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अभिमान में नहीं देवमयी बुद्धि में वास करते हैं भगवान: शास्त्री

श्रीकृष्ण ने जन्म तो मथुरा में लिया पर मथुरा मेंं रहे नहीं। जन्म लेते ही गोकुल में मां यशोदा के पास चले गए क्योंकि...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 09, 2018, 02:05 AM IST

अभिमान में नहीं देवमयी बुद्धि में वास करते हैं भगवान: शास्त्री
श्रीकृष्ण ने जन्म तो मथुरा में लिया पर मथुरा मेंं रहे नहीं। जन्म लेते ही गोकुल में मां यशोदा के पास चले गए क्योंकि मथुरा में मंडल का राजा कंस देह अभिमानी है। हमारा शरीर भी मथुरा पुरी मानव देह है। इसमें भी अभिमान रूपी काम क्रोध,लोभ अंहकार भरा है। हमें भी यशोदा मां की तरह यश लेने के लिए देवमयी बुद्धि लाना पड़ेगी। उक्त बात बरखुआ गांव में चल रही भागवत कथा में पं. विनोद शास्त्री ने कही। उन्होंने कहा कि कृष्ण के पिता वासुदेव एवं मां देवकी हैं। यशोदा मां यश देने वाली तो गोकुल में हैं। जिसके हृदय में देववास देवमयी बुद्धि और विश्व कल्याण की भावना व यश देने का भाव होगा तो भगवान अपने आप सबके हृदय में वास करेंगे। हमें भी वासुदेव देवकी यशोदा नंद की तरह बनना होगा तभी भगवान आएंगे।

ईश्वर प्राप्ति का सबसे सहज मार्ग है भक्ति

औबेदुल्लागंज|
मानव देह पाने के लिए देवी देवता भी तरसते हैं। क्योंकि यह ईश्वर प्राप्ति का एक मात्र मार्ग है, लेकिन आज का मानव ईश्वर को अपनी यादों में भी नहीं रखता है। जबकि मानव देह का एक मात्र लक्ष्य है ईश्वर को प्राप्त करना। यह मानव जीवन एक अवसर है ईश्वर की प्राप्ति का, जिसका सहज मार्ग भक्ति है जिस क्षण भक्ति मानव के हृदय में विराजमान होती है मानव अदभुत आनंद में डूब जाता है।

उक्त बात समीपस्थ बाघराज माई धाम में जंगल में मंगल महोत्‍सव के तहत चल रही शिव महापुराण के दौरान बाल संत शैलेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने अपने कथा के दौरान उपस्थित भक्तों से कही। उन्होंने कहा की हर मनुष्य को जीवन पर्यन्त इस संसार में अपनी उपयोगिता सिद्ध करने का प्रयास करते रहना चाहिए। जैसा की हमारे शास्त्र एवं ग्रंथों के अनुसार संपूर्ण प्रकृति के कण कण में ईश्वर का वास है उसी तरह मानव देह ईश्वर का जीता जागता मंदिर है।

चर्म चक्षुओं से भगवान को देखना असंभव है। इसीलिए जीवन में भक्ति को पाने का प्रयास कीजिए 84 लाख योनियों में से मात्र मनुष्य योनि में परमपिता परमेश्वर को प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आसपास के ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों भक्त कथा सुनने पहुंच रहे हैं।

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