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जो गैरों का दर्द पीता है उसे ही इंसान कहते हैं

गाय जो केवल दूध ही नहीं देती है बल्कि दूध के रूप में पंचामृत देती है। जो कई बीमारियों को खत्म करने शरीर को स्वस्थ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 04:10 AM IST

गाय जो केवल दूध ही नहीं देती है बल्कि दूध के रूप में पंचामृत देती है। जो कई बीमारियों को खत्म करने शरीर को स्वस्थ रखने के काम आता है। शास्त्रों में आनंद श्रावक का उल्लेख आता है। जिसके अकेले के पास 40 हजार गाय थीं। आज हम एक गाय नहीं पाल सकते हैं। कहते हैं गाय बांधने की जगह नहीं है।

यह बातें महावीर भवन स्थानक में विराजित साध्वी डॉ. चिंतन श्रीजी ने कहीं। उन्होंने कहा कि आपके आलीशान भवनों, बंगलों में कुत्ता बांधने, गाडिय़ों को खड़े करने की जगह है। हमारी संस्कृति गायों को संरक्षण देने की बात कहती है। आचार्य प्रवर व्यसन मुक्ति के प्रणेता 1008 रामलाल जी महाराजश्री के जन्मदिन पर आयोजित गुणानुवाद सभा में साध्वीजी मधु कुंवर ने कहा कि आचार्य श्री रामलाल जी मासा को संयम की प्रेरणा स्वाध्याय से मिली। जब उन्होंने जवाहर किरणावली में अनाथ,सनाथ, वृतांत पढ़ा। उसके बाद ही उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया। आज आचार्यश्री के जन्मदिन पर सभी को यही प्रेरणा लेना चाहिए कि रोजाना स्थानक आए, सामयिक करें और उसमें थोड़ा समय आगमों का स्वाध्याय भी करें। साध्वीश्री चिन्तन श्रीजी ने कहा कि जिसका नेचर अच्छा उसका फ्यूचर अच्छा होता है। अच्छे व्यवहार के कारण आज महावीर विश्व में पूजे जा रहे हैं। आज खादी लोगों को चुभती है। व्यक्ति को घर का आंगन साफ्ट चाहिए, क्या उसकी आत्मा साफ्ट है नहीं। भगवान महावीर को 6-6 माह तक जिसने घोर कष्ट दिए उसके प्रति भी उन्होंने करुणा के भाव रखें। जो गैरों का दर्द पीता है उसे ही इंसान कहते है। आज जो बाढ़ भूकंप या अन्य जो प्राकृतिक आपदाएं घटती आ रही हैं उसके पीछे कत्लखानों में मूक पशुओं की हो रही हत्याएं हैं। उनकी हाय आपदाओं का प्रमुख कारण हैं। श्राविका संघ की अध्यक्ष साधना रांका, सुजाता रुनवाल ने जन्मदिन उत्सव पर भजन प्रस्तुत किया। श्रावक संघ अध्यक्ष लोकेंद्र बनवट के नेतृत्व में श्रावक चांदमल सुराना, महेंद्र रुनवाल, पंकज डूंगरवाल ने सिविल अस्पताल में मरीजों को बिस्किट पैकेट व गरीब बस्ती में पहुंच कर गरीबों को वस्त्र वितरित किए।

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