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अधूरी तैयारियों के बीच ई-वे बिल को किया गया लागू, बाजार पर पड़ सकता है असर

अधूरी तैयारियों के बीच सरकार ने 1 अप्रैल से इंटरस्टेट स्तर पर ई-वे बिल को लागू किया है। इस बिल को लेकर न तो सरकार पूरी...

Danik Bhaskar | Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
अधूरी तैयारियों के बीच सरकार ने 1 अप्रैल से इंटरस्टेट स्तर पर ई-वे बिल को लागू किया है। इस बिल को लेकर न तो सरकार पूरी तरह से तैयारी है और न व्यापारी व ट्रांसपोर्टर। जिसका सीधा असर बाजार में सामान की उपलब्धता पर पड़ेगा। क्योंकि, ई-वे बिल तैयार होने से लेकर चेकिंग तक की प्रक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं है। कारोबारी भी इस पोर्टल पर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाए हैं। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) द्वारा तैयार किए गए, ई-वे बिल को लेकर कारोबारी और ट्रांसपोर्ट कंपनियां इसमें कई खामियां बता रहे हैं।

ट्रासंपोर्टर की परेशानी : ई-वे बिल तैयार करने के लिए इंटरनेट का उपयोग होना है और सर्वर डाउन होते ही यह काम ठप हो जाएगा। इससे सामान सप्लाई करना मुश्किल होगा। अधिकांश ट्रासंपोर्टर के पास कंप्यूटर सिस्टम, ट्रेंड स्टाफ नहीं है।

ई-वे बिल से किसे नुकसान और किसे फायदा

सरकार ः ई-वे बिल के जरिए सरकार ने सप्लाई होने वाले हर सामान पर निगरानी रखने और टैक्स वसूलने की प्लानिंग की है। क्योंकि, बिल में जितनी कीमत का सामान होगा, सरकार को उस हिसाब से टैक्स मिलेगा। इसके लिए रास्तों में चेकिंग प्वाइंट बनेंगे और यदि बिल राशि की अपेक्षा सामान ज्यादा कीमत का निकला तो टैक्स के बराबर ही जुर्माना लगाया जाएगा।

कारोबारी ः 50 हजार या उससे ज्यादा राशि का सामान प्रदेश में कहीं भी भेजने के लिए ई-वे बिल तैयार करना होगा। जिसके लिए व्यापारी अभी तैयार नहीं हैं और सॉफ्टवेयर पर काम भी शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में बिल तैयार होना मुश्किल है। बिना ई-वे बिल या इस बिल में गलत जानकारी के साथ सामान भेजना कारोबारियों को 100 प्रतिशत जुर्माने की सजा देगा।

ट्रांसपोर्टर ः तहसील में 3 छोटे ट्रांसपोर्टर हैं। किसी के पास भी कंप्यूटर पर काम करने वाला स्टाफ नहीं है। लेकिन अब हर ट्रांसपोर्टर को कंप्यूटर ट्रेंड स्टाफ रखना पड़ेगा और इंटरनेट कनेक्शन आदि भी लेना होगा। ऐसे हर ट्रांसपोर्टर पर 5 से 10 हजार रुपए का मासिक खर्च बढ़ जाएगा।