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अष्टान्हिका पर्व में सिद्धचक्र महामंडल विधान करने से राजा सहित 700 लोगों का कुष्ठ रोग दूर हो गया था : विधानाचार्य
सिद्धचक्र महामंडल विधान के 7वें दिन 512 अर्घ्य किए समर्पित
विधान के दौरान पूजन करते श्रद्धालु।
शाढ़ौरा| सिद्धचक्र महामंडल विधान को यदि पूर्ण मनोयोग व श्रद्धा भक्ति से किया जाए तो बड़े से बड़े संकट दूर हो जाते है। यह बात पार्श्वनाथ मंदिर में चल रहे सिद्धचक्र विधान के दौरान रविवार को विधानाचार्य मनोज जैन चौबे ने अनुष्ठान का महत्व बताते हुए कही।
उन्होंने बताया कि पुराणों में वर्णन आता है कि एक बार राजा श्रीपाल और उनके 700 साथियों को भयंकर गलित कुष्ठ रोग हो गया था और वह राज्य छोड़कर अपने साथियों के साथ जंगलों में घूम रहे थे। तभी उनकी रानी मैनासुंदरी को एक अवधिज्ञानी मुनिराज के दर्शन हुए और उन्होंने इस रोग के निदान का उपाय पूछा तो उन्होंने अष्टान्हिका पर्व में श्रीसिद्धचक्र महामंडल विधान करने का उपाय बताया। रानी ने पूरे मनोयोग व श्रद्धा भक्ति के साथ यह अनुष्ठान किया तो इसके प्रभाव से राजा श्रीपाल व उनके साथियों का कुष्ट रोग पूर्ण रूप से दूर हो गया और उनकी काया सोने के समान सुंदर हो गई। उक्त महिमा पूर्ण अनुष्ठान के सातवें दिन आज यहां श्रृद्धालुओं ने 512 विशेष अर्घ्यों के साथ सिद्ध भगवंतों की आराधना की। विधानाचार्य मनोज जैन ने बताया कि कोई भी अनुष्ठान हम अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिऐ न करते हुऐ पूर्ण श्रद्धा, भक्ति और विश्वास के साथ करें तो वह अनुष्ठान फलदाई होता है। मंडल पर अष्ट दिशाओं में प्रमुख अर्घ्य और पुण्याहवाचन कलश करने एवं बीजाक्षरों के साथ शांतिधारा करने का सौभाग्य सुनील कुमार सिद्धांत कुमार बांझल परिवार को प्राप्त हुआ। चतुर्दशी का विशेष दिन होने के कारण अनुष्ठान में श्रद्धालुओं की उपस्थिति काफी अधिक रही।
सोमवार को 1024 विशेष अर्घ्यों से होगी आराधना: अनुष्ठान के अंतिम दिन सोमवार को 1024 विशेष अर्घ्यों के साथ सिद्ध भगवंतों की आराधना की जाएगी। मंगलवार को हवन व विश्वशांति यज्ञ के साथ अनुष्ठान का समापन होगा। इस दौरान श्रीजी की शोभा यात्रा भी शहर के प्रमुख मार्गों से निकाली जाएगी।