम भूमिका निभाते हैं। जिन्होंने भय का माहौल बनाया, वो दुनिया को मोदी के नाम से डरा रहे हैं। अगर इस देश को चलाना है तो संविधान ही रास्ता हो सकता है। हमारी कोशिश होती है कि संविधान के प्रति लोगों में सम्मान का भाव पनपे।"

रेडियो पर किशोर के गानों को रुकवा दिया था: मोदी ने बताया- "आपातकाल के वक्त कांग्रेस ने किशोर कुमार को खुद के समर्थन में गाना गाने के लिए बुलाया। किशोर ने मना किया तो रेडियो पर से उनके गानों को हटा दिया गया। कांग्रेस पार्टी आंधी फिल्म से इतनी डर गई थी कि उस पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिस पार्टी के अंदर ही लोकतंत्र नहीं, उससे कोई उम्मीद नहीं की जा सकती है।"

400 से 44 पर आ गए तो ईवीएम पर सवाल उठाने लगे: प्रधानमंत्री ने कहा- "आपातकाल में कांग्रेस की मानसिकता और इस समय संसद में मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग लाना दिखाता है कि उनकी मानसिकता में कोई अंतर नहीं आया है। दुनिया हमारे चुनाव आयोग पर गर्व करती है। सबने राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद चुनाव आयोग की भूमिका की सराहना की है, उसे ताकतवर बनाने की बात कही। जब वे (कांग्रेस) 400 से 44 पर आ गए तो ईवीएम पर सवाल उठाने लगे। क्या इनके रहते लोकतंत्र-संविधान सुरक्षित रह सकता है?"

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