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धर्म की उपयोगिता अपने आप समझ में आती है: मुनिश्री
आज एक संत की जितनी प्रसिद्धि है उससे कहीं अधिक एक स्टार की प्रसिद्धि है। पर कोई संत जितना प्रसन्न है उतना प्रसन्न संतुष्ट एक स्टार हो सकता है नहीं हो सकता। संत को कोई ना जाने तो भी वह प्रसन्न रहता है। धर्म की उपयोगिता अपने आप समझ में आती हैं धर्म और अधर्म दोनों चीजों को समझो। यह धर्म उपदेश बीना में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रमाण सागर जी ने दिए।
उन्होंने कहा कि पुण्य का प्रत्यक्ष फल संतुष्टि और पारंपरिक फल सुख समृद्धि पाप का फल संताप और पारंपरिक फल दुख दारिदृक है उन्हें अपनों से ही भय रहता है। धर्मात्मा को इनकी जरूरत नहीं रहती है। धर्म तुम्हें संतुष्टि देता है धर्म तुम्हें प्रसन्नता आनंद खुशी देता है। धन सम्पन्नता प्रभाव प्रतिष्ठा मान सम्मान से धर्म का सीधा कोई संबंध नहीं है। धर्म तुम्हें धन देता धर्म से तुम्हारी प्रतिष्ठा बढ़ती है सम्मान बढ़ता है ये अवधारणा ठीक नहीं है। धर्म से इनका कोई सीधा संबंध नहीं है इस अवधारणा को बदल देना चाहिए। धर्मसभा के पहले विधायक जजपाल सिंह जज्जी, थूबोन जी कमेटी के उपाध्यक्ष गिरीश अथाईखेड़ा, महामंत्री विपिन सिंघई, प्रचारमंत्री विजय जैन धुर्रा सहित कमेटी के सदस्यों ने मुनिश्री को श्रीफल भेंट कर थूबोनजी आने का निवेदन किया। विधायक श्री जज्जी ने कहा कि थूबोनजी कमेटी और जिले की जनता को आपके दर्शन का लाभ मिले। कुछ दिनों का प्रवास क्षेत्र में हो यही हम सब की विनती है।
मुनिश्री को थूबोनजी आने का निवेदन करते विधायक श्री जज्जी और कमेटी के सदस्य।