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हर बजट में प्रावधान, फिर भी आज तक 2000 में से 500 मजरे-टोलों तक नहीं पहुंची बिजली

सरकारें मजरे-टोलों तक बिजली पहुंचाने के वादे कर हर बजट में प्रावधान करती हैं। लेकिन अभी भी अंधेरे कायम है। केंद्र...

Dainik Bhaskar

Feb 01, 2018, 02:00 AM IST
हर बजट में प्रावधान, फिर भी आज तक 2000 में से 500 मजरे-टोलों तक नहीं पहुंची बिजली
सरकारें मजरे-टोलों तक बिजली पहुंचाने के वादे कर हर बजट में प्रावधान करती हैं। लेकिन अभी भी अंधेरे कायम है। केंद्र सरकार ने 2018 तक सभी मजरे-टोलों तक बिजली पहुंचाने का वादा किया था तो सीएम शिवराजसिंह चौहान ने दिसंबर 2017 तक ही प्रदेश के सभी मजरे-टोलों तक बिजली पहुंचाने का वादा किया था पर जनवरी 2018 खत्म होने के बाद भी धार जिले के 2000 में से 500 मजरे टोलों में बिजली नहीं पहुंच पाई है। भास्कर ने ग्रामीण क्षेत्रों में जब इसकी हकीकत देखी तो हालात कुछ इस तरह मिले कि कई गांवों के मजरों में अाज तक खंभे भी नहीं लगे हैं। तो कई जगह खेतों के फीडर से ग्रामीण घरों तक बिजली लाए है।

टवलाई : 40 मजरे-टोलों में काम अधूरा

टवलाई | टवलाई ग्रिड से 4 एफओसी बनाए हैं। जिसमें लुन्हेरा बुजुर्ग एफओसी में 14 गांव आते हैं। इनके 40 मजरे-टोलों में 24 घंटे बिजली देने का काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। कालीबावड़ी के 12 गांव के भी 40 मजरा-टोलाें में आधा अधूरा काम पड़ा है। टवलाई के चार-पांच मजरे टोले 24 घंटे सप्लाई से वंचित है। हतनावर एफओसी में भी करीब पांच-छह मजरे टोलों में आधा अधूरा काम हुआ है।

ग्राउंड रिपोर्ट

केंद्र सरकार ने 2018 तक सभी मजरे-टोलाें तक पहुंचाने का रखा था लक्ष्य

भूराकुआं : 50 घर के लोगों का सहारा सिर्फ चिमनियां

नालछा | मेगापुरा पंचायत के मजरे भूरा कुआं के 50 घरों में आज भी लोग चिमनी के उजाले में रात गुजारते हैं। क्षेत्र में घना जंगल होने से भय रहता है। गुलसिंह पिता वालसिंह ने बताया मेरे परिवार को अंधेरे में रहते दो पीढ़ी हो गई। बच्चों को पढ़ाई के लिए धार भेज दिया। शाम से ही भोजन बनाकर खा लेते हैं। घासलेट भी नहीं मिलता है। मूलसिंह पिता वालसिंह ने बताया दिनभर मजदूरी करते हैं और शाम ढलने से पहले घर पहुंच जाते हैं।

लकड़खाई : बिजली के खंभे ही नहीं लगे

राजगढ़ | ग्राम छड़ावद के मजरे उमरिया आज भी अंधेरे में है। हनुमंतिया काग में भी खंभे और ट्रांसफार्मर नहीं है। भानगढ़ सहित गांव उटावा में सहित टांडा के पिपरानी, जमाल, सरकिन्न में 24 घंटे लाइन नहीं मिल रही है। अधिकारी मार्च तक काम पूरा करने का दावा कर रहे हैं। जिले के अंतिम छोर सरदारपुर जनपद पंचायत तिरला के मजरे लक्कड़ खाई में तो बिजली ही नहीं पहुंची है। सुखी इमली,चौबारा, चालनीमाता ओर होलातलाई में खंभे ही नहीं लगे हैं।

अगस्त तक 500 मजरे-टोलों में भी पहुंचा देंगे बिजली

रिपोर्टिंग टीम : नालछा से सुनील तिवारी, बदनावर से महेश पाटीदार, खिलेड़ी से राहुल बैरागी, राजगढ़ से सुनील बाफना, टवलाई से मंगल जाट। समन्वय : सुनील उमरवाल (धार)।


पांदापाड़ा-फुलेड़ीपाड़ा : 2 किमी दूर से घरों तक लाए बिजली

खिलेड़ी | फुलेड़ी पंचायत के पांदापाड़ा व फुलेड़ीपाड़ा में 50 मकानों में 24 घंटे बिजली नहीं पहुंची है। जबकि पांदापाड़ा का एक युवा जितेंद्र मुनिया भारतीय सेना में सेवा दे रहा है। पांदा के पंच भंवरलाल चरपोटा ने बताया मजरे में बिजली के पोल नहीं है। एक-दो किमी दूर खेतों से तार बिछाकर लाइन घरों तक लाए। जो आठ घंटे ही चलती। बिजली के लिए विधायक को भी आवेदन दिए। ग्राम सभा में भी प्रस्ताव बनने, सर्वे भी हुआ लेकिन आगे प्रक्रिया नहीं हुई।

बगासापाड़ा-मानपुरा : 70 साल बाद भी नहीं पहुंची बिजली

बदनावर | जलोदखेता के गांव बगासापाड़ा एवं मानपुरा में आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची है। लोग अंधेरे में रात गुजारते हैं। पेयजल भी दूरदराज से लाते हैं। दोनों गांव में करीब 700-800 लोग निवासरत है। पंचायत शंभूपाड़ा अंतर्गत 5 पान्या में 7 साल से खंभे खड़े कर तार खींचने के बावजूद लोगों को बिजली नहीं मिली है। ऐसे में ग्रामीण खेतों से तार बिछाकर बिजली लाए। इस गांव की आबादी करीब 600 हैं। मानपुरा के कालू ने बताया कनेक्शन किसी घर में नहीं है। केरोसीन भी कम मिलता, खत्म होने पर तेल का दिया जलाकर रोशनी करते। बगासापाड़ा के नंदराम ने बताया आजादी के 70 साल बाद भी बिजली नहीं पहुंची है।

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