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इन कविताओं की दी प्रस्तुति

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 09, 2018, 03:10 AM IST

वाणी को वीरता का तुम वरदान दो मां, कलम से मेरी रोशन ये जहान हो मां। देवास की मोना गुप्ता । पिता माता की खातिर मैं श्रवण कुमार बन जाऊं, हद कोई भी हो, अपनों की खातिर पार कर जाऊं। भोपाल की सुनीता पटेल। जो होते न सितारे तो रात झिलमिल नहीं होती, बिना मधुभाव के बोली भी ये कोकिल नहीं होती, आज की इस पावन उपस्थिति को मनु करती है नमन, जो होते न सुधि श्रोता ये तो ये महफिल नहीं होती। मोनिका पांडेय मनु, झांसी उप्र तुम्हें पाने की चाहत में, मैं हर राह से गुजरी हूं। कभी मंदिर की चौखट से कभी दरगाह से गुजरी हूं। गीता नायक बिलासपुर, छग धन्य है भाग्य कविता सुनाउंगी मैं, मां नमामि तेरी - तेरी आंचल के तले - तले। अराधना कौरव स्वतंत्र, नरसिंहपुर मेरा सजदा मुझे चोरी - चोरी चुपके - चुपके तिरछी नजर से देखे मेरा सजना। रेखा ताम्रकर राज बेटियों का मान करो, बहू का सम्मान करो, बालापन से बेटों को ये संस्कार दीजिए। कीर्ति प्रदीप वर्मा, बाबई 8. बरसों से जो अास जगी थी, आस मिटाने आई हूं, दीद के प्यासे दो नैनों की प्यास बुझाने आई हूं। प्रीति सरु गुनगुन, भिलाई छग फाकाकशी है रोज मगर हौसला तो है, मेहमां नवाज लिख दो मुझे इतिहास में। रेखा नायक, भोपाल मैं बेटी हूं निराला की, मैं तुलसी की चौपाई हूं। संगीता सरगम, बिलासपुर छग शीश और मां के मान से हो चुनाव यदि, शीश झुका मां के मान बढ़ाना चाहिए। प्रो. ओमपाल सिंह निडर, फिरोजाबाद यूपी

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