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पंचमी का क्षय, आज मनाएंगे शीतला सप्तमी

एक वर्ष पहले
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शहर में शीतला सप्तमी का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। जबकि पंचांगों के अनुसार पंचमी का क्षय होने से पंचमी 13 मार्च को हुई। हालांकि इस दिन किसी ने रंग-गुलाल नहीं खेला। वहीं शनिवार से सभी प्रकार के शुभ कार्यों पर भी एक माह के लिए रोक लग गई। ऐसे सूर्य का कुंभ राशि छोड़कर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश करने के कारण होगा।

पं. किशनलाल मिश्र ने बताया सामान्यत: पंचांग दो सिद्धांत पर आधारित हाेते हैं। एक सूक्ष्म पद्धति और दूसरा गृह लाघव पद्धति। वर्तमान में 95 प्रतिशत पंचांग सूक्ष्म पद्धति पर आधारित है। जिसे तकनीकी रूप से जांचा जा सकता है। शेष 5 प्रतिशत प्राचीन पंचांग ऐसे हैं जो गृह लाघव पद्धति पर आधारित है। जो अनुमानित (लगभग) के सिद्धांत पर आधारित है। सूक्ष्म पद्धति पर आधारित गणना के अनुसार शीतला सप्तमी रविवार को मान्य होगी। सप्तमी रविवार अलसुबह 4.24 बजे प्रारंभ होगी, जो सोमवार की रात्रि 3.18 बजे तक रहेगी। इसी के चलते पंचमी का क्षय हो गया है। इस कारण 13 मार्च को पंचमी मान्य रही। हालांकि रंग-गुलाल किसी ने खेला। 18 मार्च को दशामाता पूजी जाएगी।

सूर्य का मीन में गाेचर किस राशि पर क्या डालेगा प्रभाव

{मेष- मानसिक चिंताएं घेर सकती है। संभल कर रहें।

{वृष- धन संबंधी परेशानी दूर होगी। योजना बना ले।

{मिथुन- तनाव पैदा हो सकता है। नौकरी, व्यापार में तरक्की।

{कर्क- नौकरी में बदलाव। तनाव से राहत मिल सकती है।

{सिंह- संभल कर रहें। धन के लेनदेन में सावधानी बरतें।

{कन्या- आकस्मिक धन लाभ, बच्चों को पढ़ाई में सफलता।

{तुला - करियर में चल रही समस्या का समाधान होगा।

{वृश्चिक - स्वास्थ्य समस्या का समाधान। करियर में सुधार

{धनु- निर्णय सोच समझ कर करें। अपनी योजना उजागर न करें।

{मकर- घर में मांगलिक कार्य होगा। संतान तरक्की करेगी।

{कुंभ- आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। सम्मान मिलेगा।

{मीन - क्रोध पर नियंत्रण रखें। ऐश्वर्य बढ़ेगा।

सूर्य पूरे साल में 12 राशियों में करते हैं भ्रमण

14 मार्च को सूर्य जैसे ही कुंभ राशि को छोड़कर देवगुरु बृहस्पति की राशि मीन में प्रवेश किया और खरमास शुरू हो गया। खरमास में सूर्य का तेज मलीन हो जाता है। सभी प्रकार से शुभ कार्य इस दौरान प्रतिबंधित हो जाते है। सूर्य का मीन राशि में गाेचर सभी राशि के व्यक्तियों को भी प्रभावित करता है। सूर्य पूरे साल में सभी 12 राशियों पर भ्रमण करते हैं। वह एक राशि में लगभग एक माह रहते हैं। देवगुरु बृहस्पति की राशि धनु व मीन राशि में आने पर खरमास या मल मास शुरू हो जाता है।
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