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संपर्क फॉर समर्थन के तहत कल उद्धव से मिलेंगे शाह, पवार का शिवसेना को आम चुनाव साथ लड़ने का न्योता

बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मुलाकात करेंगे।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 05, 2018, 02:52 PM IST

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    अमित शाह ठाकरे को केंद्र सरकार के काम के बारे में बताएंगे। (फाइल‌)

    मुंबई. भाजपा के 'संपर्क फॉर समर्थन' अभियान के तहत पार्टी अध्यक्ष अमित शाह बुधवार को शिवसेना चीफ उद्धव ठाकरे से उनके घर मातोश्री में मिलेंगे। ऐसा माना जा रहा है कि इस बैठक को ठाकरे को मानने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। बता दें कि पिछले साल से भाजपा और शिवसेना के बीच मनमुटाव चल रहा है। दोनों के बीच सबसे ज्यादा खींचतान पालघर लोकसभा उपचुनाव के दौरान देखने को मिली। वह पहले ही 2019 का चुनाव भाजपा से अलग होकर लड़ने की बात कह चुकी है। उधर, राकांपा चीफ शरद पवार ने शिवसेना को अगला आम चुनाव साथ लड़ने का न्योता दिया है।

    शिवसेना को भी साथ आने का दिया ऑफर

    - राकांपा अध्यक्ष शरद पवार ने एनडीए की सहयोगी शिवसेना को साथ आने का ऑफर दिया है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी भले ही पालघर उपचुनाव जीत गई हो, लेकिन बीवीए, शिवसेना और लेफ्ट के वोट एक साथ मिला लिए जाएं तो ये वोट बीजेपी को मिले वोट से कहीं ज्यादा हैं। उन्होंने कहा है कि बीजेपी विरोधियों को जनता का मूड देखते हुए साथ आने की जरूरत है।

    - बता दें कि हाल के भंडारा-गोंदिया लोकसभा के उपचुनाव सीट पर राकांपा ने शानदार जीत दर्ज की है।


    'सूत्रधार' बनने के लिए तैयार हैं पवार
    - एनसीपी प्रमुख पवार ने कहा है कि हालिया उपचुनावों में बीजेपी का खराब प्रदर्शन कोई छोटी चीज नहीं है। उन्होंने बीजेपी के खिलाफ विपक्षी पार्टियों को एक साथ आने को कहा है।
    - पवार इन सभी दलों को एकसाथ एक मंच पर लाने के लिए ‘सूत्रधार’ की भूमिका निभाने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि अगले साल लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी के खिलाफ समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करने में उन्हें खुशी होगी।

    फिलहाल देश में 1977 जैसे हालात

    - उन्होंने कहा- "देश में 1977 जैसे हालात है, जब विपक्षी दलों के गठबंधन ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल कर दिया था। पहले भी ऐसा होता रहा है, जब-जब उपचुनावों में मिली हार का नतीजा उस समय की मौजूदा सरकार की हार के रूप में निकला।"

    - उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत मौजूदगी रखने वाले दलों जैसे कि केरल में लेफ्ट, कर्नाटक में जेडीएस, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र में कांग्रेस, आंध्र प्रदेश में टीडीपी, तेलंगाना में टीआरएस, पश्चिम बंगाल में टीएमसी और महाराष्ट्र में एनसीपी को एक आम सहमति बनाने की जरूरत है।

    2014 में क्या स्थिति थी
    - महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें हैं। 2014 में इनमें से भाजपा को 23 और शिवसेना को 18 सीटें मिली थीं। राकांपा को 4, कांग्रेस को 2 और अन्य के खाते में एक सीट गई थी।

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    शरद पवार ने कहा- देश में 1977 जैसे हालात है, जब विपक्षी दलों के गठबंधन ने इंदिरा गांधी को सत्ता से बेदखल कर दिया था। (फाइल)
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