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क्या पालघर में हारने के बाद बीजेपी का दामन छोड़ सकती है शिवसेना

पालघर सीट दोनों पार्टियों के लिए नाक की लड़ाई बन गई थी।

Dainik Bhaskar

May 31, 2018, 04:51 PM IST
गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस

मुंबई. लोकसभा और विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के बाद शिवसेना प्रमुख ऊद्धव ठाकरे ने गुरुवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ऊद्धव ने पालघर सीट पर हार के बाद कहा कि यहां मतगणना में धांधली हुई है, ऐसे में यहां नतीजों की घोषणा ना की जाए। शिवसेना चीफ ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो उनकी पार्टी अदालत भी जाएगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने शिवसेना की मांग ठुकरा दी और भाजपा प्रत्याशी को जीत का सर्टिफिकेट दिया। यहां शिवसेना कैंडिडेट श्रीनिवास वांगा हारे हैं। इन चुनावों को लेकर दोनों दलों के बीच कटुता खुलकर सामने आ गई थी।

'चुनाव पारदर्शिता के साथ नहीं हुए'

- ऊद्धव ने कहा, ‘‘चार साल में इस सरकार ने बहुमत गंवा दिया है। चुनाव पारदर्शिता के साथ नहीं हुए। पालघर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में शिवसेना ने अलग चुनाव लड़ा। वहां सांसद के परिवार को न्याय देने के लिए शिवसेना ने यह चुनाव लड़ा। शिवसेना यहां पहली बार खड़ी थी। 2014 में जिस सीट पर भाजपा लाखों वोटों से जीती थी, आज उसकी जीत हजार वोटों के अंतर पर सिमट गई।’’

'जनता ने योगीजी की मस्ती उतार दी'

- ‘‘फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में याेगी की सत्ता उल्टी हो गई। योगी ने शिवाजी महाराज का अपमान किया था। उस अपमान पर भाजपा ने एक शब्द नहीं बोला। क्या भाजपा को शिवाजी का अपमान मान्य था? मतदान के दिन ईवीएम में गड़बड़ियां थीं। क्या वोटिंग की प्रक्रिया मैनेज होती है? योगी अपने घर में चुनाव हार रहे हैं और यहां (महाराष्ट्र) प्रचार करने आ रहे हैं। जनता ने योगी जी की मस्ती उतार दी है।’’

'पालघर में वोटिंग के दिन पैसे बंटे'

- ‘‘ये बताया गया कि गर्मी के चलते ईवीएम ने काम नहीं किया। चुनाव आयोग को क्या देश के मौसम के बारे में नहीं पता? अगले साल क्या आप इसे आईपीएल की तरह मानकर करेंगे। जो चुनाव आयोग हम पर बंदिशें लगाता है तो वे ऐसी दलीलें कैसे दे सकता है?’’
- ‘‘चुनाव आयोग का भी चयन ना हो, चुनाव हो। क्योंकि पालघर में जो हुआ, उससे लगता है कि जिसकी सरकार होती है, मामला उसके पक्ष में जाता दिखता है। मतदान के दिन लोगों को पैसे बांटते हुए पकड़ा गया। उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई। जो लोग पकड़े गए, वे भाजपा कार्यकर्ताओं का नाम ले रहे थे। लेकिन जांच नहीं हुई।’’

'क्या चुनाव में भी दूसरे राज्यों से अफसर बुलाएं'
- ‘‘भाजपा के विजयी उम्मीदवारी के साथ वे कार्यकर्ता खुलेआम दिख रहे थे। विजयी उम्मीदवार को वे ही कंधे पर उठा रहे थे। ऐसे में सवाल यह उठता है कि चुनाव अधिकार कौन थे? मुख्यमंत्री ने ही अगर उन्हें नियुक्त किया है तो क्या फायदा? जैसे क्रिकेट में अंपायर दूसरे देशों के होते हैं तो क्या अब चुनावों में भी दूसरे राज्यों के अफसर बुलाएं जाएं?’’
- ‘‘राजनाथ ने आज कहा कि लंबी छलांग लगाने के लिए पीछे जाना पड़ता है। लेकिन पता नहीं ये लोग कितने कदम पीछे जाने वाले हैं।’’

चार लोकसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजे

सीट इस बार कौन जीता पिछली बार कौन जीता
कैराना तबस्सुम हसन, रालोद हुकुम सिंह, भाजपा
पालघर राजेंद्र गावित, भाजपा चिंतामण वनगा, भाजपा
भंडारा-गोंदिया मधुकर कुकड़े, एनसीपी नाना पटोले, भाजपा
नगालैंड तोखेयो येपथोमी, एनडीपीपी अभी आगे चल रहे हैं नेफ्यू रियो, एनपीएस

10 विधानसभा सीट: 3 पर कांग्रेस, 2 पर झामुमो, 1-1 सीट सीपीएम, राजद, भाजपा, सपा और टीएमसी ने जीती

सीट इस उपचुनाव में कौन जीता पिछली बार कौन जीता
जोकीहाट, बिहार शाहनवाज आलम, राजद सरफराज आलम, जदयू
गोमिया, झारखंड बबीता देवी, झामुमो योगेन्द्र प्रसाद, झामुमो
सिल्ली, झारखंड सीमा महतो, झामुमो अमित महतो, झामुमो
चेंगन्नूर, केरल सजी चेरियन, सीपीएम रामचंद्रन नायर, सीपीएम
पलूस कडेगांव, महाराष्ट्र विश्वजीत कदम, कांग्रेस पतंगराव कदम, कांग्रेस
नूरपुर, उत्तर प्रदेश नईमुल हसन, सपा लोकेन्द्र सिंह चौहान, भाजपा
महेशतला, प.बंगाल दुलाल दास, टीएमसी कस्तूरी दास, टीएमसी
थराली, उत्तराखंड मुन्नी देवी, भाजपा मगन लाल शाह, भाजपा
शाहकोट, पंजाब हरदेव सिंह, कांग्रेस अजीत सिंह कोहर, अकाली दल
अंपाती, मेघालय मियानी डी शीरा, कांग्रेस मुकुल संगमा, कांग्रेस

आगे की स्लाइड में पढ़ें- गठबंधन टूटा तो शिवसेना-भाजपा दोनों को नुकसान: विशेषज्ञ

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