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पालघर लोकसभा सीट पर वोटों की गिनती में गड़बड़, जरूरत पड़ी तो अदालत जाएंगे: उद्धव

चुनाव आयोग ने पालघर में नतीजों का ऐलान ना किए जाने की शिवसेना की मांग ठुकरा दी।

Dainikbhaskar.com | Last Modified - Jun 01, 2018, 07:45 AM IST

  • पालघर लोकसभा सीट पर वोटों की गिनती में गड़बड़, जरूरत पड़ी तो अदालत जाएंगे: उद्धव
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    गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शिवसेना चीफ ऊद्धव ठाकरे।

    मुंबई. लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना प्रमुख ऊद्धव ठाकरे ने गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ऊद्धव ने पालघर सीट पर हार के बाद कहा कि यहां मतगणना में धांधली हुई है, ऐसे में यहां नतीजों की घोषणा ना की जाए। शिवसेना चीफ ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनकी पार्टी अदालत भी जाएगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने शिवसेना की मांग ठुकरा दी और भाजपा प्रत्याशी को जीत का सर्टिफिकेट दिया। यहां शिवसेना कैंडिडेट श्रीनिवास वांगा हारे हैं। इन चुनावों को लेकर दोनों दलों के बीच कटुता खुलकर सामने आ गई थी।

    'चुनाव पारदर्शिता के साथ नहीं हुए'

    - ऊद्धव ने कहा, ‘‘चार साल में इस सरकार ने बहुमत गंवा दिया है। चुनाव पारदर्शिता के साथ नहीं हुए। पालघर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में शिवसेना ने अलग चुनाव लड़ा। वहां सांसद के परिवार को न्याय देने के लिए शिवसेना ने यह चुनाव लड़ा। शिवसेना यहां पहली बार खड़ी थी। 2014 में जिस सीट पर भाजपा लाखों वोटों से जीती थी, आज उसकी जीत हजार वोटों के अंतर पर सिमट गई।’’

    'जनता ने योगीजी की मस्ती उतार दी'

    - ‘‘फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में याेगी की सत्ता उल्टी हो गई। योगी ने शिवाजी महाराज का अपमान किया था। उस अपमान पर भाजपा ने एक शब्द नहीं बोला। क्या भाजपा को शिवाजी का अपमान मान्य था? मतदान के दिन ईवीएम में गड़बड़ियां थीं। क्या वोटिंग की प्रक्रिया मैनेज होती है? योगी अपने घर में चुनाव हार रहे हैं और यहां (महाराष्ट्र) प्रचार करने आ रहे हैं। जनता ने योगी जी की मस्ती उतार दी है।’’

    'पालघर में वोटिंग के दिन पैसे बंटे'

    - ‘‘ये बताया गया कि गर्मी के चलते ईवीएम ने काम नहीं किया। चुनाव आयोग को क्या देश के मौसम के बारे में नहीं पता? अगले साल क्या आप इसे आईपीएल की तरह मानकर करेंगे। जो चुनाव आयोग हम पर बंदिशें लगाता है तो वे ऐसी दलीलें कैसे दे सकता है?’’
    - ‘‘चुनाव आयोग का भी चयन ना हो, चुनाव हो। क्योंकि पालघर में जो हुआ, उससे लगता है कि जिसकी सरकार होती है, मामला उसके पक्ष में जाता दिखता है। मतदान के दिन लोगों को पैसे बांटते हुए पकड़ा गया। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। जो लोग पकड़े गए, वे भाजपा कार्यकर्ताओं का नाम ले रहे थे। लेकिन जांच नहीं हुई।’’

    'क्या चुनाव में भी दूसरे राज्यों से अफसर बुलाएं'
    - ‘‘भाजपा के विजयी उम्मीदवारी के साथ वे कार्यकर्ता खुलेआम दिख रहे थे। विजयी उम्मीदवार को वे ही कंधे पर उठा रहे थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि चुनाव अधिकार कौन थे? मुख्यमंत्री ने ही अगर उन्हें नियुक्त किया है तो क्या फायदा? जैसे क्रिकेट में अंपायर दूसरे देशों के होते हैं तो क्या अब चुनावों में भी दूसरे राज्यों के अफसर बुलाएं जाएं?’’
    - ‘‘राजनाथ ने आज कहा कि लंबी छलांग लगाने के लिए पीछे जाना पड़ता है। लेकिन पता नहीं ये लोग कितने कदम पीछे जाने वाले हैं।’’

    चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे

    सीटइस बार कौन जीतापिछली बार कौन जीता
    कैरानातबस्सुम हसन, रालोदहुकुम सिंह, भाजपा
    पालघरराजेंद्र गावित, भाजपाचिंतामण वनगा, भाजपा
    भंडारा-गोंदियामधुकर कुकड़े, एनसीपीनाना पटोले, भाजपा
    नगालैंडतोखेयो येपथोमी, एनडीपीपी अभी आगे चल रहे हैंनेफ्यू रियो, एनपीएस

    10 विधानसभा सीट: 3 पर कांग्रेस, 2 पर झामुमो, 1-1 सीट सीपीएम, राजद, भाजपा, सपा और टीएमसी ने जीती

    सीटइस उपचुनाव में कौन जीतापिछली बार कौन जीता
    जोकीहाट, बिहारशाहनवाज आलम, राजदसरफराज आलम, जदयू
    गोमिया, झारखंडबबीता देवी, झामुमोयोगेन्द्र प्रसाद, झामुमो
    सिल्ली, झारखंडसीमा महतो, झामुमोअमित महतो, झामुमो
    चेंगन्नूर, केरलसजी चेरियन, सीपीएमरामचंद्रन नायर, सीपीएम
    पलूस कडेगांव, महाराष्ट्रविश्वजीत कदम, कांग्रेसपतंगराव कदम, कांग्रेस
    नूरपुर, उत्तर प्रदेशनईमुल हसन, सपालोकेन्द्र सिंह चौहान, भाजपा
    महेशतला, प.बंगालदुलाल दास, टीएमसीकस्तूरी दास, टीएमसी
    थराली, उत्तराखंडमुन्नी देवी, भाजपामगन लाल शाह, भाजपा
    शाहकोट, पंजाबहरदेव सिंह, कांग्रेसअजीत सिंह कोहर, अकाली दल
    अंपाती, मेघालयमियानी डी शीरा, कांग्रेसमुकुल संगमा, कांग्रेस

    आगे की स्लाइड में पढ़ें- गठबंधन टूटा तो शिवसेना-भाजपा दोनों को नुकसान: विशेषज्ञ

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    पालघर लोकसभा सीट पर चुनाव के दौरान भाजपा और शिवसेना की कटुता खुलकर सामने आ गई थी।

    गठबंधन टूटा तो शिवसेना-भाजपा दोनों को नुकसान: विशेषज्ञ

    - विशेषज्ञ कहते हैं कि गठबंधन टूटा तो दोनों की संयुक्त सीटों का आंकड़ा 41 से घटकर 25 पर आ सकता है। यानी कुल 16 सीटें सीधे प्रभावित होंगी। इसका फायदा एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन को होगा। गठबंधन को लेकर फिलहाल भाजपा ज्यादा सतर्कता बरतती दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस गठबंधन को बचाने के हर संभव प्रयास करते नजर आ रहे हैं।

    - स्वाभिमानी शेतकरी संगठन सांसद राजू शेट्टी ने कुछ दिन पहले कहा था, शिवसेना-भाजपा साथ नहीं रहे तो फायदा शिवसेना को ही होगा। शिवसेना का अांकड़ा 25 तक जा सकता है। हालांकि, गठबंधन तोड़ने का नुकसान भाजपा की तरह शिवसेना को भी हो सकता है। गठबंधन का फैसला विदर्भ की 10 में से 8, मराठवाड़ा की 8 में से 4, पश्चिम महाराष्ट्र की 10 में से 9 और उत्तर महाराष्ट्र की सभी सीटों के परिणाम प्रभावित करेगा।

    #महाराष्ट्र में बड़े और प्रभावशाली नेताओं के क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण

    विदर्भ: बीजेपी-सेना का गढ़

    - विदर्भ में भाजपा के 6 और शिवसेना के 4 सांसद हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस यहीं से हैं। भाजपा ने विदर्भ को अलग राज्य बनाने का आश्वासन दिया था। इसलिए वह मजबूत हुई। शिवसेना इसके विरोध में है। यवतमाल-वाशिम शिवसेना के गढ़ हैं। नागपुर गडकरी की पक्की सीट है।

    मराठवाड़ा: बीजेपी कमजोर हुई
    - पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण (कांग्रेस) और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रावसाहब दानवे यहीं से सांसद हैं। लातूर पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का गढ़ है। यहां उनके निधन के बाद बीजेपी मजबूत हुई थी, लेकिन बीड़ में गोपीनाथ मुंडे के निधन के बाद कमजोर हुई है। गठबंधन नहीं हुआ तो बीजेपी के लिए मुश्किल होगी।

    पश्चिम: मोदी लहर में भी पवार का प्रभाव रहा
    - यह शरद पवार के प्रभाव वाला क्षेत्र है। शेष महाराष्ट्र की तुलना में अधिक समृद्ध है। 2014 में मोदी लहर के बावजूद 10 में से 4 सीटें एनसीपी को मिली थीं। इसमें पवार की बेटी सुप्रिया सुले भी हैं। जानकार मानते हैं कि अब भाजपा-शिवसेना मजबूत हुए हैं। गठबंधन नहीं हुआ, तो एनसीपी को फायदा हो सकता है।

    उत्तर: खड़से और भुजबल का दबदबा, सेना भी तैयार
    - पूर्व मंत्री एकनाथ खड़से का प्रभाव, लेकिन पार्टी से उनकी नाराजगी से भाजपा को नुकसान हो सकता है। धुलिया रक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष भामरे का क्षेत्र है। वे क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाने में नाकाम रहे हैं। छगन भुजबल की वजह से नासिक में एनसीपी मजबूत। शिवसेना भी मजबूत हुई है। कांग्रेस का ज्यादा अस्तित्व नहीं हैै।

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