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लगातार सातवीं बार एनसीपी के अध्यक्ष बने शरद पवार, जयंत को प्रदेश की कमान

शरद पवार तीन साल (2018-2020) के लिए अध्यक्ष चुने गए हैं।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Apr 30, 2018, 09:59 AM IST

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    पवार तीन साल (2018-2020) के लिए अध्यक्ष चुने गए हैं।

    मुंबई. पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के संस्थापक नेता शरद पवार लगातार सातवीं बार सर्वसम्मति से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। पार्टी के केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं पदेन निर्वाचन अधिकारी टीपी पीतांबरम मास्टर की ओर से रविवार को यहां जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई।

    पुणे में होगा पद ग्रहण कार्यक्रम
    - पवार तीन साल (2018-2020) के लिए अध्यक्ष चुने गए हैं। वे आगामी 10 जून को पुणे में होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन में फिर से प्रभार ग्रहण करेंगे।

    ऐसे हुआ पवार का नाम फाइनल
    - विभिन्न राज्यों से 15 प्रस्ताव आये थे, जिनमें सभी में राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए पवार के नाम का प्रस्ताव किया गया था।
    - इस पद के लिए किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन पत्र नहीं भरा था। इसलिए नामांकन वापसी की अंतिम तारीख समाप्त हो जाने के बाद पवार को निर्वाचित घोषित कर दिया गया है।

    जयंत पाटील बने एनसीपी प्रदेशाध्यक्ष
    - राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पद पर राज्य के पूर्व गृहमंत्री जयंत पाटील की नियुक्ति की गई है। रविवार को पुणे स्थित निसर्ग मंगल कार्यालय में पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार की उपस्थिति में हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में यह घोषणा की गई।
    - पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे का तीन साल का कार्यकाल खत्म होने के बाद इस पद के लिए जयंत पाटील तथा धनंजय मुंडे के नाम ज्यादा चर्चा में थे।


    जब बोलना चाहिए तब चुप्पी साधे रहते हैं मोदी: पवार
    - कार्यकारिणी बैठक में शरद पवार ने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा,"कांग्रेस सरकार में जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री थे तब उन आरोप लगते थे कि वे बाेलते नहीं। अब भाजपा की सरकार में प्रधानमंत्री मोदी जिस समय बोलना जरूरी होता है उस समय चुप्पी साधे बैठ रहते हैं। कठुआ, उन्नाव जैसी दुष्कर्म की घटनाओं को लेकर भाजपा के नेताओं द्वारा की जा रही बयानबाजी गलत है। इन नेताओं का महिलाओं की ओर देखने का दृष्टिकोण गलत है।"
    - आगे पवार ने कहा,"आरोपियों को बचाने के लिए जो माेर्चे निकाले गए उनमें भाजपा के नेता सहभागी हुए थे। देश के अब तक के इतिहास में इतने नादान नेता मैंने नहीं देखे। उन्होंने कहा कि देश में हुए उपचुनावों में 7 से 8 जगहों पर सत्तारूढ़ पार्टी को पराजय मिली है। इससे पहले किसी भी सत्तारूढ़ पार्टी को इतनी बड़ी असफलता नहीं मिली थी। आगामी चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस को आगा करते हुए पवार ने कहा कि हम कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के इच्छुक है, लेकिन कांग्रेस को सीधे बताना चाहिए कि उनकी क्या इच्छा है। जालसाजी हमें पसंद नहीं है।"

    ऐसा है पवार का सियासी सफर

    - शरद पवार का जन्‍म 12 दिसंबर, 1940 को हुआ था। पवार ने अपने सियासी सफ़र की शुरुआत कांग्रेस के साथ 1967 में की।
    - 1984 में बारामती से उन्होंने पहली बार लोकसभा चुनाव जीता। उन्होंने 20 मई, 1999 को कांग्रेस से अलग होकर 25 मई, 1999 को एनसीपी बनाई।
    - शरद पवार, तारिक अनवर और पीए संगमा ने मिल कर एनसीपी बनाई थी। ये तीनों पहले कांग्रेस में थे।
    - उनके नाम महाराष्ट्र का सबसे यंग मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है।1993 में उन्‍होंने चौथी बार सीएम के पद शपथ ली।
    - अपने राजनीतिक करियर में वे यूपीए सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।
    - इसके अलावा वे भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड(BCCI) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पवार 2005 से 2008 तक बीसीसीआई के चेयरमैन रहे और 2010 में आईसीसी के प्रेसिडेंट बने।
    - पवार नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के प्रेसिडेंट हैं। अपनी राजनीतिक विरासत बेटी सुप्रिया सुले को सौंप चुके हैं।
    - सुप्रिया एनसीपी की टॉप लीडर्स में से एक होने के साथ ही पिछले 2 बार से 2009 और 2014 में अपनी पिता की सीट बारामती से एमपी हैं।

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    अपनी बेटी सुप्रिया सुले के साथ शरद पवार।
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