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सोलर एनर्जी से चलता है एशिया का सबसे बड़ा रसोईघर, डेढ़ करोड़ श्रद्धालु सालभर में यहां से ले चुके हैं प्रसाद

सोलर कुकिंग सिस्टम से चलने वाले इस रसोईघर को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है।

नवनाथ दिघे | Last Modified - Apr 09, 2018, 02:29 AM IST

  • सोलर एनर्जी से चलता है एशिया का सबसे बड़ा रसोईघर, डेढ़ करोड़ श्रद्धालु सालभर में यहां से ले चुके हैं प्रसाद
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    दिनभर में 21 घंटों तक चलती है यह रसोई। 50 हजार श्रद्धालु रोज लेते हैं प्रसाद।

    शिर्डी. महाराष्ट्र में नासिक के शिर्डी का साई प्रसादालय। यहां हर दिन करीब 50 हजार श्रद्धालु मुफ्त में महाप्रसाद का लाभ लेते हैं। साई संस्थान का यह रसोईघर एशिया का सबसे बड़ा है। यह पूरी तरह सोलर एनर्जी पर आधारित है। साई समाधि के शताब्दी वर्ष के रूप में 2017 में अब तक डेढ करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने यहां प्रसाद लिया है। एक साथ 5 हजार लोग बैठकर लेते हैं प्रसाद...

    लगातार 21 घंटों तक चलने वाले इस रसोईघर को सोलर कुकिंग सिस्टम का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। इस रसोईघर की खासियत यह है कि यहां अन्नदान पूरी तरह मुफ्त में दिया जाता है। साथ ही स्वच्छता, स्वाद और बेहतरीन रख-रखाव के साथ 5 हजार भक्त एक साथ डायनिंग हॉल में बैठकर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं।

    साई प्रसादालय का रसोई अंतरराष्ट्रीय मापदंडों पर बना है। यहां का कीचन अत्याधुनिक है। इसमें सोलर स्टीम कूकर, एलपीजी गैस, शुद्ध पानी के लिए आरओ प्लांट, ऑनलाइन चिक्की यूनिट, सब्जी और ड्रायफूड को रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज भी बनाया गया है। थालियों की सफाई के लिए डिश वाशिंग मशीन भी लगाई गई है। सब्जी काटने के लिए वेजीटेबल प्रोसेसर लगाया गया है। यहां बचे हुए खाने से गैस निर्माण संयंत्र भी लगाया गया है।

    रोचक फैक्ट -


    - दिनभर में 21 घंटों तक चलती है यह रसोई।
    - 50 हजार श्रद्धालु रोज लेते हैं प्रसाद।
    - 40 करोड़ रु. खर्च होता है सालाना यहां।

    प्रसाद के साथ हलवा-बर्फी - यहां रसोई में रोजाना मिलने वाले प्रसाद में नियमित तौर पर जो परोसा जाता है, उसमें चपाती, चावल, दाल, करी, दलहन, एक हरी पत्तेदार सब्जी दी जाती है। मीठे प्रसाद के रूप में हलवा और बर्फी परोसी जाती है।

    एक घंटे में 25 हजार रोटियां -इस रसोईघर में रोजाना 22 क्विंटल गेहूं का आटा, 30 क्विंटल चावल, 500 किलो दाल और सब्जी का इस्तेमाल होता है। साथ ही यहां रोटी बनाने की मशीन है जो एक घंटे में 25 हजार रोटियां बनाती हैं।

    विशाल डायनिंग हॉल भी है - इस रसोईघर में एक विशाल डायनिंग हॉल है जहां 5 हजार श्रद्धालु रोजाना एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण कर सकते हैं। करीब 3 हजार स्वयंसेवी जो मंदिर परिसर में रहते हैं वे भी यहां प्रसाद ग्रहण करते हैं।

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    सोलर कुकिंग सिस्टम से चलने वाले इस रसोईघर को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला है।
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