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आनंदेश्वर मंदिर पर गाए जा रहे फाग गीत

अब यहां फागुन मास में फाग गीत नहीं सुनाई देते। नगर में महीने भर तक रात में ढपली बजाते हुए फाग गीत गाने वाले लोगों की...

Danik Bhaskar | Mar 02, 2018, 02:00 AM IST
अब यहां फागुन मास में फाग गीत नहीं सुनाई देते। नगर में महीने भर तक रात में ढपली बजाते हुए फाग गीत गाने वाले लोगों की परंपरा तो बंद हो चुकी है लेकिन स्थानीय आनंदेश्वर महादेव मंदिर में अभी भी रात में दो-तीन घंटे तक फाग गीत सुनाई देते हैं। जो लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहे हैं।

मंदिर में स्थानीय गीत भजन गायक मुकेश शर्मा, कांतिलाल जोशी, पं. अखिलेश आनंद जोशी, भगवान माली, गुलाब माली, रमेशचंद्र हारोड़, कोकसिंह पंवार, कांतिलाल पाटीदार, शिवाजी मिस्त्री, पप्पू चौहान, संजय शर्मा, बाबूलाल रजक, दिलीप पाटीदार, पवन पाटीदार, छोगालाल मारू, राजेश मंडलोई, मुकेश हारोड़, मास्टर दीपक चावड़ा तथा उनके कई साथी रात में एकत्र होकर फाग गीतों की गंगा बहाते हैं। ब्रज में उड़े रे गुलाल, चालो रे मंदरिया, रंग रंगीलो छेल छबीलो सांवरिया, होली खेलन चले नंदलाल मथुरा की गलियों में, होली आई रे नंदिणी रो विरो आयो क्यों नी रे, देवर म्हारो रे हरिया रूमाल वालो रे, झांझरिया पैरी ने छोरी राते कठे गई थी वो, उठ मिल लो रे राम भरत आया, काना री सुनियोड़ी बातां अखियां से देखी रे, देवर मत मारो पिचकारी म्हारी भीगे चुनरिया, ऐले मेले जाओ भमर म्हाने एलम दीजो रे, कदीए नी पैरी मैं तो मचक मोजड़ी, फौजा रो दल बदल लई ने हनुमानजी चइड़िया रे जैसे गीत मंदिर से गूूंजते हैं।

आनंदेश्वर महादेव मंदिर में फाग गीत गाते सदस्य।