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77 हजार हेक्टेयर में चने का रकबा चौदह दिन बचे, नहीं हो रहे पंजीयन

सरकार किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं और चने का भावांतर में मौका दे रही है लेकिन सहकारी समिति कर्मचारियों की...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 27, 2018, 02:15 AM IST

77 हजार हेक्टेयर में चने का रकबा चौदह दिन बचे, नहीं हो रहे पंजीयन
सरकार किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं और चने का भावांतर में मौका दे रही है लेकिन सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल के कारण पंजीयन नहीं हो रहे हैं। गेहूं के पंजीयन 28 फरवरी और चने के लिए 12 मार्च तक पंजीयन होने हैं। इस बार चने का रकबा दोगुना है। जिले में 77 हजार हेक्टेयर में चने की फसल बोई है। भास्कर ने सोमवार को 9 गांवों का दौरा किया। पंजीयन केेंद्रों पर ताले लगे होने से किसान परेशान हैं। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों के पास ही ऑनलाइन पंजीयन सिस्टम का पासवर्ड और लिंक हैं। इस कारण काम रुका है। किसानों के मुताबिक गेहूं के लिए 12 मार्च की अंतिम तारीख है। हड़ताल से पंजीयन नहीं हो रहे हैं। ऐसे में फसल बेचना मुश्किल होगा। गुनौरा, पालनपुर, खोकसर, कजलास, नानपा, अंधियारी, रोहना, सांवलखेड़ा, पलासडोह सहित कई गांवों के किसानों के पंजीयन नहीं हुए हैं। विभागीय गड़बड़ी के कारण पंजीयन करने वाली समितियों काे भुगतान नहीं हुआ। इससे भी काम पिछड़ गया।

जिले के सहकारी समिति कर्मचारियों की हड़ताल से नहीं हो रहे पंजीयन

1 पंजीयन सिस्टम का पासवर्ड और लिंक सिर्फ सहकारी कर्मचारियों को मालूम।

2 पंजीयन करने वाली समितियों को पिछला भुगतान नहीं। सरकार के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं।

कंप्यूटर सिस्टम अपडेट नहीं

कृषि उपज मंडी समिति में ऑनलाइन पंजीयन नहीं हो पा रहे हैं। कर्मचारियों के पास ही पंजीयन करने वाले कंप्यूटर का पासवर्ड है। कर्मचारियों के हड़ताल पर होने के कारण काम रुका है।

किसानों के पास नहीं विकल्प

भास्कर टीम सोमवार दोपहर 1 बजे रोहना सहकारी समिति पर पहुंची तो समिति कार्यालय पर ताला लगा था। टिगरिया, गुनौरा, पालनपुर, खोकसर, कजलास और नानपा गांव क्षेत्र में चने का रकबा है। फसल तैयार है लेकिन पंजीयन नहीं हो पाए हैं।

यह दो बड़ी गड़बड़ी

1 पंजीयन सिस्टम का पासवर्ड और लिंक सिर्फ सहकारी कर्मचारियों को मालूम।

2 पंजीयन करने वाली समितियों को पिछला भुगतान नहीं। सरकार के पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं।

नुकसान पूरे जिले में, प्रशासन के लिए डोलरिया में ही ओलावृष्टि

इटारसी | जिले में ओलावृष्टि से नुकसान हुआ लेकिन प्रशासन केवल डोलरिया तहसील में नुकसान मान रहा है। जबकि इटारसी, बाबई और बनखेड़ी तहसील के किसान भी ओलावृष्टि से नुकसान का दावा कर रहे हैं। किसानों ने तहसीलों में एसडीएम और तहसीलदारों को ज्ञापन देकर सर्वे की मांग की है। प्रशासन ने केवल डोलरिया तहसील के 4,172 खातेदारों की फसलों का सर्वे किया है। इसमें 5 हजार हेक्टेयर में फसल खराब मानी। प्रभावित फसल के लिए 7 करोड़ 50 लाख रुपए मुआवजा शासन से मांगा है। अन्य क्षेत्रों के किसान सर्वे नहीं होने से नाराज हैं। किसान संघ के मीडिया प्रभारी शिवमोहन सिंह ने बताया प्रशासन जिले के कई किसानों की अनदेखी कर रहा है। ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए।

प्रशासन की यहां अनदेखी

इटारसी तहसील में मलोथर, तालपुरा, बांदरी, उपड़ी, टांगना, बरछा गांव के किसानों ने फसल बर्बाद होने का दावा किया है। इन गांवों में प्रशासन ने ओलावृष्टि नहीं मानी है। बाबई और बनखेड़ी क्षेत्र में भी किसानों ने फसलें प्रभावित होने की बात कही है। इसे लेकर कुछ किसानों ने तहसील कार्यालय पहुंच फसल पर मुआवजे की मांग भी की है। लेकिन प्रशासन ने यहां फसलों पर ओलावृष्टि का प्रभाव नहीं पाया। बनखेड़ी तहसील के मेंदागांव के किसान अयूब खान ने ढाई एकड़ गेहूं की फसल ओलावृष्टि से चौपट होने का दावा किया है।

डोलरिया तहसील: 25 से अधिक गांव

प्रभावित किसान: 4000 से अधिक

नुकसान: 5 हजार हेक्टेयर

गेहूं की क्षति: 90 प्रतिशत

चने की क्षति: 70 से 80 प्रतिशत

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Web Title: 77 हजार हेक्टेयर में चने का रकबा चौदह दिन बचे, नहीं हो रहे पंजीयन
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