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बहादुरपुर व पिपरई तहसील बनने से मुंगावली तहसील में बचे मात्र 103 गांव, वकीलों को करना पड़ रहा अप-डाउन

एक वर्ष पहले
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दो नई तहसील बनने से स्टांप वेंडरों का व्यवसाय खत्म, लोगों के कम आने से कार्यालय रहता है सूना

राजस्व विभाग ने जिले में बहादुरपुर और पिपरई तहसील का गठन किया है। मुंगावली ब्लॉक में दो नवीन तहसील बनने से गांव की संख्या घट गई। इससे तहसील कार्यालय में हमेशा सूनापन रहता है। इससे तहसील कार्यालय में बैठे दस्तावेज लेखकों और स्टांप वेंडरों का काम भी खत्म हो गया है। साथ ही वकीलों को भी अलग-अलग तहसील कार्यालय में तारीख के लिए अपडाउन करना पड़ रहा है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मुंगावली तहसील में 252 गांव थे। इनमें से पिपरई और बहादुरपुर तहसील में 149 गांव जाने से मुंगावली तहसील में 103 गांव रह गए हैं। मुंगावली से करीब 15-15 किमी पर दो अलग-अलग तहसील पिपरई और बहादुरपुर बनने से तहसील में सन्नाटा रहता है। वहीं कई महीने से एसडीएम का पद भी रिक्त पड़ा है। इससे तहसील की रौनक गायब हो गई है। तहसील परिसर में बने हॉल में न तो स्टांप वेंडरों का और न ही वकीलों का बैठने का मन कर रहा है। पिछले दो-तीन माह से स्टाम्प वेंडरों की यह हालत हो रही है। स्टांप वेंडरों का सुबह से शाम तक बैठने के बाद भी बोवनी तक नहीं हो पाती है। इसके साथ ही तहसील प्रांगण में लगी चाय नाश्ते की दुकानें भी बंद होने की कगार पर है।

फोटो कॉपी संचालन का दुकान खर्च भी नहीं निकल रहा : तहसील परिसर में चल रही फोटो कॉपी व इससे संबंधित अन्य दुकान संचालक पिछले दो-तीन महीने से दुकानों का खर्च व किराया तक नहीं निकलने के कारण बंद हो गई। तहसील कार्यालय में पहले लोगों की भी भीड़ भाड़ रहती थी। वहीं वर्तमान में तहसील कार्यालय में सूनापन रहता है। तहसील कार्यालय में पदस्थ अधिकारियों की ड्यूटी करीला मेले की व्यवस्थाएं बनाने में लगी हुई है। इससे तहसील कार्यालय में चारों तरफ सन्नाटा छाया है।

पक्षकार भी पशोपेश में : जानकारी नहीं होने पर वह पहले मुंगावली जाते हैं फिर पता लगने पर बहादुरपुर आते हैं

स्टांप वेंडरों का व्यवसाय हो रहा प्रभावित

तहसील कार्यालय के हॉल में स्टांप बेंडर, नोटरी एडवोकेट और वकील बैठते थे। यहां कभी इतनी भीड़ होती थी कि पैर रखने के लिए जगह भी नहीं होती थी। नवीन तहसील बनने से इन लोगों के व्यवसाय पर असर पड़ा है। स्टांप वैंडर राजेश श्रीवास्तव, मुन्नालाल प्रजापति, कमलिसंह, शंकर लाल आदि ने बताया कि अन्य तहसील बनने से यहां का सारा काम लगभग खत्म हो गया है। कार्यालय में दिन भर बैठने के बाद खर्च भी निकालना मुश्किल हो रहा है। इससे उन्हें मजबूरी में अन्य काम की तलाश करना पड़ेगी।

वकीलों और पक्षकारों को हो रही परेशानी

पिपरई के बाद बहादुरपुर सर्किल के यहां से चले जाने पर प्रकरण फाइल बहादुरपुर पहुंच गई हैं। इससे वकीलों को तारीख पेशी करने के लिए अपडाउन करना पड़ता है। इससे उनका सारा समय निकल जाता है। एडवोकेट यशपाल सिंह दांगी, आशीश पटेरिया, इसरार खान, कल्याण सिंह, गोविंद सिंह परिहार आदि ने बताया कि केसों की फाइल बहादुरपुर जाने के कारण उन्हें बस से अप डाउन करने में ही सारा समय निकल जाता है। हम तारीख करने बहादुरपुर जाते हैं। वहीं पक्षकारों को जानकारी नहीं होने पर वह पहले मुंगावली जाते हैं। फिर पता लगने पर बहादुरपुर आते हैं। इससे उन्हें भी परेशानी होती है। पक्षकार रमेश कुमार अथाईखेड़ा से मुंगावली परेशानी पर आए थे। वकील साहब बहादुरपुर चले गए। रमेश कुमार ने बताया कि हमें जानकारी नहीं थी कि हमारी पेशी बहादुरपुर में लगने लगी। वकीलों का कहना है कि पक्षकार भी मेहनताना देने में आनाकानी करते हैं।

पक्षकारों के नहीं आने से खाली पड़ा स्टांप बैंडर कक्ष।

मुंगावली तहसील कार्यालय में अब पसरा रहता है सन्नाटा।
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