• Home
  • Madhya Pradesh News
  • Ashta
  • जंगलों पर मंडराने लगा आग का खतरा, बुझाने नहीं साधन
--Advertisement--

जंगलों पर मंडराने लगा आग का खतरा, बुझाने नहीं साधन

भास्कर संवाददाता| आष्टा/जावर गर्मी का मौसम शुरू होते ही क्षेत्र में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:10 AM IST
भास्कर संवाददाता| आष्टा/जावर

गर्मी का मौसम शुरू होते ही क्षेत्र में जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। वन परिक्षेत्र के जंगलों में कुछ लोग अतिक्रमण करने की नीयत से आग लगा कर जंगल को नष्ट करने का प्रयास भी करते हैं ताकि बाद में खेती के लिए जमीन तैयार कर सकें। तहसील क्षेत्र में हजारों हेक्टेयर में जंगल फैला हुआ है। इसके बाद भी विभाग जंगल की आग बुझाने के लिए साधन नहीं है। इस संबंध में ग्रामीण हिम्मत सिंह ने बताया कि गर्मी आते ही वन जंगलों में आग का खतरा मंडराने लगता है। जंगलों के आस पास रहने वाले कुछ लोग पहले जंगल में आग लगा देते हैं फिर जंगल की भूमि पर कब्जा कर खेती करते हैं। इससे जंगल अतिक्रमण के चलते कम होता जा रहा है। वनों की भी कटाई धड़ल्ले से जारी है। जहां पहले घने जंगल हुआ करते थे वहां आज ठूंठ ही ठूंठ नजर आते हैं।

पतझड़ में लगती है आग : पतझड़ में मौसम में पेड़ों से पत्ते गिरकर जमीन पर फैलते हैं। इस बीच कोई ग्रामीण के जलती हुई बीड़ी या माचिस के तीली फेंकने से आग लग जाती है। इसकी चपेट में वन क्षेत्र के पेड़ आते हैं। इससे शासन को लाखों का नुकसान भी होता है।

इन गांवों में अधिक नुकसान : वन विभाग के रोलागांव, सिद्दीकगंज वन सर्कल में वन संपदा को अधिक नुकसान होता है। यहां पर अतिक्रमणकर्ता तथा ईंट भट्टे वाले आग लगा देते हैं। लकड़ियों को भट्टा जलाने में काम में लेते हैं।

आष्टा, जावर नगर और तहसील क्षेत्र के 365 गांवों की

आग बुझाने मात्र एक-एक दमकल

गर्मी के मौसम में वनों में आगजनी के घटनाएं बढ़ रही हैं।

2 तहसीलों के बीच दो दमकल

आष्टा व जावर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत 365 गांव आते हैं। इसके बावजूद आष्टा, जावर व कोठरी में ही एक-एक दमकल है। जो क्षेत्रफल के हिसाब से नाकाफी है। जबकि वन विभाग के पास यह साधन नहीं हैं।

नजर रखी जाती है