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सर्वर डाउन होने के कारण 1 माह में सिर्फ 1330 किसानों का ही हो पाया पंजीयन

अनुविभाग की दो बड़ी तहसीलों बरेली और बाड़ी में खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में समर्थन मूल्य पर खरीफ फसलों के विक्रय के लिए की...

Dainik Bhaskar

Sep 13, 2018, 02:06 AM IST
Bareli - सर्वर डाउन होने के कारण 1 माह में सिर्फ 1330 किसानों का ही हो पाया पंजीयन
अनुविभाग की दो बड़ी तहसीलों बरेली और बाड़ी में खरीफ विपणन वर्ष 2018-19 में समर्थन मूल्य पर खरीफ फसलों के विक्रय के लिए की जा रही पंजीयन प्रक्रिया धीमी गति से चल रही है। दोनों तहसीलों अभी तक कुल 1330 किसानों ने ही पंजीयन करवाया है। जबकि प्रक्रिया को प्रारंभ हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है। इसके तहत धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन, अरहर, उड़द, मूंग, मूंगफली, तिल एवं रामतिल का उपार्जन किया जाना है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा बरेली और बाड़ी तहसील में कुल 11 केंद्र स्थापित किए गए हैं। जहां किसानों के पंजीयन किए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया 10 अगस्त से प्रारंभ हुई है जिसकी अवधि 20 सितम्बर तक तय की गई है, लेकिन इस दौरान इतनी कम संख्या में पंजीयन होना प्रशासन की चिंता बढ़ा रहा है। अधिकारियों का इस संबंध में कहना है कि पंजीयन केंद्रों पर मौजूद आपरेटिंग सिस्टम सर्वर डाउन होने के कारण काम नहीं कर रहे हैं। यहां अक्सर इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या बनी रहती है। आॅपरेटरों को काम करने में बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

तुअर,धान के पंजीयन कम

बुधवार 12 सितंबर तक बरेली और बाड़ी तहसीलों में कुल 1330 किसानों ने अपनी विभिन्न उपज विक्रय के लिए पंजीयन करवाया है। विपणन सहकारी संस्था बरेली में 110, विपणन सहकारी समिति बरेली में 74, सेवा सहकारी समिति बरेली में कुल पंजीयन 103, कामतौन में 218, समनापुर में 109, धौखेड़ा में 171, उंटियाकलाॅ में 34, चैनपुर में 186, कन्हवार में 107, भारकच्छ कला में 79, मगरधा में 139 कृषकों द्वार पंजीयन करवाए हैं। जिनमें धान के 347, मक्का के 12, सोयाबीन के 14, तिल के 2, मूंग के 85, उड़द के 48 और तुअर के सबसे अधिक 927 किसान पंजीकृत हुए हैं। बाजरा, ज्वार, मूंगफली, रामतिल और कपास विक्रय करने वाले एक भी किसान ने पंजीयन नहीं करवाया है।

खरीफ की फसल अच्छी होने से किसानों को अच्छे उत्पादन की उम्मीद है।

वरिष्ठों को बता चुके हैं समस्या


बारिश से धान की फसलों का फायदा, तुअर का रकबा भी बढ़ा

राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस बार बारिश का मौसम अनिश्चित रहने के कारण कई किसानों ने तुअर की बोवनी कर दी है। जिससे विगत वर्ष की तुलना में तुअर का रकबा बढ़ा है। वहीं कुछ दिनों से अच्छी बारिश होने के कारण धान की फसल को भी फायदा बताया जा रहा है। हालांकि कम बारिश को देखते हुए धान के रकबे में काफी कमी भी सामने आई है।

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