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जिला अस्पताल के तीन वार्डों में 59 पलंगों पर 172 मरीज, शिशु वार्ड में 14 बेड पर 71 बच्चे भर्ती

इस समय जिला अस्पताल के हाल बेहाल हैं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि आंखों देखी हकीकत है। बुधवार को यहां तीन वार्डों में 59...

Danik Bhaskar | Sep 13, 2018, 02:01 AM IST
इस समय जिला अस्पताल के हाल बेहाल हैं। ये हम नहीं कह रहे बल्कि आंखों देखी हकीकत है। बुधवार को यहां तीन वार्डों में 59 पलंग पर 172 मरीज भर्ती मिले। इनमें भी शिशु वार्ड जहां इन्फेक्शन फैलने का खतरा बच्चों में अधिक रहता है, वहां तो हालात और भी बदतर थे। यहां 14 पलंगों पर 71 बच्चे भर्ती किए गए हैं। आप सब लोगों को पढ़ने में आश्चर्य जरूर होगा लेकिन यह जिला अस्पताल की हकीकत है जहां मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बिस्तर की क्षमता कम होने के कारण पलंग तक नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में एक-एक बेड पर तीन या चार मरीज तक भर्ती हैं। एक पलंग पर एक साथ इतने मरीजों के भर्ती होने की वजह से खुद की बीमारी से लड़ रहे मरीजों को दूसरे मरीज की बीमारी फैलने का खतरा लगा रहता है। क्योंकि अस्पताल में जो मरीज भर्ती हैं, उनमें पेटदर्द, उल्टी, सर्दी, जुकाम, वायरल आदि के मरीज अधिक हैं।

बॉटल और इंजेक्शन लगाकर वापस ले जाते हैं बच्चों को: शिशु वार्ड में पलंगों की तुलना में बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण परिजनों को अधिक परेशानी हो रही है। शहर सहित आसपास के लोग अपने बच्चों को बॉटल और इंजेक्शन लगवाकर वापस ले जाते हैं तो बाहर ग्रामीण क्षेत्र से आए लोग रात को बरामदे में ही सो जाते हैं। सुबह जब डॉक्टर का राउंड होता है उस दौरान एक पलंग पर चार माताएं अपने शिशुओं को गोद में लेकर बैठी रहती हैं।

पलंग नहीं होने पर कई बच्चों को परिजन बाहर बरामदे में लिटाकर करवा रहे इलाज

बुधवार को 950 की ओपीडी में बंद हो गया सर्वर, मरीजों में ही बन गई विवाद की स्थिति

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पुरुष और महिला वार्ड में जितने पलंग, उससे दोगुने मरीज भर्ती हैं

शिशु वार्ड की तरह की दूसरे वार्डों में भी मरीजों की संख्या पलंगों की तुलना में अधिक हैं। जब हमने दूसरे वार्डों की पड़ताल की तो पुरुष वार्ड में 23 पलंग पर 45 मरीज भर्ती हैं जबकि महिला वार्ड में तो मात्र 22 पलंग हैं जिन पर 56 महिलाएं भर्ती मिली। इसी तरह मेटरनिटी वार्ड में 40 पलंग पर 50 महिलाएं भर्ती थीं। इन वार्डों में कुछ मरीज तो दूसरे पलंग पर भर्ती मिले जबकि कुछ जमीन पर बिस्तर बिछाकर इलाज करवाते हुए नजर आए।

खतरा भी: एक पलंग पर तीन से अधिक मरीज होने पर फैल सकता है इन्फेक्शन

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950 की ओपीडी, सर्वर बंद होने पर मरीजों में विवाद

मंगलवार को जिला अस्पताल में कुल 945 लोग ओपीडी में परीक्षण कराने के लिए पहुंचे। वहीं बुधवार को सुबह से ही सर्वर बंद हो गया। इससे मरीजों के पर्चे नहीं बन सके। बाहर सैकड़ों की संख्या में मरीजों की कतार पर्चा बनवाने का इंतजार करती रही तो डॉक्टर मरीजों के इंतजार में फ्री बैठे रहे। करीब 11.30 बजे सर्वर शुरू हुआ तब पर्चे बनना शुरू हुए। इस दौरान कतार में खड़े लोगों की जल्दी पर्चा बनवाने के लिए विवाद भी हो गया।

डॉक्टरों ने सर्वर बंद होने पर वैकल्पिक व्यवस्था मांगी

इधर ओपीडी में ड्यूटी देने वाले डॉक्टरों ने सर्वर बंद होने पर वैकल्पिक इंतजाम कराने की मांग की है। डॉक्टरों का कहना है कि सर्वर बंद होने पर ऑन लाइन पर्चे नहीं बनते तो मरीजों की बाहर कतार लग जाती है लेकिन अंदर वे मरीजों का इंतजार करते रहते हैं। माह में ऐसे कई बार हालात बनने के कारण उनका कहना है कि ऑफ लाइन पर्ची बन जाए जिसको बाद में एंट्री कर ऑनलाइन भी दर्ज कर सकते हैं।