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चार माह से डाकघर में काम ठप ई-पंचायत का सपना भी अधूरा

तहसील के सुल्तानगंज मुख्यालय पर विगत एक साल पहले पोस्ट आॅफिस का शुभारंभ किया गया था, लेकिन बीएसएनएल कंपनी के...

Danik Bhaskar | Mar 11, 2018, 02:00 AM IST
तहसील के सुल्तानगंज मुख्यालय पर विगत एक साल पहले पोस्ट आॅफिस का शुभारंभ किया गया था, लेकिन बीएसएनएल कंपनी के अधिकारियों की लापरवाही से यह पोस्ट आफिस अनुपयोगी साबित हो रहा है, क्योंकि बीएसएनएल ब्राडबैंड नेट बंद होने से पोस्ट आॅफिस के कामकाज ठप है। पोस्ट आॅफिस के अधिकारी कई बार दूर संचार विभाग के अधिकारियों को लिखित में दे चुके हैं। इसके बाद भी विभागीय अधिकारी अनसुना कर रहे हैं। पोस्ट आॅफिस के अधिकारियों का कहना है कई बार लिखित में भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों बीएसएनएल ब्राडबैंड चालू कराने की मांग कर चुके हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। यहां तक कि सुल्तानगंज क्षेत्र के नागरिकों के संयुक्त हस्ताक्षर कर भी भेज चुके हैं। सुल्तानगंज में बीएसएनएल का टावर तो लगा है, लेकिन न तो ब्राडबैंड केबल है ओर न ही मशीन सब बिखरा हुआ पड़ा है। जबकि यह टावर विगत कई वर्षों से बंद था जिसे अभी अभी चालू किया गया है।

नेटवर्क न मिलने से बीएसएनएल के उपभोक्ताओं की संख्या घटी

नेटवर्क नहीं मिलने से बीएसएनएल के उपभोक्ताओं की संख्या भी हुई कम

बीएसएनएल की लापरवाही से एक साल से डाकघर में लगा ताला।

मनरेगा मजदूर परेशान

पोस्ट आॅफिस खुलने से एक ओर क्षेत्र के नागरिकों ने खुशी जाहिर की थी, लेकिन चार माह से पोस्ट आॅफिस से लेन-देन नहीं होने से नागरिकों में आक्रोश व्याप्त है। वहीं दूसरी ओर मजदूरों का मनरेगा से भुगतान नहीं होने से मजदूर सहित पंचायतों के सरपंच और सचिव,पेंशनर्स काफी परेशान हैं।

गांवों में नहीं मिलता नेटवर्क

बेगमगंज क्षेत्र में कई गांव ऐसे हैं जहां किसी भी कंपनी का नेटवर्क नहीं मिलता है। ग्राम के लोग अपने अपने घरों से बाहर जाकर बात करते हैं। वहीं दूसरी ओर प्रत्येक ग्राम पंचायतों को ई पंचायत बनाने की कवायद विगत तीन वर्षों से चल रही है,लेकिन इसके बाद भी आज भी ई पंचायतें नहीं हुई हैं।

कई टावर हैं बंद

तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में बीएसएनएल विभाग द्वारा कई वर्ष पूर्व टावर तो खड़े कर दिए हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के कई टावर वर्षों से बंद पड़े हैं। बीएसएनएल के टावर बंद होने से ग्रामीण क्षेत्र में कंपनी का नेटवर्क नहीं मिलने से बीएसएनएल के उपभोक्ताओं की संख्या गिनी चुनी ही रह गई है, जबकि ऐसा नहीं है कि नागरिकों द्वारा शिकायतें न की गई हों, इसके बाद भी विभागीय अधिकारी मुख्यालय से तो नदारद रहते ही हैं और नागरिकों की समस्याओं को भी दरकिनार करते हैं।

दे चुके हैं आवेदन