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पुणे. पुणे के ग्रामीण इलाके से आने वाली स्वयंसिद्धा विजया पवार ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर प्रधानमंत्री का ट्विटर हैंडल संभाला। स्वयंसिद्धा ने कहा, 'पीएम के एक पोस्ट से मेरी और मेरे साथ काम करने वाली महिलाओं की जिंदगी बदल गई। हम 20 साल से स्ट्रगल कर रहे थे। पीएम ने हमारा सम्मान बढ़ाया है।'
स्वयंसिद्धा की बंजारा हस्तकला के क्षेत्र में विशेष पहचान है। उन्होंने बताया- बंजारा हस्तकला हमारे क्षेत्र की पहचान है। मैं छोटी से बड़ी इसी में ही हुई हूं। वैसे तो यह कला यहां मां से बेटी को मिलने वाली विरासत है। ससुराल में सास से मेरे पति ने इसे सीखा, फिर उनसे मैंने सीखा। जब इस काम में रुचि बढ़ी तो इसी पर फोकस किया। 2000 से 2004 तक ट्रेडिशनल चीजों का डुप्लीकेट बनाया। 2004 में एनजीओ रजिस्टर कराया और गांव की सभी महिलाओं को ट्रेनिंग दी। इसके बाद जिला स्तर पर महिलाओं को जोड़ा।
अब तक 450 महिलाओं को दे चुकी हैं रोजगार
विजया बताती हैं कि भारत सरकार के वस्त्र उद्योग मंत्रालय की अंबेडकर हस्तशिल्प योजना के तहत उनके एनजीओ ने 682 महिलाओं को 5 साल तक ट्रेनिंग दी। यहां उन्होंने काम के साथ ये भी सिखाया कि इस क्षेत्र में रोजगार कैसे कर सकते हैं। इस काम को सीखकर आज 450 महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं। आज ये महिलाएं देश भर में लगने वाली प्रदर्शनी- चाहे वो खादी हो या महालक्ष्मी सरस या सूरजकुंड और दिल्ली सब जगह जाती हैं। आज ये खुद का बिजनेस कर रही हैं।
पीएम ने ट्वीट कर स्वयंसिद्धा के काम की जानकारी दी थी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा था कि इस महिला दिवस पर मैं अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स उन महिलाओं को समर्पित कर दूंगा, जिनकी जिंदगी और काम हम सभी को प्रेरित करता है। इससे ये महिलाएं लाखों लोगों का हौसला बढ़ाने में मदद कर सकेंगी। अगर आप भी ऐसी महिला हैं या दूसरों के लिए प्रेरणा बनने वाली महिलाओं के बारे में जानती हैं तो उनकी कहानी #SheInspiresUs पर साझा करें। इस हैशटैग के साथ महिलाएं अपनी कहानी साझा करेंगी।





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