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अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण: मिश्रा

अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण है। मानवता ही सबसे बड़ी पूंजी है। प्रभु के लिए सच्चे मन से रोना पड़ता है। रोए...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
अहंकार मनुष्य के पतन का सबसे बड़ा कारण है। मानवता ही सबसे बड़ी पूंजी है। प्रभु के लिए सच्चे मन से रोना पड़ता है। रोए बिना श्रीराम नहीं आते।

यह बात मानपुर टेकरी धाम में रविवार से शुरू हुए पंच कुंडीय श्रीराम महायज्ञ एवं सप्त दिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा के दौरान कथा वाचक मानस कोकिला प्रेमलता मिश्रा ने कही। उन्होंने जब श्रीराम बाल्यकाल की कथा सुनाई तो पंडाल प्रभु प्रेम और समर्पण के संवाद सुनकर भावुक हो गया। श्रीराम लक्ष्मण के शिक्षा ग्रहण, श्रीराम सीता विवाह एवं मां कैकई द्वारा वनवास आदि का प्रसंग सुनाया और श्रीराम की विभिन्न लीलाओं के अतुलनीय वर्णन किया गया। उन्होंने कहा संपत्ति सबके पास होती है लेकिन दिल किसी-किसी के पास होता हैं। और जिसके पास दिल होता है वहीं प्रभु की सच्ची भक्ति कर अपने मन में श्रीराम को बसा लेता है जिससे उसका उद्धार हो जाता है। अभी हमने कुछ दिन पहले रामनवमी मनाई लेकिन श्रीराम के कर्मों उनके वचनों को अपने मन में नहीं बसाया इसीलिए हम शांति की तलाश में भटक रहे हैं। यदि हमें शांति चाहिए तो श्रीराम के आदर्शों को अपने मन कर्म में बसाना होगा। अंत में आयोजक अमनासिंह लोधी व रूपसिंह लोधी सहित ग्रामवासियों ने आसंदी पर विशेष आरती उतारकर पूजा अर्चना की। कथा के प्रारंभ से पहले राधा कृष्ण मंदिर सोठिया से सुबह 9 बजे कलश यात्रा निकाली गई। जिसका मानपुर सोठिया जोड़ पर नपाध्यक्ष प्रतिनिधि मलखानसिंह जाट ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया एवं विधि विधान से पूजा अर्चना की तथा कलश यात्रा में शामिल कन्याओं को शीतल जल अपने हाथों से प्रदान किया। वहीं ग्रामीणों ने भी जगह जगह कलश यात्रा का स्वागत करते हुए पूजा अर्चना की। श्रीराम कथा 7 अप्रैल तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 6 बजे तक आयोजित की जाएगी। वहीं यज्ञाचार्य पं. रामगोपाल मिश्रा के मार्गदर्शन में यज्ञ का कार्य किया जाएगा।

धर्म

मानपुर टेकरी धाम में पंच कुंडीय श्रीराम महायज्ञ और सप्त दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का आयोजन हुआ

कथा से पहले निकाली गई शोभायात्रा।