रेत के अवैध उत्खनन से इस बार कैथन नदी की धार जनवरी में ही टूटी, दिखने लगे टापू

Ashoknagar News - भास्कर संवाददाता | बहादुरपुर रेत के अवैध उत्खनन के कारण क्षेत्र की सबसे बड़ी कैथन नदी सूखने लगी है। कैथन नदी पर...

Bhaskar News Network

Jan 18, 2019, 02:01 AM IST
Ashoknagar News - mp news this time from the illegal mining of sand this year the edge of the river keith was broken the island began to appear
भास्कर संवाददाता | बहादुरपुर

रेत के अवैध उत्खनन के कारण क्षेत्र की सबसे बड़ी कैथन नदी सूखने लगी है। कैथन नदी पर घाट बमुरिया से कुम्हर्रा तक एक दर्जन से अधिक स्थानों पर रेत निकाली जा रही है। अवैध उत्खनन से नदी के मूल स्वरूप को नुकसान हो रहा है। इसके चलते साल भर पानी से भरपूर रहने वाली नदी अब गर्मी के मौसम से पहले ही सूखने लगी है। जबकि नदी के पानी को रोकने के लिए प्रशासन ने कई प्रयास किए हैं।

इसके बाद भी निरन्तर नदी के क्षरण के पीछे क्षेत्र के एक बड़े असंगठित गिरोह का नदी से रेत निकालकर लगातार बेचना बताया जाता है। हजारों एकड़ कृषि भूमि को सिंचित करने वाली इस नदी में अब गर्मियों के मौसम तक नहाने के लिए भी पानी नहीं बचता। जल्द ही जमीनी स्तर पर नदी को बचाने के प्रयास नहीं किए गए तो वह दिन दूर नहीं जब नदी का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। कई वर्षों से नदी में मछलियां पकड़ने का काम कर रहे मछुआरे बताते हैं कि पहले हाजूखेड़ी की देह और सुमेर गांव के नीचे दत्तया नामक स्थान पर नदी में सात-आठ फीट की मछलियां मिलती थीं, लेकिन अब ढूंढे से मछलियां नहीं मिलतीं। नदी में पाए जाने वाले कई प्रकार के जलीय जीव खत्म हो गए हैं। वहीं गर्मियों के मौसम में जब नदी में पानी कम हो जाता था तो रेत के मैदान निकल आते थे।

कई जगह हो रहा अवैध उत्खनन : घाट बमूरिया से कुम्हर्रा गांव तक नदी के एक दर्जन से अधिक घाटों पर रेत का निकालना जारी है। घाट बमूरिया से मलऊखेड़ी, गोरा, खिरिया, हाजूखेड़ी, खोपरा, बहादुरपुर, सुमेर, बेरखेड़ी, बर्री और कुम्हर्रा तक रोजाना सैकड़ों ट्राली रेत निकाली जा चुकी है। इनमें से गोरा, सुमेर और कुम्हर्रा पर खनिज विभाग की खदानें हैं। इनमें से मात्र गोरा खदान का ही विधिवत आवंटन हुआ है। जबकि कुम्हर्रा और सुमेर खदानों का एग्रीमेंट नहीं हो पाने से यह अभी तक लंबित हैं। गोरा, कुम्हर्रा और सुमेर खदान पर माफिया ने कई बार वोट लगाकर रेत निकाली है। जहां-जहां वोट लगाई गई हैं, वहां अब कई मीटर गहरे गड्ढे हो चुके हैं। हालांकि प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अब वोट से खनन बन्द है।

अवैध उत्खनन से नदी के मूल स्वरूप को हो रहा है नुकसान

एक दर्जन से अधिक स्थानों पर चल रहा रेत का उत्खनन

क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक स्थानों पर रेत का अवैध उत्खनन चल रहा है। इनमें रोजाना 100 से 150 ट्राली रेत निकाली जा रही है। रेत माफियाओं द्वारा 2500 से 3000 रुपए प्रति ट्राली की दर से बेचा जा रहा है। पिछले कुछ सालों से सीमेंट कांक्रीट के निर्माण में वृद्धि होने से काली रेत की मांग बढ़ीी है। नर्मदा सेंड और भसुआ आसानी से उपलब्ध हो जाता है लेकिन उसके दाम रेत की तुलना में दोगुने हैं।

कैथन नदी में चल रहा अवैध उत्खनन।

शासकीय निर्माण कार्यों में होता है रेत का उपयोग

क्षेत्र में सीसी सड़कों, शासकीय भवनों व अन्य निर्माणों में जमकर काली रेत का उपयोग होता है। निर्माण कार्यों का निरीक्षण करने वाले उपयंत्री व अधिकारी भी इस दुरुपयोग पर गंभीर नहीं है। वर्तमान में क्षेत्र में निर्माणाधीन सीसी सड़कों, आंगनबाड़ी भवनों व कैथन नदी के घाट में खुलेआम इसी काली बजरी का उपयोग किया जा रहा है।

मैदानी अमले की कमी से नहीं हो पाती कार्रवाई


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