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महाशिवरात्रि बापोली धाम में श्रद्धालुओं ने की शिव की आराधना, रात में देर रात तक हुआ जागरण

मंगलवार को शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में भगवान शिव की पूजन और आराधना की गई। क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों पर...

Danik Bhaskar | Feb 14, 2018, 02:10 AM IST
मंगलवार को शिवरात्रि पर्व पर मंदिरों में भगवान शिव की पूजन और आराधना की गई। क्षेत्र के प्राचीन धार्मिक स्थलों पर महापर्व को मनाने का श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती रही।

नगर के शिवालयों में भक्तों ने शिव उपासना व रात्रि जागरण किया। वहीं क्षेत्र के प्रसिद्ध शिवमंदिर बापोली आश्रम और जामगढ़, भगदेई के प्राचीन मंदिरों में शिव भक्त पूजा.अर्चना व रात्रि जागरण करने पहुंचे। हर वर्ष की तरह शिवरात्रि के पूर्व ही यहां मंदिरों में रंग रोगन किया गया। क्षेत्र की प्रसिद्ध प्राचीन धार्मिक स्थली बापोली धाम में हर वर्ष की तरह इस बार भी महाशिवरात्रि का पर्व आस्था के साथ मनाया गया। यहां मंदिर में प्रतिष्ठित प्राचीन शिवलिंग का महारुद्राभिषेक किया। रात्रि भर यहां महारुद्राभिषेक के साथ महाशिव-पार्वती पूजन हुआ। यजमानों द्वारा महारुद्राभिषेक का आयोजन मंदिर में परिवार सहित उपस्थित रहकर किया। बापोली धाम के लालबाबा ने बताया कि यहां विगत छह सालों से निरंतर भगवान शिव का महारुद्राभिषेक जारी है। महाशिवरात्रि के दिन चारों पहर विशेष पूजन-अर्चन होती है।

महाशिवरात्रि पर भगवान शंकर के जयकारों के साथ भक्तों ने पूजा अर्चना कर की आराधना

बापोली धाम में भगवान शिव के दर्शन करने हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालु।

पुरातात्विक महत्व के लिए जाना जाता है स्थान

बरेली से करीब दस किमी दूर स्थित बापोली आश्रम में प्राचीन शिवलिंग, श्री गणेश, संकटमोचन हनुमान की मूर्तियां आज भी पुरातात्विक धरोहर के रूप में स्थापित हैं। यहां क्षेत्र के सबसे प्राचीन शिव-पार्वती मंदिर की अपनी अलग विशेषता है। यहां बनी प्राचीन बावड़ी, गौशाला, धर्मशाला और यज्ञशाला की भव्यता देखने लायक है। बापोली आश्रम का अस्तित्व परम पूज्य गुरुजी नाम के साथ ही जाना जाता है। क्षेत्र के लोगों की मानें तो करीब एक सदी से यहां पूज्य गुरुजी की कृपा से पूरा क्षेत्र खुशहाल है। पहले यहां बीआबान जंगल ही देखने को मिलता था। गुरुजी के आशीर्वाद से आज ये क्षेत्र जंगल के स्थान पर तपोवन के रूप में प्रदेशभर में प्रसिद्ध हुआ है। इसे चमत्कार कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि बाड़, भूकंप, तूफान आदि जैसी कोई भी प्राकृतिक आपदा इस क्षेत्र से दूर ही रही हैं। जबकि पूरा क्षेत्र पहाड़ों से घिरा हुआ है।

झिलमिलाती रोशनी से जगमगाए शिवालय

बाड़ी|महाशिवरात्रि
पर आकर्षक विद्युत साज सज्जा के साथ बाड़ी कलां स्थित मुख्य शिवालयों में भूतेश्वर शिव शनि मंदिर, भुजी का मंदिर, गुसांई शिवालय, रामजानकी मंदिर, हनुमान मंदिर, दूधाधारी शिवालय, जटाशंकर शिवालय व बाड़ीखुर्द सहित पुराने बाजार स्थित खेड़ापति माता मंदिर, मारूति हनुमान मंदिर, नया बाजार, सहित विंध्यवासिनी देवी धाम सिरवारा, बालाजी मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं ने पूजा की।

शिवालयों में दिनभर हुए भजन, आज भी होंगे आयोजन

सिलवानी|
इस बार शिवरात्रि दो दिन मनाए जाने के कारण भक्तों में असमंजस की स्थिति रही। किसी ने मंगलवार को शिवालयों में पहुंचकर पूजा अर्चना की तो कई श्रद्धालुओं ने बुधवार को शिवरात्रि मानी। मंगलवार को दिनभर शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा। सुबह से ही महिलाएं पूजन अर्चन के लिए मंदिरों में पहुंच गईं थी। विधि विधान से भगवान शंकर की पूजा अर्चना कर जलाभिषेक किया गया तो वहीं घरों में भी रात भर भजन गाए गए। वहीं आज बुधवार को भी शिवालयों में धार्मिक आयोजन अनुष्ठान व मेले का आयोजन किया जाएगा। मंगलवार को भक्तों ने बिल्व पत्र, धतूरा , पंचामृत आदि सामग्री से भगवान भोले नाथ की पूजा अर्चना की। पंडित भूपेंद्र शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि का व्रत साधक को मोक्ष प्राप्ति के योग्य बनाता है। इस व्रत को करने से व्यक्ति का कल्याण होता है और इच्छित मनोकामना की पूर्ति होती है।

नर्मदा जल भरकर निकले कावड़िए, आज करेंगे अभिषेक

सिलवानी|
शिव का जलाभिषेक करने बम बम भोले का जयघोष करते बेगमगंज तहसील के रतनहारी गांव के करीब 30 शिव भक्त बोरास स्थित नर्मदा घाट पहुंचे। नर्मदा नदी से कावड़ में जल भरकर पैदल नगर में प्रवेश किया। कावड़ियों ने बताया कि वह 75 किमी की पैदल यात्रा कर रतनहारी गांव पहुंचेंगे। बुधवार को गांव में स्थित शिवालय में भगवान भोले का जलाभिषेक किया जाएगा। वहीं जमुनिया गांव के 108 कावड़िए नर्मदा जल भरकर बम बम भोले का जयकारा लगाते हुए शाम के समय करीब 6 बजे नगर से निकले। जो आज जमुनिया गांव स्थित भगवान भोले नाथ के मंदिर में शिवाभिषेक करेंगे।