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भास्कर संवाददाता|आष्टा

भास्कर संवाददाता|आष्टा पश्चिमी देशों में साक्षरता तो है, लेकिन संस्कार नहीं हैं। इसलिए अमेरिका के स्कूलों में...

Danik Bhaskar

Mar 01, 2018, 03:10 AM IST
भास्कर संवाददाता|आष्टा

पश्चिमी देशों में साक्षरता तो है, लेकिन संस्कार नहीं हैं। इसलिए अमेरिका के स्कूलों में विद्यार्थी पिस्तौल लेकर जा रहे हैं। वहां पर अध्ययन-अध्यापन हिंसा की छाया में हो रहा है। यह स्थिति बहुत सोचनीय है कि हम अमेरिका की नकल कर भौतिक समृद्धि हासिल करना चाहते हैं। हमारे देश में मां-बाप अपने बच्चों को बचपन से ही संस्कार देते हैं। बिना इस संस्कार के हमारे देश में व्याप्त गरीबी, अशिक्षा, भेदभाव, सामाजिक उपद्रव और हिंसा से लड़ा नहीं जा सकता।

यह बातें मंगलवार को शहीद भगत सिंह शासकीय महाविद्यालय में प्रमुख वक्ता के रूप में बोलते हुए डॉ. चंद्रा जैन ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि सामाजिक समरसता का मूल मंत्र है कि समाज शिक्षित होकर आगे बढ़े और मनुष्यता को बांटने वाली दीवारों को तोड़ दें। धर्म, भाषा, क्षेत्र, लिंगभेद, संप्रदाय और छुआछूत की दीवारों ने हमारे समाज को जकड़ रखा था।

मन से पशुता नहीं उतरी: कार्यक्रम में हिंदी विभागाध्यक्ष और व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के समन्वयक डॉ. आनंद कुमार सिंह ने कहा कि सभ्यता और संस्कृ ति की हजारों वर्षों की यात्रा के बाद भी अभी मनुष्य ठीक से विकसित नहीं हो सका है। बाहरी आवरण तो उसका सुधर गया है, लेकिन मन से पशुता नहीं उतरी है।

विश्व में हजारों लोग मर रहे हैं

आज पूरे विश्व में हिंसा, उपद्रव, आतंक और उन्माद के कारण हजारों हजार लोग मारे जा रहे हैं । इसके पीछे केवल तकनीकी रूप से उन्नत मनुष्य की बहुत संकरी समझदारी है। सामाजिक समरसता की स्थापना के लिए शिक्षा के द्वारा उसके हृदय को प्रशिक्षित करने की चुनौती ही सबसे बड़ी चुनौती है। संचालन करते हुए डॉ. दीपेश पाठक ने व्यक्तित्व विकास प्रकोष्ठ के कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने मुख्य वक्ता डॉ. चंद्रा जैन का अभिनंदन किया।

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