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पिता की जिंदगी बचाने हाथ में ड्रिप बॉटल लटकाए खड़ी रही 7 साल की बेटी

यह तस्वीर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत उजागर करती है। मामला औरंगाबाद के घाटी सरकारी हॉस्पिटल का है।

Danik Bhaskar | May 10, 2018, 06:04 PM IST

औरंगाबाद, महाराष्ट्र। यह तस्वीर सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत उजागर करती है। मामला औरंगाबाद के घाटी सरकारी हॉस्पिटल का है। यह एकनाथ गवली और उनकी बेटी है। एकनाथ का 7 मई को ऑपरेशन हुआ था। हॉस्पिटल में ड्रिप स्टैंड नहीं था, इसलिए बेटी को बॉटल पकड़ाकर खड़ा कर दिया गया। कहा गया कि डॉक्टरों ने बच्ची को सख्त हिदायत दी थी कि बॉटल ऊंची रखना। हालांकि हॉस्पिटल ने कहा, NGO ने कराया यह सब...

- औरंगाबाद के रहने वाले एकनाथ गवली को 5 मई को घाटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
- ऑपरेशन के बाद जब उन्हें वार्ड में शिफ्ट किया गया, तो वहां ड्रिप के लिए स्टैंड नहीं था।
- बताया गया कि डॉक्टरों ने 7 साल की बच्ची को सख्त हिदायत दे रखी थी कि बॉटल ऊंची ही रखना। मीडिया में आई खबरों के अनुसार, पिता की जिंदगी की खातिर बच्ची करीब 2 घंटे ऐसे ही बॉटल पकड़े खड़ी रही।

-गौरतलब है कि मराठवाड़ा के इस सबसे बड़े 1200 बेड वाले सरकारी हॉस्पिटल में औरंगाबाद सहित आसपास के 8 जिलों के मरीज इलाज कराने आते हैं।

हॉस्पिटल का तर्क...
-विवाद बढ़ने के बाद हॉस्पिटल की डीन ने मामले में डॉक्टर का एक पैनल बनाकर जांच करवाई। डीन डॉ. कानन येलिकर ने बताया, 'तस्वीर सामने आने के बाद हमने पूरे मामले की जांच करवाई और सभी का बयान कैमरे में रिकॉर्ड किया। जांच में सामने आया कि जिस दौरान डॉक्टर स्टैंड लेने के लिए गया था, उसी वक्त एक NGO से जुड़े तीन लोग वहां से गुजर रहे थे। उन्होंने लड़की की बॉटल पकड़ने वाली फोटो खींच ली।'
-ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर प्रवीण गरवारे ने बताया, स्टैंड छोटा होने से ड्रिप चढ़ाने में दिक्कत हो रही थी। कुछ देर के लिए बच्ची को बॉटल पकड़ाकर मैं दूसरा स्टैंड लेने गया था।

-ग्लोबल मेडिकल फाउंडेशन से जुड़े मसीउद्दीन सिद्दीकी ने कहा, 'घाटी अस्पताल में बड़ी संख्या में गरीब मरीज आते हैं, लेकिन उन्हें जो सहूलियत मिलनी चाहिए, वह नहीं मिलती।'

हाथ में ड्रिप की बॉटल लटकाकर खड़ी बेटी। हाथ में ड्रिप की बॉटल लटकाकर खड़ी बेटी।
करीब 2 घंटे ऐसे ही खड़ी रही बच्ची। करीब 2 घंटे ऐसे ही खड़ी रही बच्ची।

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