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औरंगाबाद हिंसा मामला: शिवसेना और एमआईएम पार्षद को तीन दिन की पुलिस कस्टडी

अब तक 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो के आधार पर दंगाइयों की पहचान की जा रही है।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - May 16, 2018, 11:32 AM IST

  • औरंगाबाद हिंसा मामला: शिवसेना और एमआईएम पार्षद को तीन दिन की पुलिस कस्टडी
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    शिवसेना विधायक और एमआईएम पार्षदों पर हिंसा में शामिल होने का आरोप है
    • शहर में हिंसा के बीच उपद्रवियों ने 25 दुकानों व 100 से अधिक वाहनों को फूंक दिया था
    • पथराव में 15 पुलिसकर्मी भी जख्मी हो गए थे

    औरंगाबाद. महाराष्ट्र के औरंगाबाद में 11 और 12 मई को हुई हिंसा के आरोप में स्थानीय शिवसेना पार्षद राजेंद्र जंजाल और मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन (MIM) के पार्षद और औरंगाबाद महानगरपालिका के विरोधी पक्ष नेता फिरोज खान को अरेस्ट किया है। दोनों को मंगलवार देर रात आईपीसी की धारा 143,147,150,435,436 के तहत हिरासत में लिया गया था।

    शिवसेना पार्षद पर हिंसा में शामिल होने का आरोप
    - शिवसेना पार्षद पर आरोप है कि वायरल हुए वीडियो में जो शख्स राजाबाजार इलाके में गाड़ियों को आग लागाते दिखाई दे रहा है वो यही है। आरोप यह भी है कि जंजाल के साथ उनके समर्थकों ने भी कई गाड़ियों में आग लगाई।
    - पुलिस ने शिवसेना पार्षद राजेंद्र जंजाल को जिला अदालत में पेश किया जहां से उन्हें 18 मई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।

    एमआईएम पार्षद ने किया सरेंडर
    - मजलिसे इत्तेहादुल मुसलमीन (MIM) के पार्षद फिरोज खान ने मंगलवार को सिटी पुलिस स्टेशन मे सरेंडर किया, जिसके बाद उन्हें अरेस्ट कर लिया गया।
    - पुलिस डीसीपी विनायक ढाकणे के मुताबिक पुलिस की जांच में पार्षद फिरोज खान के खिलाफ दंगों में शामिल होने के कई सबूत मिले हैं। वहीं एमआईएम विधायक इम्तियाज जलील का दावा है कि उनके पार्टी के पार्षद को बेवजह सताया जा रहा है।
    - गिरफ्तार करने के बाद खान को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 3 दिन की पुलिस कस्टडी में भेजा गया है।

    इस मामले में अबतक 70 लोग अरेस्ट
    - 11 और 12 मई को औरंगाबाद के गांधीनगर, राजा बाजार और शाहगंज पानदरीबा इलाकों हुई हिंसा में 2 लोगों की जानें गई थी, वहीं 60 से 70 लोग घायल हुए थे। दंगाईयों ने कई दुकानें और गाड़ियों में आग लगा दी थी।
    - जिसके बाद अब तक 70 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। सीसीटीवी और मोबाइल वीडियो के आधार पर दंगाइयों की पहचान की जा रही है।

    ऐसे शुरू हुआ विवाद
    - पिछले करीब एक हफ्ते से महानगर पालिका रविवार बाजार से मोती कारंजा के बीच अवैध नल कनेक्शन काटने की मुहिम चला रही है। कई धार्मिक स्थलों के भी नल कनेक्शन भी काटे गए।
    - एक धर्म विशेष से जुड़े लोगों का आरोप है कि उन्हें जान बूझकर निशाना बनाया जा रहा है। इसी बात को लेकर शुक्रवार देर रात दो गुटों में विवाद हो गए। वे तलवारें लेकर सड़कों पर आ गए। अचानक दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया।
    - दोनों समुदायों के बीच शनिवार को भी हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। उपद्रवियों ने 25 दुकानों व 100 से अधिक वाहनों को फूंक दिया था।

    इंटरनेट सेवा बहाल
    - औरंगाबाद पुलिस के मुताबिक, पत्थरबाजी में घायल एसीपी गोवर्धन कोलेकर की तबियत में कोई सुधार नहीं होने के कारन उन्हे मुंबई के बॉम्बे हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है।
    - मंगलवार सुबह इंटरनेट सेवाओं को बहाल कर दिया गया। शहर में लगाई गई निषेधाज्ञा हटा दी गई है। अधिकारी ने बताया कि स्थानीय पुलिस के अलावा राज्य रिजर्व पुलिस बल की सात बटालियन हिंसा प्रभावित क्षेत्र में तैनात की गई हैं।
    - अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बिपिन बिहारी ने शहर में हालात का जायजा लेने के बाद यह स्वीकार किया कि पुलिस हिंसा पर लगाम लगाने और उसे फैसले से रोकने में नाकाम रही और वह दंगाईयों के खिलाफ कार्रवाई करने में भी असफल रही।

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    शनिवार को औरंगाबाद में हुई हिंसा में 2 लोगों की मौत हुई थी।
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