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सिद्धचक्र विधान के अंतिम दिन चढ़ाए 1024 अर्घ्य

एक वर्ष पहले
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मंगलवार को हवन एवं श्रीजी श्री शोभायात्रा के साथ होगा समापन

श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अवसर पर पूजन करते हुए समाज के श्रद्धालु।

शाढ़ौरा| श्री पार्श्व नाथ मंदिर में अष्टान्हिका पर्व के अवसर पर चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के अंतिम दिन सोमवार को 1024 विशेष अर्घ्यों से सिद्ध भगवंतों की आराधना की गई। मंगलवार को हवन एवं विश्व शांति महायज्ञ तथा श्रीजी की शोभायात्रा के साथ अनुष्ठान का समापन होगा।

विधानाचार्य मनोज जैन चौबे ने बताया कि जब तीर्थंकर प्रभु को केवल ज्ञान होता है तब सौधर्म इन्द्र प्रभु की 1008 नामों से स्तुति करता है। तीर्थंकर प्रभु के 1008 लक्षण भी होते हैं उन्हीं 1008 गुणों को प्राप्त करने के लिए हम सबने अंतिम दिन सिद्ध भगवंतों की सहस्त्र नाम के साथ आराधना करते हुए 1024 विशेष अर्घ चढाए।

भगवान की 1008 नामों से स्तुति की गई। इसीलिए आज के इस विधान का नाम सहस्त्र नाम विधान भी है। इस अनुष्ठान में 8 दिनों में कुल 2040 अर्घ्य समर्पित किये गए। भट्टारक श्री शुभ चंद्र जी द्वारा लिखित एवं प्रमाण सागर जी मुनिराज द्वारा प्रणीत इस संस्कृत भाषा के प्राचीन विधान का यहां यह प्रथम आयोजन हुआ है। इसमें श्रद्धालुओं ने अतिशय भक्तिभाव से सम्मिलित होकर पुण्यार्जन किया। आज के अनुष्ठान में मंडल पर आठों दिशाओं में अर्घ्य चढ़ाने व पुण्याहवाचन कलश करने एवं सुबह रिद्धि मंत्रों से शांति धारा करने का सौभाग्य कबूल चंद संजीव कुमार प्रदीप कुमार भारिल्ल परिवार को मिला। मंगलवार को समापन अवसर पर विश्व शांति महायज्ञ, श्रीजी को पालकी में विराजित कर शोभायात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद गुणमाला सिंघई परिवार की ओर से स्नेह भोज का कार्यक्रम रखा गया।
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